Ravana Speaks: जिसे दुनिया ने बुरा माना, अब वही रावण अपना पक्ष रखेगा; Dr Anupam की महागाथा अब बड़े पर्दे पर, दुनिया को चुनौती देगी अभिनव की फिल्म

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Ravana Speaks: अब तक रावण को खलनायक के रूप में देखा गया है. लेकिन, बहुत जल्द बड़े पर्दे पर वह खुद अपनी कहानी सुनाता नजर आएगा. बिहार के अभिनव ठाकुर के निर्देशन में बन रही यह फिल्म दर्शकों को एक ऐसे रावण से मिलवाएगी, जो सिनेमाघरों में अपना पक्ष रखते हुए सदियों पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगा.

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Patna:
भारतीय सिनेमा में अक्सर स्थापित कहानियों को ही दोहराया जाता है. लेकिन, अब एक ऐसी फिल्म आ रही है जो सदियों पुरानी मान्यताओं को एक नए नजरिए से परखने का साहस दिखाती है. फिल्म का नाम है रवाना स्पीकस. बेगुसराय के अभिनव ठाकुर इसका निर्देशन कर रहे हैं. फिल्म का (Ravana Speaks) का फर्स्ट लुक मुंबई में आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है. अभिनव कहते हैं कि यह फिल्म दर्शकों के साथ एक ऐसा संवाद करती है, जो दर्शकों को सही और गलत के बीच के नैतिक द्वंद्व पर सोचने को मजबूर कर देगी. रामा इंटरप्राइजेज की प्रस्तुति व अविजीत मांडल द्वारा निर्मित यह फिल्म प्रतीकात्मक शैली में समाज के दबे हुए सच को सामने लाने का प्रयास है.

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डॉ अनुपम ओझा की महागाथा पर आधारित है कहानी

फिल्म की सबसे बड़ी मजबूती इसकी जड़ें साहित्य में होना है. यह फिल्म मशहूर साहित्यकार और सिनेमा चिंतक डॉ अनुपम ओझा (Dr Anupam Ojha) की चर्चित रचना ‘मैं रावण नहीं हूं’ से प्रेरित है. साहित्य की दुनिया में इस रचना को महागाथा कहा गया है. क्योंकि, यह रावण के नजरिए से एक वैकल्पिक पक्ष सामने रखती है. डॉ अनुपम ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सिनेमा पर शुरुआती शोध किया है. यह फिल्म रावण को केवल एक खलनायक के रूप में नहीं, बल्कि उसके अपने सिद्धांतों और तर्कों के साथ पेश करती है, जिसे अब तक अनदेखा किया गया था.

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क्या है महागाथा की मूल कहानी?

साहित्य जगत में महागाथा के रूप में विख्यात यह कृति पारंपरिक राम-रावण युद्ध के नैरेटिव से हटकर रावण के अंतर्मन और उसके तर्कों को स्वर देती है. इसमें रावण को एक अहंकारी राक्षस के बजाय एक ऐसे प्रकांड विद्वान और दार्शनिक के रूप में दिखाया गया है, जो स्थापित सामाजिक और नैतिक ढांचों पर सवाल उठाता है. यह रचना रावण के उस वैकल्पिक विमर्श को सामने लाती है, जहां वह अपनी परिस्थितियों और निर्णयों के पीछे के ठोस कारण बताता है. यही वैचारिक गहराई अब सिनेमाई पर्दे पर दर्शकों को एक नई सोच के साथ रोमांचित करने वाली है.

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डायन प्रथा व लौंडा नाच पर कहानी पर बना चुके हैं फिल्म

निर्देशक अभिनव ठाकुर लौंडा नाच पर आधारित ‘द लिपस्टिक बॉय’ व डायन प्रथा पर आधारित ‘बिसाही’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. उनका विजन हमेशा से चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील विषयों को पर्दे पर उतारने का रहा है. रवाना स्पीकस के माध्यम से वे दर्शकों को एक ऐसी सिनेमाई यात्रा पर ले जाने के लिए तैयार हैं, जो न केवल देखने में सुंदर होगी बल्कि मानसिक रूप से भी समृद्ध होगी. उनकी कहानियों में शोध का पुट फिल्म को बनावटीपन से दूर रखता है.

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