कांग्रेस के बिहार विधायकों से अभी नहीं मिलेंगे राहुल

Updated at : 13 Nov 2015 5:59 PM (IST)
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कांग्रेस के बिहार विधायकों से अभी नहीं मिलेंगे राहुल

पटना / नयी दिल्ली : बिहार में महागंठबंधन सरकार में कांग्रेस के शामिल होने के संकेत के बीच पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज पार्टी महासचिव सी. पी. जोशी और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अशोक चौधरी से आज मुलाकात की. राहुल ने इन दोनों नेताओं से मुलाकात पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से 19 नवम्बर को मुलाकात […]

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पटना / नयी दिल्ली : बिहार में महागंठबंधन सरकार में कांग्रेस के शामिल होने के संकेत के बीच पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज पार्टी महासचिव सी. पी. जोशी और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अशोक चौधरी से आज मुलाकात की. राहुल ने इन दोनों नेताओं से मुलाकात पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से 19 नवम्बर को मुलाकात से पहले की है. सूत्रों ने कहा कि 45 मिनट चली इस बैठक के दौरान राहुल ने बिहार में पार्टी की ओर से हासिल बढ़त के बारे में विस्तृत चर्चा की.

विशेष तौर पर वह यह जानना चाहते थे कि पार्टी उन कुछ सीटों पर क्यों हार गई जिन पर वह पहले जीत के दृष्टिकोण से ए श्रेणी में आयी थी. इनमें गोविंदगंज, रामनगर, प्रानपुर और वाल्मीकिनगर जैसी सीट शामिल थीं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सभी 27 नवनिर्वाचित विधायकों और पांच विधान परिषद सदस्यों से 19 नवम्बर को मुलाकात करेंगे और सरकार में भागीदारी एवं संबंधित मुद्दों पर उनके विचार हासिल करेंगे.

ऐसा संकेत है कि पार्टी बिहार में गठबंधन सरकार में शामिल हो सकती है. महागठबंधन ने 178 सीटें जीती हैं जिसमें से राजद ने 80, जदयू 71 और कांग्रेस ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की है. मुख्यमंत्री के अलावा 35 और मंत्रिपद हैं. इसके तहत हरेक पांच सीटों पर एक प्रभार आता है. राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले बिहार प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अशोक चौधरी ने कहा कि भाजपा की हार इसलिए हुई क्योंकि राहुल ने गंठबंधन बनाने में एक प्रमुख भूमिका निभायीथी और गंठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नीतीश कुमार का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा उन्होंने उम्मीदवारों सहित पार्टी मामलों का निर्णय करने के लिए पार्टी की प्रदेश इकाई को पूरी छूट दीथी. उन्होंने कहा कि इन सभी चीजों से कांग्रेस ने बिहार में इतनी सीटें जीतीं.

महागंठबंधन में शामिल कांग्रेस ने विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 41 पर चुनाव लड़ा और 27 पर जीत दर्ज की. पिछली बार की चार सीटों के मुकाबले यह लगभग सात गुणा अधिक है. कांग्रेस ने 2010 के विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेेकिन मात्र चार सीटों पर ही जीत दर्ज कर पायी थी. वास्तव में पिछले वर्ष मई में लोकसभा चुनाव के बाद बिहार पार्टी के लिए पहली बड़ी जीत है. पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी 543 सदस्यी निचले सदन में मात्र 44 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पायी थी.

कांग्रेस ने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, दिल्ली और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. दिल्ली में पार्टी एक भी सीट पर जीत नहीं दर्ज कर पायी. बिहार में 1989 तक एक प्रभावशाली भूमिका में रही कांग्रेस ने आपातकाल के बाद के कुछ वर्षों को छोड़कर अधिकतर समय वहां शासन किया. आपातकाल के बाद जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के आह्वान पर अविभाजित जनता पार्टी सत्ता में आयी.

पिछले 25 वर्षों में मंडल और मंदिर लहर में कांग्रेस बिहार और उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी क्षेत्रों में हाशिये पर चली गई. उस दौरान सामाजिक न्याय शक्तियों का उद्भव हुआ और भाजपा मजबूत हुई. कांग्रेस पार्टी में यह आम धारणा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की प्रभावी भूमिका के बिना महागंठबंधन संभव नहीं था. नेताओं ने याद दिलाया कि वह राहुल गांधी ही थे जो नीतीश और लालू प्रसाद को साथ लाये और उस समय एक उत्प्रेरक की भूमिका निभायी जब राजद प्रमुख आपत्ति जता रहे थे. बिहार में जीत को राहुल को पार्टी प्रमुख बनाये जाने के अच्छे समय के तौर पर देखा जा रहा है. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि चुनाव से कई महीने पहले राहुल और नीतीश कुमार के बीच दिल्ली में 40 मिनट की बैठक ने अहम भूमिका निभाई और इसे ‘‘महत्वपूर्ण’ बताया जा रहा है.

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