मुश्किल से सुनते है PM: नीतीश

Updated at : 08 Aug 2015 9:38 PM (IST)
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मुश्किल से सुनते है PM: नीतीश

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि लोगों को उतना ही बोलना चाहिये जितना वे कर के दिखा सकते हैं अन्यथा चीजें खराब हो सकती हैं. मोदी पर परोक्ष रुप से निशाना साधते हुए नीतीश कुमार ने एक लतीफे का जिक्र किया जिसमें […]

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नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि लोगों को उतना ही बोलना चाहिये जितना वे कर के दिखा सकते हैं अन्यथा चीजें खराब हो सकती हैं. मोदी पर परोक्ष रुप से निशाना साधते हुए नीतीश कुमार ने एक लतीफे का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह पर नहीं बोलने का आरोप था जबकि मोदी मुश्किल से सुनते हैं. बिहार में सामाजिक क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा, ये सब चीजें सिर्फ बातें करने से नहीं हो जातीं. अगर वैसा संभव हो पाता तो इस देश में कई शीर्ष सुवक्ता हैं. बोलना एक बात है और कर के दिखाना अलग बात.

कुमार ने मोदी का नाम लिये बगैर कहा, मैंने व्हाट्सएप पर एक जोक सुना कि पूर्ववर्ती (प्रधानमंत्री) नहीं बोलेंगे और मौजूदा नहीं सुनेंगे. सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होता. आपको इसे करना होता है. उतना ही बोलें जितना आप कर सकते हैं. आप जितना कर सकते हैं, उससे ज्यादा बोलते हैं तो एक दिन आप पटरी से उतर जाएंगे. बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं जहां कुमार का मुकाबला भाजपा से है. नीतीश ने लालू प्रसाद के राजद से गठजोड़ किया है. उन्होंने कहा कि कहा कि वह वास्तव में जितना कर सकते हैं, हमेशा उससे कम बोलने में उन्होंने विश्वास किया है.

जदयू नेता ने राज्य में 2005 में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की ध्वस्त स्थिति की आलोचना की जब वह लालू प्रसाद के राजद को हराकर सत्ता में आये थे. लेकिन अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी के साथ गठबंधन के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया. बिहार विकास संवाद को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है और यह इस संबंध में एक दृष्टि पेश करेगा कि 2025 तक राज्य कैसा होना चाहिये. उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार की स्थिति बिहार के लिये बेहतर रहेगी. भाजपा नीत राजग यह विचार पेश कर रहा है.

अपनी राय के पक्ष में उन्होंने केंद्र में संप्रग सरकार रहने के दौरान बिहार के अलावा भाजपा शासित मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ में हुए विकास का जिक्र किया. कुमार की पार्टी जदयू राजग में शामिल थी और मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी ने 15 साल पुराने संबंधों को तोड लिया था. नीतीश ने कहा, विकास केंद्र और राज्य दोनों का कर्तव्य है. अन्यथा संघीय ढांचे का क्या होगा. उन्होंने अपने भाषण में बिहार में अपने करीब 10 साल के शासन के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों में हुए कायाकल्प का विस्तार से जिक्र किया.

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