डिप्टी सीएम मोदी की अध्यक्षता में एसएलबीसी की हुई बैठक, कर्ज देने का गिर रहा बैंकों का ग्राफ
Updated at : 08 Feb 2020 8:46 AM (IST)
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पटना : राज्य के सभी बैंकों का आम लोगों को कर्ज देने में लगातार तीन साल से ग्राफ गिरता जा रहा है. कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब है. इस बार एसीपी यानी लोन बांटने की स्थिति अब तक के न्यूनतम स्तर 54.58 प्रतिशत पर पहुंच गयी है. चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 […]
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पटना : राज्य के सभी बैंकों का आम लोगों को कर्ज देने में लगातार तीन साल से ग्राफ गिरता जा रहा है. कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब है. इस बार एसीपी यानी लोन बांटने की स्थिति अब तक के न्यूनतम स्तर 54.58 प्रतिशत पर पहुंच गयी है. चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में बैंकों का सीडी (साख-जमा) अनुपात घटकर 42.98 प्रतिशत पर पहुंच गया है. डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी शुक्रवार को शहर में आयोजित राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 71वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे.
डिप्टी सीएम ने राज्य में बैंकों के खराब प्रदर्शन पर सख्त आपत्ति दर्ज कराते हुए बैंकों को अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए जमकर फटकार लगायी. उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में एक लाख 45 हजार करोड़ रुपये के ऋण बांटने का जो लक्ष्य बैंकों को दिया गया है, उसे युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर पूरा करें. बचे हुए लगभग डेढ़ महीने में 95 फीसदी तक लक्ष्य हासिल करने की पुरजोर कोशिश करें. पिछले तीन साल में इसके लक्ष्य में लगातार गिरावट दर्ज की गयी है. 2017 में 66.56 प्रतिशत, 2018 में 57.40 और 2019 में घटकर 54.58 प्रतिशत पर पहुंच गया. इसके अलावा 2019 में राज्य का सीडी (साख-जमा) अनुपात भी घटकर 42.98 प्रतिशत हो गया है.
दिसंबर 2018 में सीडी रेसियो 43.18 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत में यह 44.09 प्रतिशत था. बांका, जहानाबाद, नालंदा, गोपालगंज, मधेपुरा, मधुबनी व भागलपुर समेत 10 जिले ऐसे हैं, जहां एसीपी का प्रतिशत सबसे खराब है.
सीडी अनुपात भी घटा, युद्ध स्तर पर कर्ज बांटने का निर्देश
यह रहा बैंकों का प्रदर्शन
– गव्य विकास 21.38%
– केसीसी 12.04%
– मत्स्यपालन 2.05%
– मुर्गीपालन 6.11%
– कृषि यांत्रिकरण 7.19%
पूरे राज्य में 12 फरवरी से चलेगा अभियान
उपमुख्यमंत्री ने कहाकि नये केसीसी खोलने की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है. 2017 में तीन लाख 93 हजार नये केसीसी खोले गये थे, जिनकी संख्या 2019 में घटकर एक लाख 20 हजार हो गयी. नये केसीसी खोलने के लिए पूरे राज्य में 12 फरवरी से 15 दिनों का विशेष अभियान चलेगा. इसमें पीएम किसान योजना के अंतर्गत निबंधित 60 लाख किसानों में केसीसी से वंचित किसानों का नया केसीसी या ऋण क्षमता बढ़ाने
या रिन्यूवल का काम किया जायेगा. पशुपालन व मत्स्यपालन समेत अन्य किसी कृषि सहायक गतिविधियों में भी केसीसी दिया जायेगा.
ईंट भट्ठे वालों को भी मिले लोन
इस दौरान ईंट भट्ठा वालों ने मामला उठाया कि बैंक वाले उन्हें ऋण नहीं देते हैं. इस पर डिप्टी सीएम ने बैंक वालों को कहा कि वे इन्हें लोन देने की पहल करें, ताकि इस उद्योग को भी बढ़ावा मिल सके. इस सेक्टर में ऋण देना बेहतर पहल होगी.
प्रत्येक पंचायत में खुले एक सीएसपी
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में महज तीन हजार 677 शाखाएं हैं. इनकी संख्याबढ़ाने के लिए प्रयास किये जाये. कम- से- कम प्रत्येक पंचायत में कम- से- कम एक सीएसपी (कस्टमर सर्विस प्वाइंट) खोले जायें, ताकि निचले स्तर तक लोगों को बैंकिंग सुविधाएं मिल सके. उन्होंने कहा कि अगली एसएलबीसी की बैठक में प्रखंड और पंचायतवार बैंकों की शाखाओं का आंकड़ा प्रस्तुत किये जाये. पिछले एक साल में बैंकिंग क्रॉसपोंडेंस (बीसी) की संख्या में 942 की कमी आयी है. 678 पंचायतों में कोई सीएसपी तक नहीं है.
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