ePaper

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब SLET करना होगा पास, बहाली के बदले नियम

Updated at : 09 Mar 2026 8:20 PM (IST)
विज्ञापन
BSUSC

BSUSC ने बहाली के बदले नियम

Bihar Assistant Professor SLET Exam: बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के लिए अब राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (SLET) पास करना अनिवार्य होगा. नए ड्राफ्ट के अनुसार, नेट या स्लेट पास अभ्यर्थी ही लिखित परीक्षा में बैठ सकेंगे. पीएचडी धारकों को कुछ शर्तों के साथ छूट दी जाएगी, लेकिन अनुभव के लिए अब कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे.

विज्ञापन

Bihar Assistant Professor SLET Exam, अनुराग प्रधान: बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से पहले अब स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट (SLET) आयोजित किया जायेगा. इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी ही आगे असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे.

राज्य सरकार उच्च शिक्षा में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के मकसद से यह व्यवस्था लागू करने जा रही है. इसका ड्राफ्ट बिहार लोकभवन ने जारी किया है. लोकभवन से जारी ड्राफ्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह परीक्षा यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) की तर्ज पर आयोजित की जायेगी.

राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और विषय ज्ञान का मूल्यांकन किया जायेगा. एसएलइटी लागू होने से राज्य के विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी और भर्ती के लिए एक समान मानक स्थापित हो सकेगा.

कुछ मामले में मिल सकती है छूट

बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए नया ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 के प्रस्तावित नियमों के अनुसार विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थियों को यूजीसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा. यह परीक्षा बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के साथ लागू होगी.

पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही असिस्टेंट प्रोफेसर के बहाली के लिए आयोजित परीक्षा में बैठ सकते हैं. ड्राफ्ट तैयार करने वाले एक कुलपति ने कहा कि मसौदे के अनुसार जिन अभ्यर्थियों के पास यूजीसी के नियमानुसार संबंधित विषय में पीएचडी की डिग्री है, उन्हें नेट व स्लेट से छूट दी जा सकती है. इसके लिए पीएचडी नियमित मोड में होनी चाहिए और शोध प्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया गया हो. साथ ही उम्मीदवार की मौखिक परीक्षा होनी आवश्यक है.

इसके अलावा पीएचडी के दौरान अभ्यर्थी को अपने रिसर्च से संबंधित कम से कम दो रिसर्च पेपर प्रकाशित करने होंगे, जिनमें से एक मान्यता प्राप्त जर्नल में होना जरूरी है. साथ ही दो शोध पत्र यूजीसी, आइसीएसएसआर या सीएसआइआर जैसे संस्थानों द्वारा प्रायोजित सेमिनार या कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत करना होगा. मसौदे में यह भी प्रावधान है कि जिन विषयों में यूजीसी द्वारा नेट या स्लेट आयोजित नहीं किया जाता, उन विषयों के लिए यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी.

विदेश के टॉप- 500 विश्वविद्यालयों से पीएचडी प्राप्त अभ्यर्थियों को भी कुछ मामलों में पात्र माना जायेगा. स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट (SLET) में संबंधित विषयों में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पीजी पास होना आवश्यक होगा. स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संबंधित विषय का अध्ययन होना चाहिए.

अनुभव के लिए नहीं मिलेगा अंक

अनुभव के लिए अलग से कोई अंक नहीं दिया जायेगा और पीएचडी को केवल पात्रता (नेट के समान) माना जा सकता है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

हिंदी और दर्शनशास्त्र की पात्रता में पीजी के साथ ही ग्रेजुएशन स्तर पर मुख्य विषय होना आवश्यक

बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए तैयार किये गये नये ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 में विभिन्न विषयों की पात्रता को स्पष्ट किया गया है. मसौदे के एनेक्सचर-II में हिंदी और दर्शनशास्त्र विषय के लिए भी पात्रता और समकक्ष विषयों की सूची जारी की गयी है.

मसौदे के अनुसार हिंदी विषय में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थी के पास भाषा विज्ञान, तुलनात्मक साहित्य, अनुवाद अध्ययन या लोक साहित्य जैसे विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री हो सकती है. हालांकि इसके लिए यह अनिवार्य शर्त रखी गयी है कि अभ्यर्थी ने स्नातक स्तर पर हिंदी भाषा व साहित्य को मुख्य विषय के रूप में पढ़ा हो.

इसी तरह दर्शनशास्त्र विषय के लिए भी समकक्ष विषयों को शामिल किया गया है. इसके तहत बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन, तुलनात्मक धर्म अध्ययन और योग दर्शन में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन के पात्र होंगे. लेकिन इसके लिए स्नातक स्तर पर दर्शनशास्त्र को मुख्य विषय के रूप में पढ़ना अनिवार्य होगा. ग्रेजुएशन में मुख्य विषय को शामिल करने पर स्टूडेंट्स ने नाराजगी जतायी है.

इसे भी पढ़ें: बिहार में बदलेगा मौसम का मिजाज, 19 जिलों में तेज हवा और बारिश का अलर्ट

अगले 5 साल में चालू होंगी 25 नई मिलें, सम्राट चौधरी बोले- अब AI को ताकत बनाएंगे किसान

विज्ञापन
Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन