पटना : पढ़ने की उम्र में हाथ में पिस्तौल, बाइकर्स गैंग तैयार कर रहा अपराधियों की नर्सरी

Updated at : 23 Jan 2020 6:09 AM (IST)
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पटना : पढ़ने की उम्र में हाथ में पिस्तौल, बाइकर्स गैंग तैयार कर रहा अपराधियों की नर्सरी

विजय सिंह पटना : उम्र है स्कूलों में पढ़ाई की, खेल मैदान में पसीना बहाने की और नेशनल फेम में छा जाने की. लेकिन, शहर के टीनएजर्स पिस्तौल थाम रहे हैं. महंगी गाड़ी, ब्रांडेड कपड़े व ऐयाशी की लत उन्हें अपराधी बना रही है. राजधानी में बाइकर्स गैंग अपराधियों की नर्सरी तैयार कर रहा है. […]

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विजय सिंह
पटना : उम्र है स्कूलों में पढ़ाई की, खेल मैदान में पसीना बहाने की और नेशनल फेम में छा जाने की. लेकिन, शहर के टीनएजर्स पिस्तौल थाम रहे हैं. महंगी गाड़ी, ब्रांडेड कपड़े व ऐयाशी की लत उन्हें अपराधी बना रही है. राजधानी में बाइकर्स गैंग अपराधियों की नर्सरी तैयार कर रहा है.
गैंग के लोग स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से पहले रंगदारी वसूलते हैं और धीरे-धीरे उन्हें भी अपने प्रभाव में ले ले रहे हैं. नशे से इसकी शुरुआत होती है और जब लत लग जाती है, तो वही टीनएजर्स बाइकर्स गैंग के इशारे पर शहर में लूट करने लगते हैं. हाल के दिनों में लूट की जितनी भी घटनाएं हुई हैं उनमें 80% अपराधी टीनएजर्स ही निकले हैं. बड़ी बात यह है कि पुलिस के पास इनका कोई रिकाॅर्ड नहीं रहता है.
15-20 हजार में लेते हैं हत्या की सुपारी
केस-1
07 जुलाई, 2015 को कदमकुआं थाने के दलदली रोड में बीजेपी नेता नागा की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इसमें पुलिस ने अंजुम इकबाल, अलाउद्दीन इकबाल व राजा को पकड़ा था. इसमें लाइनर का काम टीनएजर्स ने किया था. इनको 10-15 हजार दिये गये थे.
केस-2
12 अप्रैल, 2019 की शाम चौक थाना इलाके में दालमोट व्यवसायी व जदयू नेता शंकर पटेल की हत्या कर दी गयी थी. घटना के बाद जब पुलिस ने चार अपराधियों को पकड़ा, तो पता चला कि बेऊर जेल से सुपारी देकर हत्या करायी गयी थी. इसमें भी टीनएजर्स थे.
बड़े अपराधी अब खुद अपराध करने के बजाय टीनएजर्स को हत्या की सुपारी दे रहे हैं. क्योंकि, कम पैसे में ही काम हो जाता है. रिस्क भी कम होता है. आपसी रंजिश में दूसरों को मौत के घाट उतारने व बदला लेने की नीयत से भी कुछ असामाजिक तत्व इनका सहारा ले रहे हैं.
चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे अपराधी मामूली रकम लेकर हत्या कर दे रहे हैं. बीते साल दो हत्याओं में अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि हर किलर को 15-20 हजार रुपये मिले थे. कांट्रैक्ट किलर हमेशा जांच टीम को चकमा देने में सफल हो जाते हैं. वारदात को अंजाम देकर वह प्रदेश के बाहर भाग जाते हैं.
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