पशुओं के प्रति क्रूरता बंद हो, गांधी मैदान में जुटे पशु अधिकार कार्यकर्ता
Published by : Karuna Tiwari Updated At : 25 May 2026 1:22 PM
पशुओं के प्रति क्रूरता बंद हो
Patna News: त्योहारों के सीजन से ठीक पहले राजधानी पटना के गांधी मैदान में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने मूक पशुओं के खिलाफ होने वाली क्रूरता के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया.
Patna News: (हिमांशु देव) त्योहारों के सीजन से ठीक पहले राजधानी पटना के गांधी मैदान में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने मूक पशुओं के खिलाफ होने वाली क्रूरता के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. इस सभा का मुख्य उद्देश्य किसी विशेष धर्म, त्योहार या परंपरा का विरोध करना नहीं, बल्कि हर क्षेत्र और उद्योग में जानवरों के साथ होने वाले शोषण और हिंसा को पूरी तरह बंद करने की मांग करना था.
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में “पशु शोषण बंद हो”, “रक्तपात रोकें” और “कुर्बानी नहीं, इंसानियत चुनें” जैसे नारों वाली तख्तियां ले रखी थीं. कार्यकर्ताओं ने कहा कि सभी त्योहार बिना किसी निर्दोष जीव को नुकसान पहुंचाए भी खुशी और पवित्रता के साथ मनाए जा सकते हैं.
किसी धर्म या त्योहार का विरोध नहीं : ऋषिका

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख कार्यकर्ता ऋषिका ने स्पष्ट कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किसी धर्म या त्योहार की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है. उन्होंने कहा कि उनका विरोध हर तरह के पशु शोषण से है, चाहे वह मांस उद्योग हो, डेयरी उत्पाद, अंडे, शहद या फिर दवाओं के परीक्षण के लिए पशुओं पर किए जाने वाले प्रयोग.
उन्होंने कहा, “जानवर भी संवेदनशील होते हैं और उन्हें भी दर्द महसूस होता है. किसी भी बेजुबान की जान लेना सही नहीं ठहराया जा सकता.”
डेयरी और मांस उद्योग को भी बताया क्रूरता का हिस्सा
वहीं, कार्यकर्ता आशीष ने कहा कि समाज में यह धारणा गलत है कि पशु अधिकार कार्यकर्ता केवल त्योहारों के दौरान होने वाली बलि का विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि डेयरी और अन्य पशु उत्पादों का उपयोग करने वाले लोग भी अनजाने में इस क्रूरता का हिस्सा बनते हैं.
आशीष ने कहा, “दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन हर वर्ग के लोग करते हैं, लेकिन इसके पीछे पशुओं के शोषण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हर स्तर पर पशुओं के प्रति हिंसा और अत्याचार को रोकना जरूरी है.”
सामाजिक न्याय से जोड़ी मुहिम

अमजोर चंद्रन ने इस अभियान को सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता से जोड़ते हुए कहा कि जब इंसान बिना पशु उत्पादों के भी स्वस्थ जीवन जी सकता है, तो फिर बेजुबानों की हत्या और शोषण का कोई औचित्य नहीं बचता. उन्होंने लोगों से करुणा और इंसानियत को अपनाने की अपील की.
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By Karuna Tiwari
करुणा तिवारी बिहार के आरा, वीर कुंवर सिंह की धरती से आती हैं। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की। 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है। अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं, ताकि सशक्त और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक सच्चाई पहुंचा सकें।
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