अस्पतालों में टेटनस की सूई खत्म

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पटना : पटना जिला के अस्पतालों में टेटनस की सूई नहीं मिल रही है. शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी टिटनेस इंजेक्शन टेटवैक खत्म हो गया है. प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर भी बहुत मुश्किल से यह दवा उपलब्ध हो पा रही है. पटना में रोजाना लगभग पांच हजार टेटवैक इंजेक्श्न […]

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पटना : पटना जिला के अस्पतालों में टेटनस की सूई नहीं मिल रही है. शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी टिटनेस इंजेक्शन टेटवैक खत्म हो गया है. प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर भी बहुत मुश्किल से यह दवा उपलब्ध हो पा रही है. पटना में रोजाना लगभग पांच हजार टेटवैक इंजेक्श्न की खपत है.

आपके शहर में

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कई सरकारी अस्पताल ऐसे हैं, जहां अब एक भी टेटवैक इंजेक्श्न नहीं बचा है. जबकि यह इंजेक्श्न लोहे से कटने से लेकर कुत्ते के काटने तक में लगाना जरूरी होता है. अगर यह इंजेक्श्न 24 घंटे के अंदर न लगाया जाये, तो मरीज को जानलेवा बीमारी टिटनेस हो सकती है.
डिप्थीरिया के साथ इंजेक्श्न की सप्लाइ बना कारण : एक अस्पताल के अधीक्षक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि टिटनेस के इंजेक्श्न खत्म होने का बड़ा कारण स्वास्थ्य महकमे का वह फैसला है, जिसमें अब टिटनेस के साथ डिप्थीरिया बीमारी का भी इंजेक्श्न एक साथ बनाया जाने लगा. यह टीकाकरण को लेकर लिया गया फैसला था.
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की रिपोर्ट के बाद प्रयोग के तौर पर सरकार ने डिप्थीरिया और टिटनेस के टीके को एक में मिलाने का निर्णय लिया. जैसे ही यह निर्णय आया दवा कंपनी ने टेटवैक बनाना बंद कर दिया, जबकि नयी दवा केवल नवजात और किशाेरों के लिए उपयोगी थी. इस बीच खबर है कि जल्द ही बीएमएसआइसीएल एक बार फिर से टेटवैक इंजेक्श्न मंगा रही है.
लाइलाज है बीमारी, तीन महीने से नहीं है दवाई
डॉक्टरों का कहना है कि टिटनेस एक ऐसी बीमारी है, जिसकी पहचान समय से नहीं हो पाती है. जब तक पता चलता है, तब तक मरीज को बचा पाना बहुत मुश्किल होता है. इसे केवल एंटी वैक्सीन से ही रोका जा सकता है.
यही कारण है कि हर सरकारी अस्पताल में यह इंजेक्श्न मुफ्त में उपलब्ध होता है, लेकिन पिछले तीन महीने से सरकारी अस्पतालों में नये इंजेक्श्न नहीं आये हैं. पुराने इंजेक्श्न जहां थे, वह भी खत्म होते जा रहे हैं. टिटनेस का इंजेक्शन जंग लगे लोहे के कटने, कुत्ते के काटने, बंदर के काटने या किसी अन्य जानवर के काटने पर लगाया जाता है.
जल्द अस्पतालों में आयेगा टेटवैक इंजेक्श्न : सीएस
टेटनस की सूई खत्म हो चुकी है. लेकिन हमने बीएमएसआइसीएल से इंजेक्श्न की मांग की है. स्वास्थ्य समिति की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था. विधानमंडल सत्र को लेकर भी हमने सूचित किया है. उम्मीद है नये इंजेक्श्न जल्द ही आ आयेंगे.
राजकिशोर चौधरी,
सिविल सर्जन, पटना
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