माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का ब्याज कम करने के लिए केंद्र को पत्र लिखेगा बिहार

Updated at : 22 Nov 2019 5:02 AM (IST)
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माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का ब्याज कम करने के लिए केंद्र को पत्र लिखेगा बिहार

पटना : डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ब्याज दर को कम करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे. इन्हें भी स्वयंसेवी संस्थान (एसएचजी) की तर्ज पर ब्याज में अनुदान मिले. एसएचजी को तीन प्रतिशत का अनुदान मिलता है. उपमुख्यमंत्री गुरुवार को मुख्य सचिवालय […]

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पटना : डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ब्याज दर को कम करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे. इन्हें भी स्वयंसेवी संस्थान (एसएचजी) की तर्ज पर ब्याज में अनुदान मिले. एसएचजी को तीन प्रतिशत का अनुदान मिलता है.

उपमुख्यमंत्री गुरुवार को मुख्य सचिवालय के सभागार में आयोजित माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन आद्री की तरफ से किया गया था. डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकारी बैंकों से चार फीसदी की दर पर ऋण मिलने के बावजूद लोग 18 से 24 फीसदी के ब्याज पर मिल रहे कर्ज में फंस जाते हैं. सरकारी बैंकों से आसानी से लोन नहीं मिलने के कारण आम लोग इनसे लोन लेने में रुचि दिखाते हैं.
कार्यशाला में शामिल 45 एमएफआइ में कुछ ने विधि-व्यवस्था का मसला उठाया. इस दौरान वित्त प्रधान सचिव डाॅ एस सिद्धार्थ, सचिव (व्यय) राहुल सिंह, पशुपालन सचिव एन विजय लक्ष्मी, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरविंद चौधरी, आरबीआइ के क्षेत्रीय निदेशक देवेश लाल, नाबार्ड के अमिताभ लाल, संजीव मित्तल, एके ठाकुर,आद्री के पीपी घोष, बरना गांगुली, अमित बख्शी मौजूद थे.
माइक्रो फाइनेंस से कर्ज बांटने में बिहार तीसरे नंबर पर
मोदी ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस संस्थान के प्रतिनिधि अब एसएलबीसी की बैठक में भी शामिल होंगे. संस्थान के स्तर से लोन देने के मामले में तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद बिहार का तीसरा स्थान है, जबकि रिकवरी देश में सबसे अच्छी है.
बिहार में एनपीए का प्रतिशत महज 0.3 है, जबकि, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में यह सात प्रतिशत है. उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक एमएफआइ ने 13 हजार करोड़ का लोन दिया और इसके 35 लाख से ज्यादा ग्राहक बन चुके हैं. रिकवरी दर 99 फीसदी तक है. अगर किसी एमएफआइ को किसी तरह की परेशानी होती है, तो सीधे वित्त विभाग में फोन करे.
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