पुआल और गेहूं की डलिया को खेतों में न जलाएं : डाॅ प्रेम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Nov 2019 4:16 AM

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खगौल : कृषि विभाग की ओर से बुधवार को पटना जिला की जमालुदीनचक पंचायत के गोरगावा मंदिर परिसर में रबी मौसम के किसानों के लिए चौपाल आयोजित की गयी. उद्घाटन कृषि विभाग पशु मत्स्य संसाधन विभाग बिहार के मंत्री प्रेम कुमार, दानापुर की विधायक आशा सिन्हा, कृषि विभाग के सचिव एन श्रवण कुमार व पंचायत […]

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खगौल : कृषि विभाग की ओर से बुधवार को पटना जिला की जमालुदीनचक पंचायत के गोरगावा मंदिर परिसर में रबी मौसम के किसानों के लिए चौपाल आयोजित की गयी. उद्घाटन कृषि विभाग पशु मत्स्य संसाधन विभाग बिहार के मंत्री प्रेम कुमार, दानापुर की विधायक आशा सिन्हा, कृषि विभाग के सचिव एन श्रवण कुमार व पंचायत की मुखिया अरुण देवी ने संयुक्त रूप से किया.

मंत्री ने कहा कि राज्यभर में किसान चौपाल का शुभारंभ किया गया है. किसानों को खरीफ मौसम की तरह रबी मौसम में भी चौपाल से कृषि से संबंधित क्षेत्रों की नयी तकनीक की जानकारी मिलेगी.
20 नवंबर से पांच दिसंबर तक किसान चौपाल सभी जिलों की पंचायत व गांवों में अलग-अलग तिथियों में चलेगी. चौपाल में कृषि विभाग द्वारा कृषि से संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए किसानों से उनका सुझाव भी लिए जायेगा. फसल कटनी के उपरांत समय व मजदूर के अभाव में किसान पुआल व गेहूं के डलिया को खेतों में ही जला देते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी आती है.
साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता है. फसल अवशेष को खेतों में नहीं जलाएं, बल्कि उसका प्रबंधन करें. उसे जलाने के बदले उसको मिट्टी में मिलाए उससे वर्मी कंपोस्ट बनाएं. श्री कुमार ने कहा कि चौपाल से कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को कृषि एवं इससे संबंध क्षेत्र में संबंधित नवीनतम तकनीकी की जानकारियां दी जायेंगी.
पटना प्रमंडल के संयुक्त निदेशक उमेश प्रसाद मंडल, संयुक्त उप निदेशक ओम प्रकाश, पटना प्रमंडल के उप निदेशक धर्मवीर पांडेय, पीडी आत्मा रवींद्र प्रसाद सिंह, उप निदेशक भूमि संरक्षण आलोक कुमार, भाजपा नेता राजेश राय, नीलम सिंह, विश्वामित्र उपाध्याय, उपयुक्तता के आधार पर विशेष फसलों का चयन किया जायेगा.
कृषि विभाग के सचिव डॉ एन श्रवण कुमार, पटना प्रमंडल के संयुक्त निदेशक उमेश प्रसाद मंडल, संयुक्त उप निदेशक ओम प्रकाश, पटना प्रमंडल के उप निदेशक धर्मवीर पांडेय, रवींद्र प्रसाद सिंह, आलोक कुमार, जमालुद्दीनचक मुखिया अरुणा देवी, पूर्व पार्षद सह भाजपा नेता राजेश राय विश्वामित्र उपाध्याय, अरुण कुमार समेत कई पुरुष व महिला किसान मौजूद थीं.
मत्स्यपालन पर दिया गया जोर
फुलवारीशरीफ. बिहार के मन (तालाब) एवं चौर में मात्स्यिकी विकास के उद्देश्य से केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के संयुक्त तत्वावधान में बिहार वेटनरी कॉलेज प्रांगण में बिहार के अार्द्रभूमि मात्स्यिकी प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया
. उद्घाटन कृषि-सह-पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने किया. डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ अन्य विकल्पों पर भी कार्य किये जा रहे हैं. इसमें मत्स्यपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
बिहार राज्य आर्द्रभूमि मन एवं चौर, टैंक, तालाब, और नदियों के रूप में विशाल जलीय संपदा से संपन्न है. बिहार में लगभग पांच लाख हेक्टेयर बाढ़ कृत जलक्षेत्र (मन, चौर) राज्य के सबसे महत्वपूर्ण मत्स्य संसाधन है. इनमें मत्स्य उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं जिसका विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है.
कृषि रोड मैप में 3000 हेक्टेयर की आर्द्रभूमि को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए 75 करोड़ का प्रावधान किया गया है. सचिव, पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग डॉ एन विजयालक्ष्मी ने कहा, पीएम पैकेज के तहत मत्स्य संसाधन ने 1100 हेक्टेयर में मछलीपालन का टारगेट लिया है. उन्होंने आगे कहा कि किसान सरकार की योजनाओं को समझें और आवेदन देकर योजनाओं का लाभ उठाएं.
निदेशक, केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान डॉ बसंत कुमार दास ने कहा, बिहार में हमारी पांच परियोजनाएं चल रही हैं, जिनसे मत्स्यपालन में तीन गुना वृद्धि हुई है. निशात अहमद, संयुक्त निदेशक (मात्स्यिकी) ने मत्स्यपालन पर किसानों को जागरूक किया. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रामेश्वर सिंह ने कहा, प्रदेश में पानी का बहुत बढ़िया स्रोत है, उसका सबसे बढ़िया उपयोग मछलीपालन है. कार्यक्रम में सैकड़ों किसान और मत्स्यपालकों ने भाग लिया.
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