अलविदा विज्ञानी बाबू

महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे. गुरुवार की सुबह उन्होंने पीएमसीएच में अंतिम सांस ली. लंबे समय से सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी से ग्रसित डॉ सिंह अपनी मेधा व प्रतिभा के चलते जन-मानस में रच बस चुके थे. लोग उन्हें ‘भारत के स्टीफन हॉकिन्स’ से लेकर ‘आइंस्टीन को चुनौती देने वाले शख्सियत’ के रूप […]
महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे. गुरुवार की सुबह उन्होंने पीएमसीएच में अंतिम सांस ली. लंबे समय से सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी से ग्रसित डॉ सिंह अपनी मेधा व प्रतिभा के चलते जन-मानस में रच बस चुके थे. लोग उन्हें ‘भारत के स्टीफन हॉकिन्स’ से लेकर ‘आइंस्टीन को चुनौती देने वाले शख्सियत’ के रूप में रेखांकित करते थे. भोजपुर के एक गांव बसंतपुर से कैलिफोर्निया और फिर भारत वापसी के बीच उन्होंने मील के कई पत्थर गाड़े.
अलविदाविज्ञानी बाबू ! (उनके गांव में लोग उन्हें विज्ञानी बाबू के नाम से ही जानते थे.) आप बिहार के जनमानस में जिंदा रहेंगे. आपका जीवन उन मेधावी विद्यार्थियों को रोशनी देता रहेगा, जो अभावों के अंधेरे में अपनी प्रतिभा को तराशने की जद्दोजहद कर रहे हैं. आपका जीवन संघर्ष यह बताता रहेगा कि प्रतिभा को धरोहर मानकर सहेजा जाना चाहिए.
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