पटना : बैंकों में 60 हजार करोड़ रुपये जमा किसानों को नहीं मिल पा रहा लोन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Nov 2019 4:51 AM

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कृषि योजनाओं का किसानों को नहीं मिल रहा लाभ पटना : राज्य के बैंकों में किसानों काे कर्ज देने के मद के साठ हजार करोड़ रुपये जमा है, लेकिन बैंक यह राशि किसानों को नहीं दे पा रहा है. ऐसे में किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत कृषि लोन नहीं देने वाले बैंकों पर […]

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कृषि योजनाओं का किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
पटना : राज्य के बैंकों में किसानों काे कर्ज देने के मद के साठ हजार करोड़ रुपये जमा है, लेकिन बैंक यह राशि किसानों को नहीं दे पा रहा है. ऐसे में किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत कृषि लोन नहीं देने वाले बैंकों पर कृषि विभाग कार्रवाई करेगा. कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने बैंकों में जमा राशि की समीक्षा को लेकर संबंधित बैंक अधिकारियों एवं विभागीय पदाधिकारियों के साथ शुक्रवार को बैठक की.
मंत्री ने बैंक अधिकारियों व अन्य संबंधित लोगों को बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए वार्षिक खास योजना के किसानों को 60 हजार करोड़ कृषि लोन उपलब्ध कराना है. लेकिन, बैंकों के द्वारा किसानों को लोन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. ऐसे में जो बैंक किसानों को लोन नहीं दे रहे हैं, उन बैंकों से कृषि विभाग अपनी विभिन्न योजनाओं के तहत पड़ी राशि को हटा लेगा. गौरतलब है कि पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक से लेकर अन्य कई बैंकों में हजारों करोड़ की कृषि व पशुपालन योजना राशि पड़ी हुई है.
जून तक मात्र 14 फीसदी मिला कर्ज
इस वित्तीय वर्ष 2019-20 में जून
तक बैंकों ने तय राशि की मात्र 14 फीसदी लोन उपलब्ध कराया है. अब अगले छह माह वाली बैठक नवंबर में होगी. जानकारी के अनुसार अब तक 30 फीसदी से भी कम लोन किसानों को दिया गया है. छमाही बैठक के बाद आंकड़े सामने आयेंगे. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि व
डेयरी, फिशरी, पॉल्ट्री योजनाओंमें लोन के लिए बैंकों द्वारा किसानोंको परेशान किया जाता है. ऐसेमें जो बैंक अधिक से अधिक लोन देंगे विभाग कम लोन देने वाले बैंकों से अपना पैसा निकाल कर उन बैंकों में रखेगा.
तीन दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश
मंत्री ने बैंक अधिकारियों से विगत तीन वर्षों में
कृषि एवं अन्य एलाइड एक्टिविटी (डेयरी, फिशरी, पॉल्ट्री) के लिए विभिन्न योजनाओं में ऋण वितरण की रिपोर्ट तीन दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
उन्होंने बताया कि गो पालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन, मत्स्यपालन योजनाओं में लगभग 200 करोड़ रुपये अनुदान की राशि बैंकों में पड़ी हुई है. बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. मंत्री ने विभागीय योजनाओं के कस्टम हायरिंग,राष्ट्रीय बागवानी मिशन,मुख्यमंत्री बागवानी मिशन,कौशल विकास कार्यक्रम,जैविक खेती प्रोत्साहन योजना इत्यादि तथा डेयरी, पशुपालन, मत्स्यपालन में ऋण वितरण की रिपोर्ट तीन दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया.
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