सोशल मीडिया ने छठ गीतों को बनाया ग्लोबल
Updated at : 01 Nov 2019 6:59 AM (IST)
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पटना : बिहार की लोक आस्था का महापर्व छठ अब क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रह गया है. धीरे-धीरे इसकी ग्लोबल पहचान बन रही है. विदेशों से लेकर दूसरे प्रदेशों में रह रहे बिहारी छठ पर्व के बहाने अपनी मूल संस्कृति को याद करना नहीं भूलते. जापान, सिंगापुर, न्यूयाॅर्क से लेकर मुंबई, दिल्ली व दक्षिण […]
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पटना : बिहार की लोक आस्था का महापर्व छठ अब क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रह गया है. धीरे-धीरे इसकी ग्लोबल पहचान बन रही है. विदेशों से लेकर दूसरे प्रदेशों में रह रहे बिहारी छठ पर्व के बहाने अपनी मूल संस्कृति को याद करना नहीं भूलते.
जापान, सिंगापुर, न्यूयाॅर्क से लेकर मुंबई, दिल्ली व दक्षिण भारतीय राज्यों में छठ पूजा की तस्वीरें आम हैं. बिहारियों की इस संस्कृति को याद दिलाने में सोशल मीडिया का रोल अहम है. यू-ट्यूब से लेकर सोशल मीडिया पर छाये दूसरे टूल्स लगातार छठ गीतों व इसकी महत्ता को सुदूर विदेशों तक पहुंचा रहे हैं.
एक वक्त में लोकगायिका शारदा सिन्हा के गाये गीत ही छठ पूजा की पहचान थे, लेकिन सोशल मीडिया के बदलते दौर में हर साल रिलीज होने वाले 150 से 200 छठ विडियो इस पर्व की महत्ता का एहसास करा जाते हैं. इस महापर्व की सादगी ने विदेशियों को भी अपना मुरीद बना लिया है.
संस्कृति व परिवार की याद दिलाता है छठ
वर्ष 2016 में शारदा सिन्हा की आवाज में चर्चित छठ विडियो ‘ पहिले पहले कइनी … ‘ बनाने वाले बिहारी निर्माता-निर्देशक नितिन नीरा चंद्रा कहते हैं कि छठ परिवारों को जोड़ने वाला त्योहार है. दुनिया के किसी कोने में रहने वाला बिहारी इस त्योहार को अपने परिवार के साथ मनाना चाहता है.
ऐसे में शॉर्ट विडियो उनको अपनी संस्कृति व परिवार की याद दिलाते हैं. पिछले चार साल से लगातार इस मौके पर विडियो रिलीज कर रहे नितिन ने बताया कि उनके विडियो को देखकर कई लोगों ने छठ करना शुरू कर दिया. जापान-सिंगापुर जैसे देशों में रह रहे बिहारी भी छठ पूजा का इंतजार करते हैं. इस साल विभिन्न लोकगायकों के 150-200 शॉर्ट विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिनको काफी रिस्पांस भी मिल रहा है.
सोशल मीडिया पर छायी क्रिस्टिना
लोक भाषा में गाये जाने छठ गीत के दीवाने सिर्फ बिहारी ही नहीं, बल्कि विदेशी भी हैं. बेहद मीठे और कानों को सुकून देने वाले यह गीत सोशल मीडिया पर कई विदेशियों को भी गुनगुनाते देखा जा सकता है.
इनमें एक जर्मनी की क्रिस्टिना भी हैं. हर साल उनका छठ विडियो फेसबुक सहित सोशल मीडिया के तमाम टूल्स पर वायरल होता है. समाजशास्त्री रंधीर कुमार बताते हैं कि काफी सादगी भरा त्योहार होने की वजह से यह दूसरों को भी प्रभावित करता है. इस पूजा में किसी पंडित या कर्मकांड की जरूरत भी नहीं पड़ती. कोई भी व्यक्ति अपनी श्रद्धा से इसे मना सकता है. इस त्योहार के गीत भी काफी सरल होते हैं. यह व्रत इंसान को संयम रखना सीखाता है.
सोशल मीडिया के बिना अब जीवन की कल्पना नहीं. छठ पर रिलीज होने वाले विडियो अगली पीढ़ी को उनकी मातृभाषा व संस्कृति से जोड़ने का प्रयास है. मातृभाषा मर गयी तो संस्कृति भी मर जायेगी. इसलिए संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी सोशल मीडिया की भूमिका अहम है. छठ विडियो को हमेशा से काफी अच्छा प्यार मिलता रहा है.
-नितिन नीरा चंद्रा, फिल्म निर्माता-निर्देशक.
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