दीघा के अस्थायी तालाब में हुआ मूर्ति विसर्जन
Updated at : 10 Oct 2019 7:22 AM (IST)
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पटना : बुधवार को मंगलवार से भी अधिक पूजा समितियों ने मूर्ति विसर्जन किया. इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से अस्थायी तालाब बनवाये गये हैं, जहां मूर्तियों का विसर्जन किया गया. जिला प्रशासन ने पूजा समिति, थानेदार और शांति कमेटी के साथ बैठक कर पहले ही तय कर दिया था कि इस बार गंगा […]
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पटना : बुधवार को मंगलवार से भी अधिक पूजा समितियों ने मूर्ति विसर्जन किया. इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से अस्थायी तालाब बनवाये गये हैं, जहां मूर्तियों का विसर्जन किया गया. जिला प्रशासन ने पूजा समिति, थानेदार और शांति कमेटी के साथ बैठक कर पहले ही तय कर दिया था कि इस बार गंगा नदी में मूर्तियों का विसर्जन नहीं होगा. ऐसा करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा.
इसके लिए जगह निर्धारित की गयी थी. इसमें दानापुर से लेकर डाकबंगला तक की मूर्तियों का विसर्जन पाटीपुल के पास बनाये गये अस्थायी तालाब में किया गया. वही पटना सिटी में मूर्तियों के विसर्जन के लिए भद्रघाट पर भी तालाब बनवाया गया है. जहां विसर्जन किया गया.
यहां पर सुरक्षा व निगरानी के लिए सिटी एसपी व मजिस्ट्रेट की तैनाती की गयी थी. खास बात यह है कि यहां पर चौबीस घंटे के लिए तीन चरण में तैनाती की गयी है. एक मजिस्ट्रेट 8 घंटे तक ड्यूटी करेंगे. एडीएम लॉ एंड ऑडर्र कृष्ण कन्हैया प्रसाद सिंह ने बताया कि पालीगंज के अनुमंडल पदाधिकारी को दिन में पाटीपुल के पास तैनात किया गया है.
आधी से अधिक मूर्तियाें का हुआ विसर्जन : पटना जिले में कुल 1386 मूर्तियां स्थापित की गयी थी. जिसमें से बुधवार की दोपहर तक 636 मूर्तियों का विसर्जन कर दिया गया था.
इसमें पटना सदर में 146 मूर्तियां, दानापुर में 95, मसौढ़ी में 10, बाढ़ 45, पटना सिटी में 340 मूर्तियों का विसर्जन किया गया. देर रात तक मूर्तियों के विसर्जन का कार्य जारी था. सभी जगह पुलिस की तैनाती की गयी थी. जिला प्रशासन के पदाधिकारियों की मानें तो गुरुवार तक सभी मूर्तियाें का विसर्जन कर दिया जायेगा.
विसर्जन से पहले निकाला जा रहा था साज-सज्जा का सामान : इस बार जिला प्रशासन ने नेशनल ट्रिब्यूनल के नियमों के मुताबिक मूर्ति विसर्जन कराने का फैसला किया है. इसके लिए पहले से ही निर्देशित किया गया था कि पहले मूर्ति पर लगाये गये सजावट के सामान, हवन-पूजन के सामान को तालाब में नहीं डालना है. विसर्जन के पहले सबकुछ उतार लेना है. इसके बाद मूर्ति को अस्थायी तालाब में डालना है. इसके बाद 48 घंटे बाद मूर्ति में लगे बांस व पुआल को भी निकालना है.
तालाब में नीचे त्रिपाल डालकर विसर्जन करने का निर्देश जारी किया गया था. अब जिला प्रशासन के पदाधिकारी व मजिस्ट्रेट इसकी निगरानी कर रहे हैं. नियम का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने की बात कही गयी है.
बुधवार को अधिक प्रतिमाएं हुईं विसर्जित
पटना. पटना में पिछले 10 दिनों से बड़े उत्साह और श्रद्धा
के साथ दुर्गापूजा धूमधाम से मनायी गयी. इस दौरान शहर के कई चौक-चौराहों पर भव्य पूजा पंडाल स्थापित किये गये, जिनमें सुंदर प्रतिमाएं बनायी गयीं. सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन हर किसी ने पूजा-पंडालों में मूर्ति से लेकर पंडाल तक की खूबसूरती को निहारा. मंगलवार को विजयादशमी से ही मूर्ति विसर्जन शुरू हो गया. हालांकि बुधवार को मंगलवार से भी अधिक मूर्तियां विसर्जित की गयीं.
दूसरे दिन भी हुआ विसर्जन
विजयादशमी के अलावा शहर के कई इलाकों में दूसरे दिन यानी बुधवार को भी मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित होती दिखीं. डाकबंगला चौराहा, राजा बाजार, कदमकुआं, कुर्जी के अलावा दीघा और दानापुर की कई मूर्तियां विसर्जित की गयीं. बेली रोड के रामेश्वर सिंह बताते हैं कि शहर में कई बड़ी मूर्तियां हर साल विजया दशमी के कल होकर विसर्जित होती आयी हैं.
इस कारण बुधवार को दोपहर से ही धूमधाम से मूर्तियों को विसर्जित किया जा रहा था. एसके पुरी की सुनीता कहती हैं कि मैं नवरात्र में नौ दिनों तक पूजा करने के बाद जब मां को खोइंचा देती हूं, तो रोना आ जाता है. मां की विदाई कठिन होती है, लेकिन करना जरूरी है.
बड़ी और छोटी देवी जी पहले होती हैं विसर्जित
पुरानी परंपरा है कि विजयादशमी के दिन सबसे पहले बड़ी देवी और छोटी देवी जी विसर्जित होती हैं. इसके अलावा बंगाली अखाड़ा, कालीबारी और अन्य बंगला समुदाय द्वारा स्थापित मूर्तियों को भी विजयादशमी के दिन विसर्जित किया जाता है. बंगाली समुदाय में सिंदूर के खेल का भी आयोजन होता है, जिसमें मूर्ति विसर्जन से पहले सभी सुहागन महिलाएं मां दुर्गा पर चढ़ायी गयी सिंदूर को अपनी मांग पर लगाती हैं. एक दूसरे के गालों पर भी सिंदूर लगाया जाता है और मां से अगले साल आने की विनती करती हैं.
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