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गांधी के सपनों का समाज बनाना हम सब का दायित्व : नीतीश कुमार

Updated at : 03 Oct 2019 7:34 AM (IST)
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गांधी के सपनों का समाज बनाना हम सब का दायित्व : नीतीश कुमार

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि गांधी के सपनों का समाज बनाना हम सब का दाियत्व है. राज्य की सभी पंचायतों में 26 अक्तूबर से जल-जीवन-हरियाली अभियान औपचारिक रूप से लागू हो जायेगा. इसके तहत सभी पंचायतों में 11 सूत्री कार्यक्रम लागू किये जायेंगे. आगामी तीन साल में इसके अंतर्गत तय सभी कार्यक्रम […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि गांधी के सपनों का समाज बनाना हम सब का दाियत्व है. राज्य की सभी पंचायतों में 26 अक्तूबर से जल-जीवन-हरियाली अभियान औपचारिक रूप से लागू हो जायेगा. इसके तहत सभी पंचायतों में 11 सूत्री कार्यक्रम लागू किये जायेंगे. आगामी तीन साल में इसके अंतर्गत तय सभी कार्यक्रम मिशन मोड में पूरे किये जायेंगे.

इस अभियान पर राज्य सरकार अपने खजाने से 24 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी. 11 सूत्री कार्यक्रम में एक अभियान गंगा नदी के पानी को गया, नवादा और राजगीर तक पहुंचाने का भी है.
मुख्यमंत्री महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर बुधवार को शहर के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस मौके पर जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत की गयी. सीएम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर गांधीजी के विचारों के आधार पर ही इस अभियान को तैयार करके इसकी शुरुआत की गयी है.
हम गांधी के सपनों का समाज बनाना चाहते हैं. अगर बिहार के गौरव को फिर से पाना चाहते हैं, तो गांधी के विचारों को अपनाने के साथ समाज में प्रेम, सदभाव और सौहार्द का वातावरण बनाना पड़ेगा. उन्होंने नयी पीढ़ी के प्रति विश्वास जताते हुए कहा कि मौलिक रूप से गांधी के विचारों को समझेंगे. समारोह को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी सुदर्शन रेड्डी ने भी संबोधित किया. समारोह में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा भी मौजूद थे.
सभी पंचायतों में 26 अक्तूबर से चलाया जायेगा जल-जीवन-हरियाली अभियान
बापू के विचारों को स्थायी रूप से लगाएं कार्यालयों में
सीएम ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में बापू के विचारों और सिद्धांतों को लगाये गये हैं, लेकिन इन्हें इस तरह से लगाने की जरूरत है कि कोई चाहकर भी इन्हें उखाड़ या हटा नहीं सके. इन्हें सिर्फ लिखकर नहीं टांगें. नहीं तो कुछ दिन बाद राजपाट में ऐसा आदमी आ जायेगा, जो इन विचारों को हटा देगा.
सीएम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) इस धरती को नष्ट कर देगी. पहले लोग पढ़ते-लिखते थे, लेकिन आज कल सोशल मीडिया के आने से किसी फोटो को बस इधर-उधर करते रहते हैं और कहते हैं, यह वायरल हो गया. किसी काम को करने में मानवता का बोध होना चाहिए. मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए.
गांधी के विचारों को बच्चों तक पहुंचाया जायेगा
समागम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आजकल गांधी की पूजा करने वालों की संख्या बढ़ गयी है. उनके प्रति श्रद्धा तो सभी रखते हैं, लेकिन अब उन्हें देवता मानने लगे हैं. देवता मानने पर लोग उनकी बातों को दिल में नहीं रखते हैं. यह चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में गांधी के कथा वाचन का मतलब उनके जीवन पर लिखी कहानियों का अर्थ बच्चों को बताना है.
इसके मद्देनजर इस बार पांच सितंबर से यह व्यवस्था की गयी है कि शिक्षक इसका पाठ कर बच्चों को पूरा अर्थ बतायेंगे. इसके लिए सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया गया है. 10-15 प्रतिशत बच्चों के मन में भी अगर बापू के प्रति समर्पण उत्पन्न हो गया, तो यह बड़ी बात होगी.
जल-जीवन-हरियाली में होंगे कार्यक्रम
जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के 11 कार्यों में राज्य के सभी तालाबों और कुओं को कब्जा मुक्त करते हुए उनका जीर्णोद्धार किया जायेगा. सभी कुओं को चिह्नित किया गया है. जल स्रोत की पुरानी प्रथा को फिर से जीवित किया जायेगा. सभी आहर-पइन का भी जीर्णोद्धार किया जायेगा. सभी चापाकल और कुओं के पास सोखता बनाये जायेंगे. नये जल स्रोत भी विकसित किये जायेंगे.
चेक डैम बनाये जायेंगे और छोटी नदियों को विकसित किया जायेगा. उन्होंने कहा कि गंगा नदी के जल को गया, राजगीर, नवादा जैसे जल संकट से जूझ रहे इलाकों में पीने के लिए पहुंचाया जायेगा. गया निर्वाण और ज्ञान की भूमि है, फिर भी जल संकट है.
राजगीर के कुंड भी अब बंद होने के कगार पर आ गये हैं. जहां पहले बारिश नहीं होती थी, वहां अचानक काफी बारिश होने लगी है. पर्यावरण असंतुलन का यह सबसे बड़ा उदाहरण है. सीएम ने कहा कि सरकारी भवनों में रेन वॉटर हर्वेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है. इस अभियान के तहत सघन वृक्षारोपन होगा.
इस बार डेढ़ करोड़ पौधे लगाये गये हैं, जिससे हरियाली का प्रतिशत 15 से बढ़कर 17 हो जायेगा. पौधे सड़क के किनारे समेत अन्य सभी स्थानों पर लगेंगे. एक, दो या तीन कतार में पौधे लगाये जायेंगे. किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप क्रॉप साइकिल की जानकारी दी जायेगी. सोलर ऊर्जा के लिए आम लोगों को प्रेरित किया जायेगा.
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