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भर्ती संगठनों को बनाएं भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता के क्षेत्र

Updated at : 20 Sep 2019 7:58 AM (IST)
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भर्ती संगठनों को बनाएं भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता के क्षेत्र

सुरेंद्र किशोर राजनीतिक विश्लेषक सरकारी नौकरियों में सिर्फ वास्तविक योग्यताधारी उम्मीदवारी की बहाली के कई फायदे हैं. उससे कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ परोक्ष लाभ होंगे.जिस दिन से सिर्फ योग्य लोग ही बहाल होने लगेंगे, उसके दूसरे दिन से ही शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षण-परीक्षण का स्तर भी सुधरने लगेगा. लोग जान जाएंगे कि पढ़े बिना नौकरी […]

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सुरेंद्र किशोर
राजनीतिक विश्लेषक
सरकारी नौकरियों में सिर्फ वास्तविक योग्यताधारी उम्मीदवारी की बहाली के कई फायदे हैं. उससे कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ परोक्ष लाभ होंगे.जिस दिन से सिर्फ योग्य लोग ही बहाल होने लगेंगे, उसके दूसरे दिन से ही शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षण-परीक्षण का स्तर भी सुधरने लगेगा. लोग जान जाएंगे कि पढ़े बिना नौकरी नहीं मिलने वाली.
यहां यह नहीं कहा जा सकता है कि जो लोग आज बहाल हो रहे हैं,वे योग्य नहीं है. हां,यह जरुर कहा जा सकता है कि बहाल हो रहे सारे उम्मीदवार योग्य नहीं हैं. उसमें योग्य और अयोग्य का अनुपात क्या है,यह विवाद का विषय हो सकता है.
अपवादों को छोड़ दें तो अभी सिर्फ बिहार ही कौन कहे,पूरे देश में शिक्षा,परीक्षा और भर्ती की हालत चिंताजनक है. शिक्षा-परीक्षा का हाल भी बुरा है.
दोनों का एक दूसरे से संबंध भी है.जो शालाओं से ठीक ढंग से पढ़कर नहीं निकलेगा, वह पैसे,धांधली या पैरवी से ही तो नौकरियां पाएगा.
बिहार लोक सेवा आयोग के एक सदस्य के ताजा मामले ने लोगों को एक बार फिर चिंता में डाल दिया है. हालांकि इससे भी अधिक गंभीर मामले पहले सामने आते रहे हैं. कुछ दशक पहले तो बीपीएससी के लगातार तीन अध्यक्ष बारी -बारी से गिरफ्तार किये गये थे.उन पर भी बहाली में धांधली के आरोप लगे थे.
बिहार कर्मचारी चयन आयोग के आइएएस अध्यक्ष 2017 में गिरफ्तार किये गये. ऐसे अन्य संगठनों का हाल भी बेहतर नहीं रहा है. दरअसल भर्ती संगठनों की जितनी अच्छी -बुरी बातें बाहर आ पाती हैं,उससे कई गुनी अधिक बातें भीतर ही रह जाती हैं. आखिर ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि इन आयोगों के सदस्य व अध्यक्ष पद पर ऐसे व्यक्तियों को ही नियुक्त किया जाए जो बेदाग रहे हैं ?
बहाली करने वाले संगठनों के प्रमुख पदों पर तैनात करने के लिए वैसे योग्य व्यक्ति मिल जाएंगे. हालांकि कम मिलेंगे. विभिन्न सामाजिक समूहों में भी मिल सकते हैं. ऐसे कई लोगों के बारे में आम चर्चा सुनी जाती है जिन्होंने ऊंचे -ऊंचे पदों पर बैठने के बावजूद कभी कोई रिश्वत नहीं ली
बिजली चोरी पर अंकुश से उपभोक्ता लाभान्वित
17 जून 2016 को तत्कालीन केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने बिजली की चोरी करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि कारखानों के साथ बड़े लोग इसमें शामिल हैं. न कि गरीब. मंत्री ने यह भी कहा कि लाइनमैन और विभाग के अधिकारियों को रिश्वत की पेशकश की जाती है. हो सकता है कि इसमें राजनेता भी शामिल हो.’
याद रहे कि जितनी बिजली इस देश में पैदा होती है,उसमें से 27 प्रतिशत या तो ‘लाइन लॉस’ में चली जाती है या फिर चोरी चली जाती है. बिजली मंत्री ने जब बड़े कारखानेदारों को चेताया तो एक आस जगी थी. पर उसके बाद उनकी चेतावनी का कितना असर हुआ,यह लोगबाग अभी जान नहीं सके हैं. वैसे बिजली के खम्भों पर मोटे केबल लगाने का सकारात्मक असर हुआ है. प्रीपेड मीटर लगाने के बाद और भी फर्क आयेगा. बिजली चोरी कम होने का सीधा व सकारात्मक असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. बिजली शुल्क कम होने या नहीं बढ़ने की संभावना बढ़ेगी.
कश्मीर पर दो महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि युद्ध के जरिए नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर के तीव्र विकास के जरिय पाक अधिकृत कश्मीर को जीता जाएगा.
उधर पाक प्रधान मंत्री इमरान खान ने पाकिस्तानियों को चेतावनी दी है कि वे जिहाद के लिए कश्मीर न जाएं
अन्यथा, भारत को कश्मीर पर कार्रवाई करने का बहाना मिल जायेगा. उससे कश्मीरियों का नुकसान होगा. इमरान खान को चाहिए कि वे इस बात को थोड़ा और आगे बढ़ाएं.
उन्हें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यह पुरानी सलाह मान लेनी चाहिए कि हमें दोनों देशों की गरीबी के खिलाफ मिलजुल कर लड़ना चाहिए.
और अंत में
1992 में इमरान खान ने कहा था कि ‘‘निरक्षरता के मामले में हम यानी पाकिस्तान नीचे से चैथे नंबर पर हैं तो हम खुद को मुस्लिम कैसे कह सकते हैं ?’’
इमरान जी,अब तो आपके पास मौका है. इधर-उधर झांकने के बदले अब प्रधानमंत्री के रूप में आप अपनी इस पुरानी सोच को कार्यरुप क्यों नहीं देते ?
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