सेक्स रैकेट कांड : राजद विधायक के खिलाफ वारंट जारी, देर रात पैतृक घर पर छापेमारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Sep 2019 8:13 AM

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आरा/पटना : चर्चित सेक्स रैकेट मामले में संदेश के राजद विधायक अरुण यादव किसी भी क्षण गिरफ्तार हो सकते हैं. भाेजपुर की पॉक्सो अदालत ने शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया. वहीं, पुलिस ने उनकी तलाश में छापेमारी तेज कर दी है. पुलिस मुख्यालय ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ को […]

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आरा/पटना : चर्चित सेक्स रैकेट मामले में संदेश के राजद विधायक अरुण यादव किसी भी क्षण गिरफ्तार हो सकते हैं. भाेजपुर की पॉक्सो अदालत ने शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया. वहीं, पुलिस ने उनकी तलाश में छापेमारी तेज कर दी है.
पुलिस मुख्यालय ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ को तैयार रहने को कहा है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक से दो दिनों तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होती है या वह सरेंडर नहीं करते हैं तो एसटीएफ को उनके पीछे लगाया जायेगा. शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय ने भोजपुर पुलिस से केस की प्रगति जानी.
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर एसटीएफ ने विधायक की पुरानी कुंडली खंगालनी शुरू भी कर दी है. सीआइडी भी जुटी हुई है. इसके पहले आरा में पाॅक्सो के विशेष न्यायाधीश सह प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके सिंह ने कांड के अनुसंधानकर्ता के आवेदन पर विधायक अरुण यादव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया. इसके बाद आइओ ने कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लिया.
दोबारा बयान दर्ज किया गया था : छह सितंबर को पीड़िता का कोर्ट में 164 का दोबारा बयान दर्ज हुआ था. सूत्रों के अनुसार इसमें पीड़ित नाबालिग ने विधायक अरुण यादव का नाम लिया था और गंदी बात करने की बात कही थी.
इसके बाद 11 सितंबर को जिला पुलिस ने कोर्ट में विधायक अरुण यादव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए आवेदन दिया था. लेकिन, आवेदन के साथ कोर्ट में केस डायरी जमा नहीं की गयी थी. कोर्ट ने अनुसंधानकर्ता को केस डायरी जमा करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने सेक्स रैकेट कांड की केस डायरी जमा करने के बाद उक्त आदेश दिया. केस डायरी जमा करने के बाद कोर्ट ने विधायक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया.
मालूम हो कि विधायक अरुण यादव के खिलाफ पीड़ित बच्ची ने सोशल मीडिया पर चिल्ला- चिल्ला कर कार्रवाई करने की मांग की थी. इसके बाद महिला आयोग की टीम भी पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए बच्ची का बयान कोर्ट में दर्ज कराया. इसके बाद एक्शन में आयी पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी.
क्या है पूरा मामला
18 जुलाई, 2019 को पटना में संचालित सेक्स रैकेट के चंगुल से भागकर भोजपुर पुलिस के पास पहुंची नाबालिग लड़की ने एक इंजीनियर और विधायक के आवास पर भेजे जाने का खुलासा किया था.
इस मामले में पकड़ी गयी संचालिका अनीता देवी ने इसे स्वीकार भी किया था.। पीड़िता का आरा कोर्ट में पहली बार बयान 20 जुलाई को दर्ज हुआ था. छह सितंबर को पीड़ित लड़की का आरा कोर्ट में दोबारा बयान दर्ज कराया गया था. इसमें पीड़िता ने कहा कि पटना स्थित विधायक अरुण यादव के सरकारी आवास पर उसके साथ गंदा काम किया गया.
अरुण यादव के बेंगलुरु में होने की आशंका
झारखंड-यूपी में अलग-अलग नंबरों से की बात
मुख्यालय से एक आला अधिकारी केस को मॉनीटर कर रहे हैं. सीआइडी की एक टीम जिला पुलिस के साथ काम कर रही है. सर्विलांस से मिली जानकारी के अनुसार विधायक अरुण यादव ने झारखंड-यूपी में अलग- अलग नंबरों से बात की है.
राजबल्लभ मामले में नालंदा के तत्कालीन एसपी विवेकानंद के वेतन में कटौती
पटना : गृह विभाग ने नाबालिग से नवादा के पूर्व राजद विधायक राजबल्लभ प्रसाद के दुष्कर्म करने के मामले को गंभीरता से नहीं लेने और प्रेस को गैर जिम्मेदाराना बयान देने के लिए विवेकानंद को दंडित किया है.
2008 बैच के आइपीएस अधिकारी विवेकानंद अभी पुलिस मुख्यालय में आइजी के सहायक (क्यू) के पद पर तैनात हैं. विवेकानंद के मामले में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श के बाद गृह विभाग ने उनके वेतन के समयमान में एक वर्ष के लिए एक स्तर की कटौती की है. हालांकि, यह वेतन कटौती उनके वेतन और भावी वेतनवृद्धियों को प्रभावित नहीं करेगी.
पूर्वी चंपारण के तत्कालीन एसपी सुनील कुमार का भी रुका वेतन पूर्वी चंपारण के तत्कालीन एसपी सुनील कुमार पर अनियमित तरीके से थानाध्यक्षों की पोस्टिंग का आरोप है. जाति विशेष के पदाधिकारियों को थानेदार बनाया. छह माह में केवल एक बार पुलिस सभा की. पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मुलाकात नहीं की.
साथ ही दारोगा को कार्यपालक दंडाधिकारी की सुविधा नहीं देने का आरोप लगा था. विभागीय कार्यवाही में दोषी पाये जाने के बाद उनकी एक वर्ष के लिए वेतनवृद्धि रोक दी गयी है. वहीं, थानेदारों की मनमाने तरीके से पोस्टिंग करने के लिए 2005 बैच के आइपीएस सुनील कुमार को दंडित किया है. सुनील कुमार अभी आइजी के सहायक (निरीक्षण) हैं.
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