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पटना : पानी बचाने व हरियाली लाने पर खर्च होंगे 24 हजार करोड़

Updated at : 14 Sep 2019 7:45 AM (IST)
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पटना : पानी बचाने व हरियाली लाने पर खर्च होंगे 24 हजार करोड़

जल-जीवन-हरियाली मिशन तीन साल में पूरा करेगा काम पटना : राज्य सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजना जल-जीवन-हरियाली का पूरा खाका तैयार कर लिया है. मिशन मोड में चलायी जाने वाली इस योजना में 12 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. तीन सालों में निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने का टारगेट रखा गया है. तीन सालों […]

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जल-जीवन-हरियाली मिशन तीन साल में पूरा करेगा काम
पटना : राज्य सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजना जल-जीवन-हरियाली का पूरा खाका तैयार कर लिया है. मिशन मोड में
चलायी जाने वाली इस योजना में 12 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. तीन सालों में निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने का टारगेट रखा गया है.
तीन सालों में इस मिशन के सभी कार्यों को पूरा करने के लिए 24 हजार 524 करोड़ रुपये के खर्च की योजना है. 2019-20 में पांच हजार 870 करोड़, 2020-21 में नौ हजार 874 और 2021-22 में आठ हजार 780 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. हालांकि, कैबिनेट के स्तर पर अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम रूप से मुहर लगनी बाकी है. इस बात की भी संभावना जतायी जा रही है कि बजट और राजस्व संग्रह की स्थिति को देखते हुए इस खर्च में छह से सात हजार करोड़ की कटौती हो सकती है.
इतनी संख्या में काम करायेंगे ये विभाग
तालाब, आहर, पइन, पोखर का जीर्णोद्धार
(तीन साल में 62 हजार 412 का होगा निर्माण या जीर्णोद्धार)
– ग्रामीण विकास विभाग (आरडीडी) 30 हजार, लघु जल संसाधन विभाग 31 हजार 462 तथा शहरी विकास एवं आवास विभाग को 950 का जीर्णोद्धार कराना है.
सार्वजनिक कुओं को िकया जायेगा जीिवत
(81 हजार 201 )
– शहरी
विकास विभाग छह हजार 201 और पीएचइडी
75 हजार को फिर से करेंगे
जीवित.
कुआं, चापाकल, नलकूप के किनारे सोख्ता या जल रिचार्ज का निर्माण
(तीन लाख 14 हजार 960)
– ग्रामीण विकास विभाग को दो लाख 50 हजार, लघु जल संसाधन विभाग को 10 हजार और शहरी विकास विभाग 54 हजार 960 की संख्या में करायेंगे निर्माण.
छोटी नदियों, नालों व पहाड़ी क्षेत्रों में जल संग्रह के लिए चेकडैम एवं अन्य संरचनाओं का निर्माण
(65 हजार 697 का निर्माण)
– ग्रामीण विकास विभाग 15 हजार, लघु जल संसाधन 697 और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग 50 हजार का निर्माण करायेंगे.
वैकल्पिक फसल, ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती
– कृषि विभाग 30 हजार एकड़ खेतों में जल संरक्षण से फसल, बागवानी, वानिकी विकास – 60 हजार एकड़ में जैविक खेती शुरू कराने की योजना. तीन साल के दौरान 20-20 हजार एकड़ में करायी जायेगी खेती – 43 हजार 245 हेक्टेयर खेतों में ड्रिप सिंचाई से पटवन की व्यवस्था.
सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन
– सरकारी भवनों पर तीन सालों के दौरान 20-20 मेगावाट बिजली यानी 60 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य.
– इसी तरह निजी भवनों से तीन साल के दौरान 20-20 मेगावाट बिजली यानी 60 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य.
नये जलस्रोत का सृजन
(32 हजार 139 का निर्माण)
– ग्रामीण विकास विभाग 30 हजार, जल संसाधन विभाग एक प्रोजेक्ट और पशुपालन विभाग दो हजार 139 का निर्माण करायेगा.
रेनवाटर हर्वेस्टिंग
(एक लाख चार हजार 922 का निर्माण)
– ग्रामीण विकास विभाग को 25 हजार, भवन निर्माण विभाग सात हजार 922, शिक्षा विभाग 70 हजार और स्वास्थ्य विभाग दो हजार.
पौधारोपण
(सात करोड़ 70 लाख पौधे)
– ग्रामीण विकास विभाग एक करोड़ 70 लाख और पर्यावरण विभाग छह करोड़ पौधे लगायेगा.
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