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बालू लदी नाव गंगा में डूबी, 22 लोग बचे

Updated at : 23 Aug 2019 8:45 AM (IST)
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बालू लदी नाव गंगा में डूबी, 22 लोग बचे

जिला प्रशासन की टीम व स्थानीय लोगों की मदद से बची जान पटना : दीघा थाना क्षेत्र में बालू लदी नाव गंगा में डूब गयी. इस नाव पर कुल 22 लोग सवार थे. सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. इस हादसे की सूचना के बाद वहां हड़कंप मच गया. भारी संख्या में लोग मौक […]

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जिला प्रशासन की टीम व स्थानीय लोगों की मदद से बची जान
पटना : दीघा थाना क्षेत्र में बालू लदी नाव गंगा में डूब गयी. इस नाव पर कुल 22 लोग सवार थे. सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. इस हादसे की सूचना के बाद वहां हड़कंप मच गया. भारी संख्या में लोग मौक पर पहुंच गये.
मौके पर पहुंची पुलिस, जिला प्रशासन की टीम व स्थानीय लोगों की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. दीघा थाना प्रभारी ने बताया कि गंगा पुल के पिलर नंबर पांच के पास नाव टकरा कर डूब गयी. हादसे के बाद सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है.
बालू लेकर डोरीगंज से गाय घाट जा रही थी नाव : प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो ओवरलोड होने की वजह से गंगा में कई बार नाव डूबने के मामले सामने आ चुके हैं. बावजूद जिम्मेदार प्रशासन की ओर से इसकी रोक थाम को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. वहीं, दीघा प्रभारी ने बताया कि नाव पर सवाल लोगों से जब बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि नाव डोरी गंज से गाय घाट बालू लेकर जा रही थी.
ओवरलोड के बाद डूब गयी नाव
जहां यह हादसा हुआ वह सोनपुर व दीघा पुल को जोड़ती है. मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी राजेश कुमार ने कहा कि घटना सुबह छह बजे हुई जब वह गाय को चारा खिला रहे थे. राजेश ने कहा कि ओवर लोड होने के कारण यह नाव डूबी है. जैसे ही नाव डूबी लोग तैरने लगे और पाया के पास पहुंच कर अपनी जान बचा ली. नाविक ने पांच लोगों की खुद जान बचायी है. वहीं, पांच लोग पिलर नंबर पांच के बीच फंस गये थे जबकि बाकी के लोग तैरने लगे. गंगा में दूसरी नाव बुला कर सभी को किनारे पर लाया गया. वहीं पाये के किनारे फंसे लोगों को पुलिस ने रस्सा फेंक कर बचा लिया.
बालू लदी नावें बढ़ा रहीं जिंदगियों पर खतरा, निगरानी नहीं
पटना : प्रतिबंध के बावजूद गंगा नदी में ओवरलोड नावों के परिचालन पर रोक नहीं लग पा रही. जलस्तर बढ़ने की वजह से फिलहाल खतरा बढ़ गया है.
कई घाटों पर गंगा का पानी चढ़ जाने का फायदा उठाकर दीघा और पाटीपुर के अलावा समाहरणालय, महेंद्रू, काली घाट, कृष्णा घाट से दियारा में जाने के लिए अवैध रूप से नावें चलायी जा रही हैं. प्रशासन के स्तर पर इसकी कोई निगरानी भी नहीं हो पा रही. पानी बढ़ने के बाद नदी पुलिस ने गंगा में निगरानी लगभग बंद कर दी है. इसका फायदा अवैध खनन करने वालों को मिल रहा है.
बरसात के वक्त बालू की मांग के हिसाब से पूर्ति नहीं होने पर इसकी डिमांड बढ़ जाती है. इसका फायदा उठा कर माफिया तत्व दियारा क्षेत्र से शहर के गंगा घाटों पर नाव में भर कर बालू लाकर उसे बेचते हैं. गुरुवार की सुबह भी बालू लदे नाव की वजह से 22 जिंदगियां खतरे में पड़ गयी थीं. पानी की रफ्तार बढ़ने से नाव चालकों को बालू लगने में समय भी कम लगता है. लोग जान की बाजी लगा बाल्टी के सहारे नदी से बालू निकाल कर नाव में लोड करते हैं. बाढ़ के समय यह और खतरनाक हो जाता है. एक नाव में लगभग तीन ट्रक यानी 18 ट्रॉली बालू लोड किया जाता है. इस समय एक ट्रैक्टर बालू की कीमत छह हजार तक है.
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