नयी बालू व खनन नीति को मिल सकती है मंजूरी
Updated at : 11 Aug 2019 3:59 AM (IST)
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पटना : राज्य में नयी बालू नीति और विभिन्न खनिजों के खनन के लिए नियमावली को अगली कैबिनेट में हरी झंडी मिलने की संभावना है. बालू नीति और खनन नियमावली को खान व भूतत्व विभाग अंतिम रूप देने में जुटा है. इसके लिए छुट्टी के दिन शनिवार को भी कार्यालय खुले और विभाग में काम […]
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पटना : राज्य में नयी बालू नीति और विभिन्न खनिजों के खनन के लिए नियमावली को अगली कैबिनेट में हरी झंडी मिलने की संभावना है. बालू नीति और खनन नियमावली को खान व भूतत्व विभाग अंतिम रूप देने में जुटा है. इसके लिए छुट्टी के दिन शनिवार को भी कार्यालय खुले और विभाग में काम होता रहा.
साथ ही रविवार को भी कामकाज होगा. कैबिनेट से नयी बालू नीति और खनन नियमावली को मंजूरी मिलने पर बालू, गिट्टी के अवैध खनन पर रोक लगेगी और यह आम लोगों को उचित दर पर मिल सकेगी.
साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी और नदी घाटों की बंदोबस्ती में एकाधिकार खत्म किया जा सकेगा. खान व भूतत्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस समय पुरानी बालू नीति-2013 प्रभावी है. इसमें संशोधन की जरूरत महसूस की जा रही थी.
खासकर बालू और गिट्टी के खनन और उस पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की आवश्यकता थी. वहीं नदी घाटों पर खनन के साथ नदियों को भी संरक्षित रखने और बालू निकालने के साथ हर साल इसके फिर से भराव की व्यवस्था की जानी थी.
ड्रोन और सेटेलाइट से होगी निगरानी
बालू और पत्थर के खनन कार्यों की निगरानी और उस पर नियंत्रण के लिए ड्रोन और सेटेलाइट का प्रयोग किया जा सकता है. नयी बालू नीति-2019 के उद्देश्य में अवैध खनन पर रोक लगाना, नदियों की गुणवत्ता बनाये रखना, पर्यावरणीय और पारिस्थितिकी संतुलन बनाये रखना, स्वामित्व सहित अन्य करों की वसूली सुविधाजनक करना जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं.
साथ ही बालू और पत्थर के खनन में एनजीटी के नियमों का पालन जरूरी है. मुख्य रूप से नदियों में बालू खनन की अधिकतम गहराई तीन मीटर तक सीमित रखने का निर्देश है. उसका पालन इस नीति में भी होगा. साथ ही पुल-पुलिया, सार्वजनिक स्थल और सिंचाई संबंधी स्ट्रक्चर के पास के क्षेत्र को बालू खनन के लिए प्रतिबंधित किया गया है.
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