पटना : अब आम लोग विभाग के काम की करेंगे निगरानी
Updated at : 07 Aug 2019 5:39 AM (IST)
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शुद्ध पानी पहुंचाने को पीएचइडी की पहल पटना : बिहार के हर परिवार तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए पीएचइडी के माध्यम से कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. लेकिन, गांव के लोग काम से संतुष्ट नहीं हो रहे हैं, ऐसी शिकायतें विभाग तक पहुंच रही हैं. इस कारण अब विभाग के अधिकारी काम के […]
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शुद्ध पानी पहुंचाने को पीएचइडी की पहल
पटना : बिहार के हर परिवार तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए पीएचइडी के माध्यम से कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. लेकिन, गांव के लोग काम से संतुष्ट नहीं हो रहे हैं, ऐसी शिकायतें विभाग तक पहुंच रही हैं.
इस कारण अब विभाग के अधिकारी काम के साथ लोगों का दिल भी जीतेंगे. इसके लिए हर पंचायत में कम से कम दो लोगों को काम की निगरानी का जिम्मा सौंपने का निर्णय लिया गया है. अधिकारी काम शुरू करने के पहले गांव के दो लोगों को काम की क्वालिटी के बारे में जानकारी देंगे और इसके अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी पंचायतों में आमलोग भी करेंगे, ताकि काम की क्वालिटी के साथ लोगों के घरों तक शुद्ध पानी पहुंचे.
ठेकेदार काम खराब करे, तो तुरंत शिकायत करें : पीएचइडी की योजना के तहत चापाकल या हर घर नल का जल कार्यक्रम में कहीं भी कोई ठेकेदार काम में गड़बड़ी करे, तो इसकी शिकायत ग्रामीण अधिकारी से करेंगे.
इसके बाद भी काम में सुधार नहीं हुआ, तो विभाग को भी काम में गड़बड़ी की शिकायत के बारे में जानकारी दे सकेंगे. राज्य में कुल 8386 ग्राम पंचायतें और एक लाख 14 हजार 691 वार्ड हैं. इसमें से पीएचइडी 56,079 वार्डों में हर घर नल का जल पहुंचायेगा. वहीं, पीएचइडी के लिए निर्धारित 56,079 वार्डों में से 30,497 वार्ड गुणवत्ता प्रभावित है, जिनमें से 5085 वार्डों में आर्सेनिक, 3814 वार्डों में फ्लोराइड और 21,598 वार्डों में अधिक आयरन हैं.इसलिए काम की गुणवत्ता पर विभाग सतर्क है.
शिकायत िमलने के बाद कवायद
थर्ड पार्टी से भी करायी जाती है जांच
विभाग नल जल योजना के लिए थर्ड पार्टी जांच होती है. इसके माध्यम से काम की क्वालिटी की जांच होती
है. अगर काम में गड़बड़ी मिलती है, तो इसकी रिपोर्ट के बाद ही आगे कांट्रेक्टर पर कार्रवाई की जाती है.
58 स्वतंत्र इंजीनियरों को भी मिला काम
हर घर नल का जल योजना की माॅनीटरिंग अब प्राइवेट इंजीनियर करेंगे. पीएचइडी ने इसके लिए योजना तैयार की है. इसके लिए इंजीनियरों को ट्रेनिंग दी जा रही है. पांच दिन बाद उन्हें जिलों में भेजा जायेगा. इनके लिए 58 नियुक्ति स्वतंत्र इंजीनियर के रूप में की गयी है. कुल 125 स्वतंत्र इंजीनियरों को जांच के काम में लगाया जायेगा. यह सभी योजना की निगरानी करेंगे.
जियो टैगिंग के बाद ही भुगतान
पीएचइडी हर घर नल का जल, नीर निर्मल परियोजना और जापानी इन्सेफेलाइटिस वाले 14 जिलों में हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है. विभाग के निर्देश पर दिसंबर अंत तक 61 हजार वार्डों से अधिक में पूरा हो रहे काम को जियो टैगिंग कर उसकी समीक्षा शुरू हो जायेगी. इसके बाद राशि का भुगतान होगा. विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जियो टैगिंग के साथ वार्ड में काम पूरा हो गया है. वहां के लोगों से रसीद पर हस्ताक्षर करा लें कि वहां क्या काम किया गया है.
मंत्री ने कहा
लोगों की धारणा बन गयी है कि विभाग काम कर रहा है, तो उसमें कुछ गलत हो रहा है. इस मिथ्या को तोड़ने के लिए पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को जोड़ा जायेगा, जो काम की निगरानी करेंगे और विभाग के अधिकारी लोगों का विश्वास जीत कर काम को बेहतर करेंगे.
– विनोद नारायण झा, पीएचइडी मंत्री
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