ePaper

70 % शहर पी रहा डेयरी का दूध, बढ़ा लोगों का विश्वास

Updated at : 21 Jul 2019 6:50 AM (IST)
विज्ञापन
70 % शहर पी रहा डेयरी का दूध, बढ़ा लोगों का विश्वास

पटना : जिले के 70 फीसदी से अधिक घरों में लोग डेयरी का दूध और इनसे तैयार अन्य उत्पादों का सेवन कर रहे हैं. केवल 30 फीसदी लोग खटाल के दूध पर निर्भर हैं. एक अनुमान के अनुसार पटना जिले में छह लाख लीटर से अधिक दूध की मांग है. शहरी इलाके से सिमटते खटाल […]

विज्ञापन
पटना : जिले के 70 फीसदी से अधिक घरों में लोग डेयरी का दूध और इनसे तैयार अन्य उत्पादों का सेवन कर रहे हैं. केवल 30 फीसदी लोग खटाल के दूध पर निर्भर हैं.
एक अनुमान के अनुसार पटना जिले में छह लाख लीटर से अधिक दूध की मांग है. शहरी इलाके से सिमटते खटाल और इसके दूध पर कम विश्वास होने के कारण डेयरी दूध की मांग लगातार बढ़ रही है. बढ़ती मांग को देखते हुए डेयरी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. फिलवक्त राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों में चार बड़ी डेयरी कंपनियां दूध और दुग्ध उत्पाद पनीर, घी, पेड़ा, काला जामुन, रसगुल्ला, लस्सी, छाछ आदि ग्राहकों को उपलब्ध करा रही हैं. पढ़ें डेयरी उद्योग की पड़ताल करती सुबोध कुमार नंदन की रिपोर्ट.
1. सुधा डेयरी
एनडीडीबी द्वारा 1 अक्तूबर, 1981 में पटना डेयरी प्रोजेक्ट की स्थापना फुलवारीशरीफ में की गयी. इसके अध्यक्ष स्व डॉ वर्गीज कुरियन थे.
इसके बाद मार्च 1982 में महात्मा गांधी सेतु निर्माण के बाद पटना डेयरी द्वारा वैशाली मिल में भी कार्य प्रारंभ किया गया. वर्ष 1987 में वैशाली एवं पटना जिले की संघों को मिला कर वैशाली पाटलिपुत्र दुग्ध संघ का गठन किया गया. इसके बाद 1 जुलाई, 1988 को पटना डेयरी का प्रबंधन संघ को सौंप दिया गया.
वर्ष 2007 के नवंबर माह में युवा डेयरी इंजीनियर संघ के प्रबंध निदेशक के पद पर सुधीर कुमार सिंह ने पद संभाला. उस समय दुग्ध संग्रहण की स्थिति काफी दयनीय थी. उस वक्त दूध की सप्लाइ 70 हजार लीटर प्रतिदिन था. लेकिन शहरों में दूध की मार्केटिंग को बनाये रखने के लिए प्रबंध निदेशक ने स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया गया. पटना डेयरी प्रोजेक्ट की शुरुआत मात्र 500 लीटर दूध के उत्पादन से हुई.
वर्तमान में पटना डेयरी प्रोजेक्ट में 3.5 लाख लीटर दूध का संग्रह प्रतिदिन हो रहा है. प्लांट की क्षमता विस्तार से दुग्ध उत्पादकों को काफी फायदा हुआ है. खासकर आइसक्रीम के पूर्व उत्पादित वेराइटी में लगभग 25 वेराइटी का समावेश किया गया. इसके बाद आइसक्रीम विपणन में भी दिनों-दिन वृद्धि हो रही है. देश के पूर्वी क्षेत्र में पटना डेयरी प्रोजेक्ट अब क्वालिटी मार्क सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाला प्रथम और एक मात्र डेयरी है.
पटना डेयरी के उत्पाद : घी, मक्खन, पेड़ा, पनीर, मैंगो लस्सी, प्लेन लस्सी, मट्ठा, प्लेन दही, गुलाबजामुन, रसगुल्ला व आइसक्रीम आदि.
दूध : सुधा गोल्ड, शक्ति, टोंड, डबल टोंड, काउ मिल्क व टी स्पेशल दूध आधा लीटर और एक लीटर पैक में बाजार में उपलब्ध हैं.
2. अनुज डेयरी 5000 लीटर से शुरुआत तय किया 24 वर्षों का सफर
अनुज डेयरी प्राइवेट लिमिटेड पूर्वी भारत की अग्रणी डेयरी कंपनी है. इसके डेयरी उत्पादों में राज दूध और स्नोबॉल आइसक्रीम ब्रांड (अनुज न्यूट्रीटेक कंपनी प्रा लि) के नाम से लोकप्रिय हैं. राज मिल्क की शुरुआत 1995 में महज पांच हजार लीटर दूध से की गयी थी. लगभग 24 साल के सफर में आज इसके दूध की सप्लाइ लगभग 1.20 लाख लीटर है.
कंपनी ने अपने उत्पादों के निर्माण के लिए पटना, हाजीपुर और मनेर में अत्याधुनिक प्लांट की स्थापना की है. साथ ही अच्छी गुणवत्ता के दूध की प्राप्ति के लिए समस्तीपुर में एक अत्यंत आधुनिक मिल्क चिलिंग सेंटर को स्थापित किया है. फिलवक्त डेयरी के पास लगभग दो लाख लीटर दूध की संग्रहण क्षमता है.
कंपनी बिहार के अधिकांश जिलों में अपने उत्पादों की सप्लाइ करती है. दूध के अलावा दही, पनीर, घी और अन्य उत्पादों की सप्लाइ होती है. इसके उत्पाद पटना, मसौढ़ी, जहानाबाद, गया, बिहार शरीफ, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, नवादा, हाजीपुर, मोतिहारी, बेतिया, समस्तीपुर, छपरा, सीवान, गोपालगंज आदि शहरों में उपलब्ध हैं.
3. आइटीसी कई जिलों में उपलब्ध मुंगेर से शुरू हुई थी यात्रा
अब बिहार में आइटीसी की डेयरी यात्रा की शुरुआत मुंगेर में कंपनी होमोजेनाइज्ड टोंड दूध के लांच के साथ हुई, जहां ब्रांड का अपना दूध प्रसंस्करण प्लांट भी है. तब से उत्पाद को धीरे-धीरे राज्य की राजधानी पटना सहित बिहार के अन्य शहरों में विस्तारित किया गया है. कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो का और विस्तार किया और 2019 में गाय का दूध, दही और पनीर लॉन्च किया. वर्तमान में इसके उत्पाद पटना, मुंगेर, भागलपुर, लखीसराय, जमुई, बिहारशरीफ और हाजीपुर में उपलब्ध हैं. बिहार में आशीर्वाद का होमोजेनाइज्ड टोंड दूध और गाय का दूध शामिल है. दूध के अलावा दही और पनीर भी उपलब्ध है.
डाॅ वर्गीज कुरियन का बिहार से था गहरा लगाव
श्वेत क्रांति के जनक डाॅ वर्गीज कुरियन का बिहार से काफी गहरा लगाव था. सरकार के बुलावे पर डाॅ वी कुरियन बिहार आये और 1981 में पटना डेयरी प्रोजेक्ट की स्थापना की. वे पटना डेयरी प्रोजेक्ट के 1981 से 88 तक अध्यक्ष रहे.
ग्रामीण क्षेत्रों में दूध पहुंचाना आज भी एक चुनौती है. इस वक्त लगभग दो लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. जहां तक मार्केट शेयर की बात है, तो 25 फीसदी से अधिक है. आने वाले वर्षों में इसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य है. आने वाले दिनों में मिठाइयां और दुग्ध उत्पाद बाजार में लाने की योजना है.
पंकज सिंह, निदेशक, अनुज डेयरी प्रा लि
कंपनी बिहार के 366 गांवों में 12,000 से अधिक किसानों से दूध खरीद रही है. मुंगेर के प्लांट में प्रतिदिन दो लाख लीटर दूध प्रोसेस करने की क्षमता है.
संजय सिंघल, मुख्य परिचालन अधिकारी (डेयरी और बेवरेज), आइटीसी लिमिटेड
डेयरी उद्योग में कई स्टार्टअप भी
स्टार्टअप के रूप में भी कई उद्योग डेयरी उद्योग में हाथ आजमा रहे हैं. बीआइए के स्टार्टअप संतोष कुमार ने आनंद सागर नेचुरल डेयरी की शुरुआत जून 2018 में भारतीय नस्ल की सात साहीवाल एवं राठी गाय से की. इनका मुख्य उद्देश्य पटना शहर के लोगों को शुद्ध ताजा देशी गाय के दूध की डिलिवरी करना है. संतोष ने बताया कि सरकार और बैंक की तरफ से ऐसी कोई योजना बिहार में नहीं है, जिसकी मदद से कोई उद्यमी दस पशु से ज्यादा की डेयरी लगा सके.
इसका परिणाम है कि दूध उत्पादन में अपार संभावना रहने के बावजूद पूरे बिहार में ऐसे डेयरी फार्म, जिनमें 50 पशु हों गिनती के मिलेंगे. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में इससे अलग स्थिति है. सरकार, नाबार्ड और बैंक से आग्रह है कि जल्द ही 20 पशु से लेकर 100 पशु तक के डेयरी फार्म लगाने के लिए नयी योजना की शुरुआत की जाये.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन