आपातकाल : नाजुक थी देश की स्थिति, मुझे धनरूआ में मिली इमरजेंसी की जानकारी : पटना के तत्कालीन डीएम बीएस दूबे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Jun 2019 6:17 AM

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राज्य के मुख्य सचिव रहे बीएस दूबे आपातकाल के समय पटना के डीएम थे. 25 जून, 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल लगा था. उस समय राज्य में छात्र आंदोलन भी चरम पर था. पटना अविभाजित बिहार की राजधानी थी और गुजरात के साथ-साथ बिहार में भी छात्र आंदोलन जोरों पर था. जेपी […]

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राज्य के मुख्य सचिव रहे बीएस दूबे आपातकाल के समय पटना के डीएम थे. 25 जून, 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल लगा था. उस समय राज्य में छात्र आंदोलन भी चरम पर था. पटना अविभाजित बिहार की राजधानी थी और गुजरात के साथ-साथ बिहार में भी छात्र आंदोलन जोरों पर था. जेपी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. आपातकाल के संस्मरण पर बीएस दूबे की जुबानी.
आपातकाल का समर्थक नहीं, पर देश में अनुशासन आ गया था : मैं पटना जिले के धनरूआ प्रखंड के मधुबन गांव में था, जब मुझे 25 जून को वायरलेस पर हमारे पीए ने जानकारी दी कि देश में आपातकाल लागू हो गया है.
मैं तुरंत पटना के लिए निकल पड़ा. मधुबन गांव में दबंगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा था. मैं उसी जमीन को छुड़ाने व गरीबों में बांटने के लिए वहां कैंप किये हुआ था. पहले से ही छात्र आंदोलन का प्रेशर था. इमरजेंसी लग जाने को बाद अलग से काम का बोझ बढ़ गया. आपातकाल के समय देश में स्थिति बड़ी नाजुक थी. महंगाई चरम पर थी, खाद्यान्न की कमी थी.
देश में असंतोष की स्थिति थी. बिहार छात्र आंदोलन से सुलग रहा था. मैं आपातकाल का समर्थक नहीं हूं, लेकिन इमरजेंसी के समय देश में अनुशासन आ गया था. समय पर ट्रेनें चलने लगी थी. अधिकारी, कर्मचारी, डाॅक्टर समय पर पहुंचने लगे थे. उसी समय 20 सूत्री कार्यक्रम चला. उस समय प्रशासन ने कई योजनाओं को लागू किया.
मुझे कर्पूरी ठाकुर को गिरफ्तार करने को कहा गया, पर मैंने नहीं किया : इमरजेंसी में कई जगह मीसा का दुरुपयोग हुआ. पटना के डीएम रहते मैंने कभी मीसा कानून का दुरुपयोग नहीं किया. मुझे कर्पूरी ठाकुर को मीसा में गिरफ्तार करने को कहा गया. लेकिन, मैंने इन्कार कर दिया और कहा कि उन पर मीसा लागू करने का कोई आधार नहीं बनता था.
बाद में समस्तीपुर के डीएम ने उन्हें मीसा में गिरफ्तार किया. कई जिलों में थाने को मीसा के तहत गिरफ्तारी का अनेक नेताओं को वारंट दे दिया गया. पटना में जो भी गिरफ्तारी हुई उसमें किसी के साथ जेल में कोई अमानवीय व्यवहार नहीं हुआ. समाचार पत्रों पर भी कोई प्रेशर नहीं था. बस, जो गाइड लाइन था उसका पालन करना था.
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