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पटना : पुलिस पहले खेल से भटकी, अब टीम के चयन में अटकी

Updated at : 18 Jun 2019 6:50 AM (IST)
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पटना : पुलिस पहले खेल से भटकी, अब टीम के चयन में अटकी

अनुज शर्मा सीएम की सलाह पर किया होता अमल तो सभी खेलों में बन जाती टीम, हर माह करीब 15 लाख खर्च पटना : बिहार पुलिस खेल से भटक गयी है. इससे उसका टीम चयन ही अटक गया है. खेल को लेकर मुख्यमंत्री की सलाह पर अमल नहीं हो रहा है. पुलिस मैन्युअल का भी […]

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अनुज शर्मा
सीएम की सलाह पर किया होता अमल तो सभी खेलों में बन जाती टीम, हर माह करीब 15 लाख खर्च
पटना : बिहार पुलिस खेल से भटक गयी है. इससे उसका टीम चयन ही अटक गया है. खेल को लेकर मुख्यमंत्री की सलाह पर अमल नहीं हो रहा है. पुलिस मैन्युअल का भी पालन नहीं किया गया. करीब दो साल से पुलिस जोन-स्टेट गेम्स नहीं कराने का दुष्परिणाम है कि अखिल भारतीय पुलिस गेम्स के लिए 15 टीमें नहीं बन पा रही हैं. 13-14 जून को हुए ट्रायल में उतने खिलाड़ी भी नहीं पहुंचे जितने टीम में होते हैं.
हाॅकी में 18 खिलाड़ी होते हैं, ट्रायल में मात्र 12 खिलाड़ी आये. कुश्ती में एक भार वर्ग में दो खिलाड़ी भी नहीं मिले. कुश्ती, कबड़्डी, बास्केटबॉल-हैंडबाल की महिला टीम ही नहीं बनी. बास्केटबॉल के ट्रायल में पुरुष वर्ग के मात्र 12 खिलाड़ी ही पहुंचे. बॉक्सिंग की महिला- गर्ल्स की टीम मिलाकर बनायी गयी है. एथलेटिक्स, फुटबाॅल, अर्चरी का ट्रायल ही नहीं हो पाया.
करीब चार साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिस के एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार पुलिस खेल में भी बेहतर प्रदर्शन करे इसके लिए खेलों का नियमित आयोजन किया जाये. बिहार पुलिस मैनुअल में प्रतिवर्ष राज्य और जोनल स्तर पर पुलिस की खेल प्रतियोगिता कराने का प्रावधान है.
समीक्षा हो तो उजागर हो सकता है भ्रष्टाचार
पुलिस खेलों में मेडल जीते इसके लिए सरकार प्रत्येक माह करीब 15 लाख रुपये खर्च कर रही है. 22 कोच हैं. एक कोच का औसत वेतन 50 हजार रुपये के करीब है. खेल कार्यालय, स्टेडियम, खेल उपकरण, हॉस्टल आदि पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुका है. खेल के लिए प्रतिनियुक्त एक पुलिसकर्मी को टीए डायट भत्ता के रूप में प्रतिदिन 375 रुपये दिये जा रहे हैं. खेल आयोजनों के लिए अलग से बजट का प्रावधान है.
बिहार के एक रिटायर्ड डीजी ने कहा कि खेल कार्यालय में नोडल अधिकारी बैठते नहीं हैं. खिलाड़ियों से संवाद नहीं करते. सरकार पैसा दे रही है अफसर उनको उपयोग नहीं कर रहे. इंटरनेशनल मानक वाला मिथिलेश स्टेडियम अफसरों की जॉगिंग प्वाइंट बन गया है. खिलाड़ियों-कोच, खेल पदाधिकारियों तीनों के कार्य की समीक्षा होनी चाहिए.
बननी है महिला-पुरुषों की टीम
वालीबॉल , हैंडबॉल, बास्केटबॉल, योगा कुश्ती, कबड्डी, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जुडो, बुशू, ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, फुटबाल, अर्चरी व हॉकी
ट्रायल लेने वाली चयन समिति पर उठे सवाल
खिलाड़ियों के चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं. चयन समिति में एडीजी मुख्यालय सह नोडल पदाधिकारी अध्यक्ष, समादेष्टा बीएमपी पांच, आइजी के सहायक (क्यू), पुलिस उपाधीक्षक सह खेल प्रभारी, चितरंजन शर्मा प्रशाखा पदाधिकारी पर्यावरण एवं वन विभाग, आशुतोष कुमार सिंह लिपिक डीएम कार्यालय लखीसराय, शारीरिक शिक्षक राजकीय बापू स्मारक महिला उच्च विद्यालय कदमकुंआ पटना हैं. इसमें पुलिस के कोच को शामिल नहीं किया गया है. जिस खेल का ट्रायल होना है उसके विशेषज्ञ को भी चयन समिति में जगह नहीं मिली है.
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