पटना : जो करेगा मुस्लिमों का उत्थान व विकास, उसी को वोट, नहीं तो नोटा
Updated at : 07 Apr 2019 5:42 AM (IST)
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पटना : लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बज चुका है. प्रत्याशी लोकसभा के चुनाव के दंगल में कूद चुके हैं. राजनेता लुभावने वादे के साथ ही वोटरों के बीच में हैं. राजधानी पटना से सटे और पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आनेवाले मनेर विधानसभा क्षेत्र में 19 मई को अंतिम चरण में चुनाव है, लेकिन फिजां […]
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पटना : लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बज चुका है. प्रत्याशी लोकसभा के चुनाव के दंगल में कूद चुके हैं. राजनेता लुभावने वादे के साथ ही वोटरों के बीच में हैं. राजधानी पटना से सटे और पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आनेवाले मनेर विधानसभा क्षेत्र में 19 मई को अंतिम चरण में चुनाव है, लेकिन फिजां में चुनावी चर्चा जोर पकड़ चुकी है.
मनेरशरीफ नगर पंचायत व पंचायती राज क्षेत्र के चौक-चौराहों, चाय दुकानों, कपड़ा दुकानों, लाइन होटलों और गांवों के चौपालों पर लोग उम्मीदवारों के जीतने-हारने का दावा कर रहे हैं. मनेरशरीफ के ग्यासपुर पंचायत स्थित याहियापुर मस्जिद परिसर में मुस्लिम समाज के लोग शनिवार को नमाज अदा करने के बाद चुनावी चर्चा करते मिले. चर्चा हो रही थी कि जो उनके विकास व उत्थान में आगे आयेगा, उसे ही वोट देंगे. नहीं तो हमारा मत सिर्फ नोटा में जायेगा. इन लोगों का कहना था कि वैसे उम्मीदवार को वोट दिया जाये, जो मुस्लिम समाज के सुख-दुख में हमेशा साथ रहेगा, गांव में पेयजल, बच्चों के लिए उर्दू स्कूल, लाचारों व वृद्धों को पेंशन, युवाओं के रोजगार आदि की व्यवस्था करेगा.
मुस्लिमों के विकास में अहम भूमिका सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों की होती है, लेकिन प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद जनता को भूल जाते हैं. फिर चुनाव के वक्त वोट मांगने चले आते हैं. हम दिल से नहीं, बल्कि दिमाग से काम लेंगे. ऐसे उम्मीदवार को वोट देंगे, जो पिछड़े मुस्लिम समाज का विकास करे.
राफे अहमद बलखी, पूर्व शिक्षक
चुनाव के समय नेताओं द्वारा तरह-
तरह के लुभावने वादे किये जाते हैं, लेकिन कोई भी प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद पांच साल
तक नहीं दिखाई देता. मुस्लिमों के हित और विकास करने वाले को ही हम वोट करेंगे. अन्यथा हमारा वोट नोटा में जायेगा.
अहमद अली बलखी, होमियोपैथ चिकित्सक
जनप्रतिनिधि चुनाव को जीतने के
बाद सोच को बदलकर क्षेत्र का विकास करें. मुस्लिम समाज के युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं. गांव में स्कूल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क की हालत बदहाल है. व्यवस्था को दुरुस्त करने वाले को ही वोट करेंगे. नहीं तो नोटा का प्रयोग किया जायेगा.
मोहम्मद शहजाद आलम, व्यवसायी
अल्पसंख्यक समाज हर रोज आगे
बढ़ने के बजाय पीछे होते जा रहा है. अल्पसंख्यक लोग
गरीबी में जिंदगी काट रहे हैं. अशिक्षा, बेरोजगारी,
पेयजल सहित बुनियादी समस्या झेल रहे हैं. ऐसे नेता का चयन करें, जो अल्पसंख्यकों की दिक्कतों को दूर करे.
दौलत अली, शिक्षक
मुस्लिम आज सबसे ज्यादा पिछड़े हुए हैं. इसका मुख्य कारण अशिक्षा, बेरोजगारी व सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना है. ऐसे नेता को वोट दें, जो मुस्लिमों को ज्यादा-से-ज्यादा योजनाओं का लाभ दिलाने में मददगार हो.
मंजूर आलम गुड्डू, अध्यक्ष याहियापुर मस्जिद कमेटी
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