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पटना : धार्मिक सजा में प्रधान ने धोये जूठे बर्तन, साफ किये जूते

Updated at : 08 Feb 2019 9:25 AM (IST)
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पटना : धार्मिक सजा में प्रधान ने धोये जूठे बर्तन, साफ किये जूते

पटना सिटी : श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित ने गुरुवार से धार्मिक सजा भुगतने का कार्य आरंभ कर दिया. इसके तहत सबसे पहले अहले सुबह दरबार साहिब में कीर्तन सुना. इसके बाद जोड़ाघर में संगत के जूतों को साफ […]

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पटना सिटी : श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित ने गुरुवार से धार्मिक सजा भुगतने का कार्य आरंभ कर दिया.
इसके तहत सबसे पहले अहले सुबह दरबार साहिब में कीर्तन सुना. इसके बाद जोड़ाघर में संगत के जूतों को साफ कर पॉलिस किया. यहां एक घंटे तक सेवा देने के उपरांत प्रधान लंगर हाॅल में पहुंचे, जहां पर जूठे बर्तनों को साफ किया. अकाल तख्त से मिली सजा के तहत उन्हें सात दिनों तक यही कार्य करना है. इसके बाद सात दिनों की सजा पूर्ण होने के उपरांत अध्यक्ष को 5100 रुपये का कड़ाह प्रसाद बनवाना होगा.
अरदास करने व श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ रखवाने के बाद ही वो सजा से मुक्त हो पायेंगे. धार्मिक सजा के तहत सेवा कर रहे प्रधान ने कहा कि यह गुरु महाराज की मेहर है.
मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे सजा के तौर पर अकाल तख्त व पटना साहिब में सेवा का मौका दिया गया. मैं इसे सजा नहीं मानता, बल्कि सेवा मानता हूं. दरअसल अध्यक्ष को धार्मिक सजा के तहत अकाल तख्त से मिली सजा में तीन घंटे सेवा करनी है. जोड़ा घर में जूता साफ करने, एक घंटा लंगर हाॅल में जूठे बर्तन मांजने व एक घंटा दरबार साहिब में कीर्तन सुनने की सजा मिली है.
इसी का अनुपालन कर रहे हैं.
क्या है मामला
दरअसल मामला यह है कि बीते 11 जनवरी को राजगीर में गुरुद्वारा गुरु नानक शीतल कुंड में शिलान्यास समारोह के दरम्यान गुरु साहिब के लिए विशेष रूप से बोले जाने वाले शब्द का इस्तेमाल प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित ने एक व्यक्ति विशेष के लिए किया गया था.
इससे सिख समाज के हृदय को ठेस लगी . इस संबंध में श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 28 जनवरी को अकाल तख्त में उपस्थित होकर प्रधान को स्पष्टीकरण देने को कहा था. इसके आलोक में उपस्थित हुए प्रधान ने अपनी गलती मान ली थी. इसके बाद सजा सुनायी गयी. इसमें पांच दिन अकाल तख्त में सेवा करनी थी, जहां सेवा पूर्ण होने के बाद अब पटना साहिब में वे सेवा करने पहुंचे हैं.
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