पटना : कांग्रेस का सीट से अधिक जीत पर फोकस, वाम दलों की ‘अपनी डफली, अपना राग''

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Feb 2019 7:42 AM

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शशिभूषण कुंवर पटना : चुनावी मोड में आ चुके प्रदेश में कांग्रेस अंतिम स्तर की तैयारी में जुट गयी है. पार्टी यह मानकर चल रही है कि सीटों से अधिक महत्व उसके लिए जीत का फाॅर्मूला होगा. महागठबंधन में अधिक सीट लेने की जगह हर दल को वहीं सीट दी जायेगी, जो जीत में बदल […]

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शशिभूषण कुंवर
पटना : चुनावी मोड में आ चुके प्रदेश में कांग्रेस अंतिम स्तर की तैयारी में जुट गयी है. पार्टी यह मानकर चल रही है कि सीटों से अधिक महत्व उसके लिए जीत का फाॅर्मूला होगा. महागठबंधन में अधिक सीट लेने की जगह हर दल को वहीं सीट दी जायेगी, जो जीत में बदल सके.
इसी फाॅर्मूले पर कांंग्रेंस अपनी सीटों की तलाश और सभी 40 सीटों की स्थिति का आकलन करने को स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराने का काम कर रही है. सर्वे के रिपोर्ट पर ही बहुत कुछ निर्धारित हो जायेगा. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी खुलकर नहीं तो दबे जुबान से यह मानते है कि कांग्रेस के लिए सीट नहीं जीत आवश्यक है.
अविभाजित बिहार की 54 में 49 सीटों पर जीती थी कांग्रेस
कांग्रेस सीटों को लेकर चुनावी वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं कर रही है. हाल के दिनों में कांग्रेस के स्वर्णिम दिन 1984 का आम चुनाव था, जिसमें अविभाजित बिहार की 54 में 49 सीटें पार्टी की झोली में आयी थी. इसके बाद पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे जाता रहा. 1989 में मात्र किशनगंज सेएमजे अकबर और नालंदा से राम स्वरूप प्रसाद,1991 में बेगूसराय,कटिहार, 1998 के चुनाव में मधुबनी से डा शकील अहमद, कटिहार से तारिक अनवर, बेगूसराय से राजो सिंह की जीत हासिल हुई. 1999 में पूर्णिया से राजेश रंजन, औरंगाबाद में श्यामा सिंह और बेगूसराय में राजो सिंह को जीत मिली.
2004 चुनाव में मधुबनी सीट से डा शकील अहमद, सासाराम से मीरा कुमार और औरंगाबाद में निखिल कुमार को जीत मिली. 2009 के चुनाव में किशनगंज से असरारूल हक और सासाराम से मीरा कुमार चुनाव जीतीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को किशनगंज से असरारूल हक और सुपौल से रंजीत रंजन को जीत मिली.
पटना : सीटों बंटवारे पर वाम दलों की ‘अपनी डफली, अपना राग’
पटना : सीटों के बंटवारे पर वाम दलों का रवैया ‘अपनी डफली, अपना राग’ जैसा है. सीपीआइ एमएल, सीपीआइ और सीपीएम अभी तक एक प्लेटफाॅर्म पर बातचीत को नहीं आये हैं. खास बात यह भी है कि अलग-अलग स्तरों पर ही महागठबंधन को लेकर अनौपचारिक बातचीत हुई है. आधिकारिक तौर पर अभी तक इसमें गंभीरता नहीं दिखायी गयी है. वाम दलों ने अपने-अपने हिसाब से सीटों पर दावेदारी भी कर रखी है.
बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं. चर्चा पर भरोसा करें तो महागठबंधन की बड़ी पार्टियां अपने-अपने हिसाब से सीटों पर दावेदारी कर रही हैं. वाम दलों की बात करें तो करीब 14 सीटों पर इनलोगों की भी दावेदारी है.
भाकपा माले के प्रदेश सचिव कुणाल कहते हैं कि पाटलिपुत्र, वाल्मीकिनगर, आरा, सीवान, जहानाबाद, काराकाट सीटों पर हमारी पार्टी ने दावेदारी की है. इन स्थानों पर हमारी पार्टी को अच्छे वोट मिलने का भरोसा है. पिछला रिकॉर्ड भी अच्छा ही है. हालांकि, जब मिल बैठकर बात होगी तो आगे-पीछे हो जायेगा.
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