ऑपरेशन के बाद जब पहली बार सुनी आवाज, तो रो पड़ीं दोनों बच्चियां

Updated at : 15 Nov 2018 2:50 AM (IST)
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ऑपरेशन के बाद जब पहली बार सुनी आवाज, तो रो पड़ीं दोनों बच्चियां

पटना : जन्म से बधिर दो व चार साल की दो बच्चियों के कानों में जब पहली बार आवाज गूंजी, तो दोनों घबरा गयीं. इस दौरान वे कान में हुई हलचल से रोने लगीं. उनके चेहरे पर अजीब डर था. पर अपने बच्चों की श्रवण शक्ति आ जाने से बच्चियों के माता-पिता की आंखें भी […]

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पटना : जन्म से बधिर दो व चार साल की दो बच्चियों के कानों में जब पहली बार आवाज गूंजी, तो दोनों घबरा गयीं. इस दौरान वे कान में हुई हलचल से रोने लगीं. उनके चेहरे पर अजीब डर था. पर अपने बच्चों की श्रवण शक्ति आ जाने से बच्चियों के माता-पिता की आंखें भी डबडबा गयीं.
उन्होंने बच्चियों को दुलराते हुए तुरंत गोद में उठा लिया और पूछा, डॉक्टर साहब बच्ची अब सुन सकेगी न? आईजीआईएमएस के ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश सिंह ने जैसे सिर हिला कर हां का इशारा किया, तो पिता की आंखें खुशी से छलक पड़ीं. पटना की रहने वाली दोनों बच्चियों को कुछ दिन पहले आईजीआईएमएस लाया गया था. यहां के डॉक्टरों ने गुरुवार को दोनों बच्चियों का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया.
अब बच्चियों को दी जायेगी स्पीच थेरेपी
कॉक्लियर इंप्लांट दिल्ली एम्स के पूर्व डायरेक्टर व ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रामेश चंद्र डेका के नेतृत्व में किया गया. वहीं जानकारी देते हुए डॉ रमेश चंद्र डेका ने बताया कि दोनों बच्चियां जन्मजात मूक-बधिर थीं. ऑपरेशन के एक महीने बीत जाने के बाद उनको स्पीच थेरेपी दी जायेगी. थेरेपी के करीब दो साल के अंतराल के बाद वे अच्छे-से सुनने व बोलने लगेंगी. स्पीच थेरेपी आईजीआईएमएस संस्थान के ईएनटी विभाग में ही दी जायेगी.
कान से दिमाग तक की नस नहीं जुड़ी थी
आईजीआईएमएस के डॉ राकेश सिंह ने बताया कि इएनटी विभाग में जब बच्चियों की जांच की गयी थी, तो पता चला कि उनके कान से दिमाग की नस जुड़ी नहीं है. इस कारण वे सुन नहीं सकती थीं. न सुन पाने के कारण बोल भी नहीं पा रही थीं. एम्स दिल्ली के डॉ रमेश चंद्र ने कॉक्लियर इम्प्लांट की सलाह दी.
पिता के हामी भरने पर गुरुवार को ऑपरेशन किया गया. कान के पास छोटी मशीन लगायी गयी है, जिसे एक महीने बाद ऑन किया जायेगा. इस ऑपरेशन के बाद अब तक आईजीआईएमएस में 42 कॉक्लियर इंम्लांट किये जा चुके हैं. इसमें कान की सर्जरी करके इलेक्ट्रोड (इंटरनल प्रोसेसर) इंप्लांट करके दिमाग और कान की नस को कनेक्ट किया गया है.
चिल्ड्रेन्स डे पर मिला तोहफा
आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि 14 नवंबर को चिल्ड्रेन्स डे है. इसको देखते हुए दोनों बच्चियों को सुनने व बोलने का तोहफा मिला है. वर्तमान में 40 और बच्चों में कॉक्लियर इंप्लांट किया जाना है. दोनों बच्चियां स्वस्थ हैं.
डॉ मनीष मंडल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट आईजीआईएमएस
एक महीना बाद ऑन होगा स्विच
जन्मजात सुनने व बोलने में अक्षम बच्चियों को दिल्ली एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ रमेश चंद्र डेका की देखरेख में ऑपरेशन कर कॉक्लियर इंप्लांट लगाया गया. एक महीने बाद इंप्लांट का स्विच ऑन किया जायेगा. इसके बाद उनको स्पीच प्रोसेसर लगाया जायेगा. इससे वे बेहतर तरीके से सुनने में सक्षम हो जायेंगी.
डॉ राकेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, ईएनटी विभाग
आईजीआईएमएस में दो बच्चियों में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया
जन्मजात सुन व बोल नहीं पाती थीं बच्चियां
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