पुलिस लाइन बवाल : सीएम से मिलने जा रहीं महिला सिपाहियों को पुलिस ने रोका

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Nov 2018 2:59 AM

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पटना : पुलिस लाइन में हुए हंगामे के बाद चल रही बर्खास्तगी की कार्रवाई को वापस लेने की मांग को लेकर सीएम नीतीश कुमार से मिलने सीएम हाउस की ओर जा रही महिला ट्रेनी सिपाहियों को पटना पुलिस की टीम ने बीच रास्ते में ही चिड़ियाखाना के गेट संख्या दो के समीप रोक दिया और […]

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पटना : पुलिस लाइन में हुए हंगामे के बाद चल रही बर्खास्तगी की कार्रवाई को वापस लेने की मांग को लेकर सीएम नीतीश कुमार से मिलने सीएम हाउस की ओर जा रही महिला ट्रेनी सिपाहियों को पटना पुलिस की टीम ने बीच रास्ते में ही चिड़ियाखाना के गेट संख्या दो के समीप रोक दिया और सचिवालय थाना ले आयी.
हालांकि इस दौरान पुलिस की ट्रेनी सिपाहियों से नोंक-झोंक भी हुई. इसके बाद शुक्रवार की शाम को उनका नाम व पता लिखवा कर पुलिस ने छोड़ दिया. सूत्रों के अनुसार महिला सिपाही बर्खास्तगी की कार्रवाई को वापस लेने की फरियाद लेकर सीएम से मिलने के लिए सीएम हाउस की ओर जा रही थीं. महिला सिपाहियों का कहना था कि उनसे उनका पक्ष नहीं लिया जा रहा है और एकतरफा कार्रवाई की गयी है. इसमें कई निर्दोषों को भी फंसा दिया गया है. उनका कहना था कि बिना उनका पक्ष जाने बर्खास्तगी की कार्रवाई गलत है.
महिला सिपाही ने कहा, ड्यूटी में होने के बावजूद कर दिया गया बर्खास्त: महिला सिपाहियों को बर्खास्तगी का पत्र विभाग द्वारा मिल गया है. इस दौरान कई महिला सिपाहियों ने कहा कि वे दो नवंबर को ड्यूटी पर थी, लेकिन फिर भी हंगामा करने वालों में नाम दे दिया गया. महिला सिपाही तनुजा ने बताया कि वह दो नवंबर को चार बजे सुबह में बीएमपी पांच में ड्यूटी के लिए तैनात की गयी थी.
उनके साथ कुछ और महिला सिपाही भी साथ में थी. वे लोग पांच बजे तक बीएमपी पांच में पहुंच गयी थी और फिर अगले दिन तीन नवंबर को उनकी ड्यूटी पूरी हुई और वापस पुलिस लाइन पहुंची. लेकिन फिर भी उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.
सुरक्षा के कर दिये गये थे कड़े इंतजाम
इधर, ट्रेनी सिपाहियों के सीएम हाउस की ओर जाने की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस को उस इलाके में तैनाती कर दी गयी थी. इसके अलावा काफी संख्या में महिला पुलिस बल व रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती कर दी गयी थी. साथ ही सीएम हाउस की ओर जाने वाले तमाम रास्तों की नाकेबंदी कर दी गयी थी.
इसी बीच ट्रेनी महिला सिपाही चिड़ियाखाना के गेट नंबर दो के सामने स्थित मार्ग से सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगीं, लेकिन वहां मौजूद पुलिस ने उन लोगों को आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद उनमें से आठ पुलिसकर्मियों को सचिवालय थाना लाया गया. सिटी एसपी मध्य अमरकेश डी ने बताया कि किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.
सचिवालय थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग प्रतिबंधित क्षेत्र
में मौजूद हैं. इस सूचना के बाद पुलिस टीम गयी और उन सभी को थाने पर लाया गया. सत्यापन करने के बाद सभी को छोड़ दिया गया है.
महिला आयोग से भी महिला सिपाहियों ने की है शिकायत: महिला सिपाहियों ने गुरुवार को बिहार महिला आयोग में भी अपने वरीय पदाधिकारियों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की है. महिला आयोग ने उनकी मदद करने का आश्वासन दिया है.
अपनी ही कार्रवाई में फंस गयी बिहार पुलिस
पटना : पुलिसलाइन पटना में दो नवंबर को हुए बवाल के मामले में बचाव का मौका दिये बिना सिपाहियों पर सामूहिक कार्रवाई कर बिहार पुलिस मुश्किल में फंस गयी है. कानून की नजर में पूरी कार्रवाई एकतरफा है. कानूनी लड़ाई में यह सिपाहियों की जीत का आधार बन सकती है. वहीं महिला सिपाहियों ने राज्य महिला आयोग में शिकायत कर अधिकारियों को साफ संकेत दे दिया है कि वह पुलिस लाइन का काला और पूरा सच सामने लाने में अब पीछे नहीं हटेंगीं. मामला ऐसी ठंडी आग बन गया है, जिसमें न जाने कितने अफसर और सिपाही झुलसेंगे कोई नहीं जानता.
बहुत पहले से सुलग रही थी आग
पटना पुलिस लाइन में आक्रोश की आग बहुत पहले से सुलग रही थी. वहां जो हालात थे उसने सिपाहियों और अधिकारियों के बीच कड़वाहट पैदा कर दी थी. सिपाहियों ने अपनी समस्याओं और पुलिस लाइन का निरीक्षण कागज पर ही होने बात कही थी. प्रभात खबर द्वारा 11 अगस्त के अंक में इन समस्याओं को प्रकाशित कर अधिकारियों का ध्यान भी खींचा गया था.
महीनों से सुलग रही आक्रोश की चिंगारी ट्रेनी कांस्टेबल की बीमारी से मौत के बाद ज्वाला बन गयी और बवाल हो गया. बवाल के बाद भी पुलिस के आला अधिकारियों ने दूरगामी कदम की जगह मामले को दबाने और सिपाहियों में कार्रवाई का डर पैदा करने वाले कदम उठाये. इससे सिपाहियों और अफसरों के बीच खाई और बढ़ गयी है.
निरीक्षण हुआ होता, तो ऐसी घटना नहीं घटती
पुलिस लाइन की घटना पर पूरा प्रकाश डालते हुए बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि लाइन में हजारों सिपाही रहते हैं, उनको कई टेंशन तो होंगी, लेकिन उनका निदान हो. लाइन की व्यवस्था चलती रहे इसके लिये एक-एक चीज लिखित में है. एसपी स्तर के अधिकारियों ने लाइन का नियमानुसार निरीक्षण नहीं किया. निरीक्षण हुआ होता, तो दो नवंबर की घटना नहीं होती.
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता शिवम द्विवेदी का कहना है कि पूरा मामला मेंबर आफ मॉब का मामला है. ऐसे में अपनी बात रखने का मौका दिये बिना सामूहिक कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है. हाईकोर्ट के पूर्व में दिये फैसलों पर निगाह डालें तो कोर्ट ने ऐसे आदेशों को निरस्त किया है. किसी पर यदि आरोप लगा दिया जाता है, ताे विभागीय प्रक्रिया अपनाये बिना दंड नहीं दिया जा सकता है. पटना पुलिस लाइन प्रकरण में भी कोर्ट फैसला सिपाहियों के हक में दे सकता है.
जोनल आईजी ने सौंपी रिपोर्ट
पुलिस लाइन में दो नवंबर को हुए उपद्रव मामले में जोनल आईजी ने पूरे मामले की जांच कर पुलिस मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. 19 पन्नों की रिपोर्ट में जोनल आईजी ने पुलिस लाइन में हुए उपद्रव के संबंध में विस्तार से जानकारी दी है. इस मामले में आईजी ने एसएसपी व सिटी एसपी से भी उनका मंतव्य मांगा था और उस मंतव्य को भी उक्त रिपोर्ट में शामिल किया गया है. इसके साथ ही रिपोर्ट में पुलिस लाइन की कमियां व उसे सुधारने के तरीके की भी जानकारी दी गयी है.
बर्खास्तगी रद्द करे सरकार : भाकपा-माले
भाकपा-माले ने महिला पुलिसकर्मियों सहित सभी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी अविलंब रद्द करने की सरकार से मांग की है. इसे लेकर राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर भाकपा-माले ने प्रतिवाद मार्च सभा का आयोजन किया. पटना में कारगिल चौक पर यह सभा आयोजित की गयी, जिसमें पार्टी के विधायक दल के नेता महबूब आलम, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, केंद्रीय कमिटी के सदस्य अभ्युदयआदि नेताओं ने भाग लिया.
बर्खास्तगी वापस नहीं, तो आंदोलन : संघ
पटना. बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, गोप गुट ने 77 महिला पुलिसकर्मी समेत 175 पुलिसकर्मियों के बर्खास्तगी का विरोध किया है. संघ के महासचिव व नेशनल फोरम फॉर वीमेंस टीचर के संरक्षक नागेन्द्र सिंह ने कहा है कि महिला पुलिसकर्मियों को न्याय दिलाने के बजाय गलत बर्खास्त किया जा रहा है.ऐसा गलत करनेवालों को बचाने के लिए किया जा रहा है. महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तमाम सरकारी नारे खोखले साबित हो रहे हैं.
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