एम्स पटना में इबोला आधारित हाई-लेवल मॉक ड्रिल, संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारियों की हुई जांच
Published by : Nikhil Anurag Updated At : 31 May 2026 8:10 PM
एम्स में इबोला वायरस पर हाई-लेवल मॉक ड्रिल का आयोजन
Patna News: एम्स पटना में इबोला वायरस पर आधारित हाई-लेवल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें अस्पताल की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता, संक्रमण नियंत्रण और विभागीय समन्वय का परीक्षण किया गया. अधिकारियों ने इसे तैयारियों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बताया.
Patna News: (अजीत कुमार की रिपोर्ट) फुलवारी शरीफ स्थित एम्स पटना में रविवार को इबोला वायरस रोग पर आधारित एक हाई-लेवल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित संक्रामक बीमारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने की संस्थान की तैयारियों को मजबूत करना और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था।
मॉक ड्रिल का आयोजन कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह की उपस्थिति में किया गया. इसमें विभिन्न विभागों के चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ, सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए.
काल्पनिक मरीज से शुरू हुआ अभ्यास
अभ्यास की शुरुआत एक काल्पनिक इबोला संदिग्ध मरीज के अस्पताल पहुंचने की स्थिति से की गई. स्क्रीनिंग के दौरान मरीज की पहचान होते ही उसे निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षित रूप से आइसोलेशन वार्ड में स्थानांतरित किया गया. इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने पीपीई किट के उपयोग, संक्रमण नियंत्रण और जैव सुरक्षा मानकों का पालन किया.
सभी विभागों ने मिलकर किया प्रदर्शन
मॉक ड्रिल में इमरजेंसी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, एनेस्थिसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर यूनिट, माइक्रोबायोलॉजी, अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग सेवाएं, संक्रमण नियंत्रण इकाई, सुरक्षा विभाग, स्वच्छता सेवाएं और एम्बुलेंस सेवाओं ने संयुक्त रूप से भाग लिया. पूरे अभ्यास में विभागों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला.
सैंपल कलेक्शन और रिपोर्टिंग प्रक्रिया
ड्रिल का महत्वपूर्ण हिस्सा संदिग्ध मरीज के सैंपल का सुरक्षित संग्रहण, ट्रिपल लेयर पैकेजिंग और जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजने की प्रक्रिया रहा. साथ ही दस्तावेजीकरण और सूचना संप्रेषण प्रणाली की भी समीक्षा की गई.
अधिकारियों के बयान
प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उभर रही संक्रामक बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य संस्थानों की निरंतर तैयारी जरूरी है. ऐसे मॉक ड्रिल आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में मदद करते हैं.
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि नियमित प्रशिक्षण स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर प्रबंधन के लिए तैयार रखता है. मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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