नीट पेपर लीक 2026: कलकत्ता हाईकोर्ट में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, दोषी पाये जाने पर 10 साल जेल और 10 करोड़ का जुर्माना

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कलकत्ता हाईकोर्ट और पीएम मोदी.

कलकत्ता हाईकोर्ट और पीएम मोदी.

NEET Paper Leak 2026 Case: NEET 2026 परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के विरोध के बीच सरकार ने दोषियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. नये विधेयक के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे और सख्त सजा का प्रावधान होगा. इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

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NEET Paper Leak 2026 Case: NEET-2026 की परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त रुख अपनाने के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट, 2024’ में संशोधन वाले नये विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द पूरी होगी सुनवाई

इस विधेयक का सबसे अधिक प्रभाव उन राज्यों पर पड़ेगा, जहां परीक्षा में धांधली से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के परीक्षार्थियों और अभिभावकों के लिए अच्छी खबर यह है कि कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) में भी इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Court) बनाये जा रहे हैं.

कलकत्ता समेत 4 उच्च न्यायालयों में बनेंगे स्पेशल कोर्ट

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि नीट (NEET) पेपर लीक से जुड़े मामलों में आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार विशेष न्यायिक ढांचा तैयार कर रही है. सरकार ने बॉम्बे, दिल्ली, मध्यप्रदेश और कलकत्ता हाईकोर्ट में पेंडिंग केसेज को ध्यान में रखते हुए इन राज्यों में तुरंत फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य लंबित याचिकाओं पर बिना किसी विलंब के दैनिक आधार पर सुनवाई कर फैसले तक पहुंचना है, ताकि छात्रों का एक भी शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो.

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10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना

संशोधित कानून में संगठित अपराध और पेपर लीक में शामिल गिरोहों के लिए सजा के प्रावधानों को अत्यधिक सख्त बना दिया गया है. दोषी पाये जाने वाले व्यक्तियों और माफिया नेटवर्क के सदस्यों के लिए न्यूनतम जेल की अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है, जिसे अधिकतम 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. पेपर लीक का कारोबार करने वाले माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.

परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर भी कसी नकेल

परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों, सेवा प्रदाताओं या अधिकारियों की मिलीभगत पाये जाने पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई का कानूनी वैधानिक आधार (Statutory Backing) तैयार किया गया है.

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2 महीने के भीतर चार्जशीट, 5 महीने में कार्रवाई पूरी

पेपर लीक मामले की जांच पूरी करने की टाइमलाइन भी नये कानून में तय कर दी गयी है. अब तक पेपर लीक के मामले वर्षों तक अदालती प्रक्रियाओं में उलझे रहते थे. इस ढिलाई को खत्म करने के लिए कानून में समय-सीमा तय कर दी गयी है.

  • जांच की समय-सीमा तय : पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसी को एफआईआर (FIR) दर्ज होने के 2 महीने के भीतर जांच पूरी कर आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करना अनिवार्य होगा.
  • ट्रायल की समय-सीमा : फास्ट ट्रैक कोर्ट को आरोप पत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना होगा.
  • 5 महीने में दोषी को सजा : यानी कुल 5 महीने के भीतर पूरे मामले का निपटारा कर दोषियों को जेल भेजा जायेगा.

छात्रों और अभिभावकों को राहत की उम्मीद

पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों से लाखों छात्र हर साल नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में बैठते हैं. पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के कारण छात्रों का मनोबल प्रभावित हुआ था. कलकत्ता हाईकोर्ट में विशेष अदालत के गठन और नये कानून से न केवल मामलों का तेजी से निपटारा होगा, बल्कि भविष्य में किसी भी परीक्षा में नकल या पेपर लीक करने वाले माफिया और गिरोहों में खौफ पैदा होगा. सरकार का यह नया विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश होने जा रहा है.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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