पटना : बिहार इप्टा अध्यक्षमंडल के साथी और वरिष्ठ रंगकर्मीअशोक पाठक के निधन पर इप्टा ने शोक व्यक्त किया है और उनके निधन से इप्टा आंदोलन को गहरी क्षति हुई है. बिहार में इप्टा आंदोलन के सक्रिय साथी और बेगूसराय में इप्टा के संस्थापकों में एक अशोक पाठक विगत 5 नवंबर देहांत हो गया. विगत माह से स्वर्गीय पाठक ब्रेन हैम्ब्रेज के कारण बीमार हो गये थे और चिकित्सीय परामर्शपर जी रहे थे.
बिहार इप्टा के महासचिव तनवीर अख्तर ने अपने शोक संदेश में कहा कि अशोक पाठक संघर्षशीलऔर जुझारू व्यक्ति थे. अस्वस्थ रहते हुए भी उन्होने सदैव ही देश, समाज, इप्टा और प्रलेस के बारे में चर्चा करते रहे. स्वर्गीयअशोक पाठक एक कुशल संगठनकर्ता एवं मंच संचालक थे. आकर्षक एवं प्रभावशाली आवाज और बेहतरीन अभिनय उनकी पहचान थी. उनके पिता चंद्रशेखर भारद्वाज जनकवि थे. इप्टा के लिए उन्होंने बेहतरीन जनगीतों की रचना की, जिसे सीताराम सिंह ने अपने संगीत संयोजन में लोकप्रिय बना दिया और इप्टा की टोली ने अशोक जी के नेतृत्व में उसे स्वर दिया था.
बेगूसराय इप्टा के स्थापना के बाद जिला भर के कलाकारों को जोड़ने में इनकी भूमिका अग्रणी रही. साथ ही, अशोकपाठक ने राज्य स्तर पर इप्टा की सांगठनिक मजबूती के महत्ती प्रयास किये. खगड़िया एवं समस्तीपुर में इप्टा इकाईयों की स्थापना और स्थानीय कलाकारों को वैचारिकता से लैस करने के प्रयास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. तनवीर अख्तर ने कहा, बिहार इप्टा अपने सजग, कर्मठ और सृजनशीलसाथी के निधन पर मर्माहत है. हमने अपना एक महत्वपूर्ण जुझारू साथी खो दिया है और इस कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता.