पटना : महिला कॉलेजों में अपडेट नहीं लाइब्रेरी, छात्राएं परेशान

Updated at : 18 Oct 2018 8:13 AM (IST)
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पटना : महिला कॉलेजों में अपडेट नहीं लाइब्रेरी, छात्राएं परेशान

लापरवाही : किताबें पड़ीं पुरानी, कई पुस्तकें वर्तमान समय में उपयोगी नहीं रहीं पटना : नया सत्र शुरू हो चुका है और पाठ्य सामग्री को लेकर महिला कॉलेजों की छात्राएं विषयों को लेकर नयी जानकारी की तलाश में कॉलेज की लाइब्रेरी में माथापच्ची कर रही हैं. श्री अरविंद महिला, जेडी वीमेंस कॉलेज और गंगा देवी […]

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लापरवाही : किताबें पड़ीं पुरानी, कई पुस्तकें वर्तमान समय में उपयोगी नहीं रहीं
पटना : नया सत्र शुरू हो चुका है और पाठ्य सामग्री को लेकर महिला कॉलेजों की छात्राएं विषयों को लेकर नयी जानकारी की तलाश में कॉलेज की लाइब्रेरी में माथापच्ची कर रही हैं. श्री अरविंद महिला, जेडी वीमेंस कॉलेज और गंगा देवी की लाइब्रेरी में अभी भी सालों पुरानी किताबें मौजूद हैं.
लाइब्रेरी के अपडेट नहीं होने से कई पुस्तकें वर्तमान समय में उपयोगी नहीं लग रही हैं. इससे छात्राएं परेशान हैं.कोई लाइब्रेरी दो साल तो कोई छह साल से नहीं हुई अपडेट : अरविंद महिला कॉलेज की बात करें तो कॉलेज की लाइब्रेरी साल 2012 के बाद अपडेट नहीं हुई है.
वहीं जेडी वीमेंस की भी लाइब्रेरी दो साल पहले अपडेट हुई थी. इससे पहले रूसा की ओर से एक बार किताबें आयी थीं जिसके बाद अब तक कोई भी नये बुक्स का लॉट नहीं आया है. अब तो न तो पिछले कुछ सालों के प्रमुख अखबार होते हैं न ही कोई मैगजीन. गंगा देवी महिला कॉलेज में भी अंतिम बार 2013 में लाइब्रेरी अपडेट हुई थी. लाइब्रेरी में कुछ किताबें पूर्व टीचर्स द्वारा डोनेट की गयी है. रिसेंट सिलेबस से जुड़ी कोई भी किताब नहीं है.
डिजिटल पर चल रहा काम : मगध महिला कॉलेज में पूरी लाइब्रेरी को डिजिटल बनाने का काम हो रहा है. आधे से ज्यादा किताबों को अपडेट कर दिया गया है.
कॉलेज के कॉमर्स विभाग की लाइब्रेरी लगभग अपडेट कर दी गयी है. जल्द ही छात्राएं ऑनलाइन किताबों का इस्तेमाल करने लगेंगी. अरविंद महिला में भी कुछ महीने पहले लाइब्रेरी में ऑनलाइन व्यवस्था की गयी है. वेब ओपेक सिस्टम में यूजरनेम और पासवर्ड की मदद से छात्राएं घर बैठे भी कितबों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकती हैं.
छात्राओं की मांग, नये मैगजीन और अखबार भी मिलें
अरविंद महिला कॉलेज की छात्राओं ने कहा कि कॉलेज की सेंट्रल लाइब्रेरी में पहले नौ अखबार आते थे आज अखबारों की संख्या तीन हो गयी है. मैगजिन और जर्नल के नाम पर कॉलेज में कोई नया मैगजिन मौजूद नहीं रहता है जबकि मैगजीन, अखबार और जर्नल हमेशा आने चाहिए.
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