पटना : भांजे ने ही इंटरनेट कॉल से मांगी थी रंगदारी, यूके और रोमानिया पुलिस से ली मदद, चार लोग हुए गिरफ्तार

Updated at : 27 Sep 2018 9:10 AM (IST)
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पटना : भांजे ने ही इंटरनेट कॉल से मांगी थी रंगदारी, यूके और रोमानिया पुलिस से ली मदद, चार लोग हुए गिरफ्तार

कपड़ा व्यवसायी से गुजरात से फोन पर रंगदारी मांगने का मामला बख्तियारपुर में दर्ज हुआ था मामला, गुजरात से पकड़ कर पुलिस लायी पटना पटना : बख्तियारपुर थाने के बेलथान निवासी कपड़ा व्यवसायी सुकन साव से 12 जून को मांगी गयी छह लाख की रंगदारी मामले का पुलिस ने बुधवार को खुलासा कर दिया. पुलिस […]

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कपड़ा व्यवसायी से गुजरात से फोन पर रंगदारी मांगने का मामला
बख्तियारपुर में दर्ज हुआ था मामला, गुजरात से पकड़ कर पुलिस लायी पटना
पटना : बख्तियारपुर थाने के बेलथान निवासी कपड़ा व्यवसायी सुकन साव से 12 जून को मांगी गयी छह लाख की रंगदारी मामले का पुलिस ने बुधवार को खुलासा कर दिया. पुलिस ने इस मामले में चार अपराधियों को गिरफ्तार किया है. जिसमें उसका भांजा भी शामिल है. पकड़े गये अपराधियों में सुकन साव का भांजा विजय साव, अपराधी धर्मवीर उर्फ धनिया, मनीष कुमार व मोहन कुमार शामिल हैं. ये सभी बख्तियारपुर के रहने वाले है.
विजय साव गुजरात के सूरत में रहता है और उसने ही लांग डिस्टेंस इंटरनेट कॉल से मामा से रंगदारी मांगी थी. इसके बाद कुछ युवकों को भी मामा के घर पर भेज दिया. पुलिस ने अपना जाल बिछाया और रंगदारी लेने पहुंचे धर्मवीर, मनीष व मोहन को पकड़ लिया. इसके बाद उन लोगों की निशानदेही पर पुलिस ने गुजरात के सूरत में छापेमारी की और भांजा विजय साव को भी गिरफ्तार कर लिया.
खास बात यह है कि पुलिस ने धमकी दिये जाने वाले मोबाइल नंबर की तलाश शुरू की तो यह जानकार पुलिस के होश उड़ गये कि उक्त नंबर कैलिफोर्निया का है. इसके बाद फिर से दूसरे नंबर की जांच की गयी तो वह भी किसी दूसरे देश का निकला. हालांकि पुलिस ने इस मामले में साइबर क्राइम सेल, आर्थिक अपराध ईकाई की मदद ली और विजय साव तक पहुंच गयी. विजय साव ने अपने ही मामा से पैसे ऐंठने के लिए अपने दोस्तों के साथ मिल कर साजिश की थी. एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि पकड़ा गया धर्मवीर शातिर अपराधी है और मुठभेड़ में इसे गोली भी लगी थी. यह कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे चुका है. यह नीतीश यादव गिरोह से जुड़ा हुआ है.
यूनाइटेड किंग्डम और रोमानिया पुलिस से भी ली गयी मदद : रंगदारी भरे कॉल जिस नंबर से बख्तियारपुर के व्यवसायी को आ रहे थे. इसमें कुछ मोबाइल नंबर यूनाईटेड किंग्डम व रोमानिया के भी थे. इसके बाद पुलिस ने उस इंटरनेट नंबर के आइपी एड्रेस को यूनाईटेड किंग्डम व रोमानिया पुलिस को भेजा था.
उक्त आइपी एड्रेस की मदद से वहां की पुलिस ने विजय साव के मोबाइल के लोकेशन की जानकारी को दी थी. इस मामले में यूनाईटेड किंग्डम व रोमानिया पुलिस की भी मदद ली गयी.
पटना : दारोगा से बाइक छीन फर्जी कागजात पर जमुई में बेच दिया
पटना : अगमकुआं थाने के शीतला मंदिर के पास लूटेरों ने दीदारगंज चेक पोस्ट पर तैनात दारोगा मंजर आलम से बाइक छीनी, उसके फर्जी कागजात बनवाये और फिर जमुई में बेच दिया. इसका खुलासा उस समय हुआ जब दारोगा से लूटपाट मामले में अगमकुआं पुलिस ने घटना को अंजाम देने वाले तीन अपराधी सोनू कुमार सिंह, विजय कुमार व चंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया. ये तीनों बाइपास इलाके के रहने वाले है.
इन लोगों के पास से लूटी गयी बाइक व हथियार की बरामदगी की गयी है. बताया जाता है कि इन तीनों ने बाइक छीनने के बाद उसे जमुई के एक व्यक्ति को मात्र दस हजार में बेच दिया. पुलिस ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया है. उसके पास से बाइक भी बरामद कर ली गयी है. यह गिरोह बाइपास इलाके में सक्रिय था अौर लूट की कई घटनाओं को अंजाम दिया था.
19 सितंबर के अहले सुबह हुई थी घटना : दारोगा मंजर आलम दीदारगंज चेक पोस्ट से अपनी ड्यूटी को खत्म कर अगमकुआं स्थित आवास की ओर जा रहे थे. इस दौरान शीतला मंदिर के पास पहुंचे तो वहां तीन-चार युवकों को देख कर उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और पूछा कि कुछ हुआ है क्या? चुंकि वे सिविल ड्रेस में थे तो अपराधियों ने राहगीर समझ लिया और उसमें से एक ने पिस्तौल तान दिया.
इसके बाद मंजर आलम के पास रहे कुछ सामान व बाइक को छीन कर फरार हो गये. पुलिस ने घटना के बाद उस इलाके का सीसीटीवी कैमरा का वीडियो फुटेज देखा तो अपराधियेां की पहचान कर ली गयी. इसके बाद छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया गया.
ऐप की मदद से होते हैं इस तरह के इंटरनेट कॉल
कई एप किसी भी एंड्राएड मोबाइल में है जो प्ले स्टोर से डाउन लोड किये जा सकते है. इसे प्ले स्टोर से डाउन लोड करने के बाद उससे मोबाइल नंबर प्राप्त किये जा सकते है और फिर उससे कॉल किये जा सकते है. लेकिन जब भी उससे कॉल किया जायेगा तो वह नंबर विदेशों का दिखेगा. उक्त एप की मदद से मोबाइल नंबर को जी मेल पर मंगवाया जाता है.
इसके लिए जी मेल पर फर्जी नाम से एक एकाउंट बना लिया जाता है और उसे उस एेप की मदद से जोड़ कर नंबर जी मेल पर ही मंगवाया जाता है. इसके बाद उसका उपयोग शुरू कर दिया जाता है. जानकारी के अनुसार उस एप के माध्यम से मोबाइल नंबर के रजिस्ट्रेशन के लिए दो से तीन हजार रुपये का खर्च अाता है.
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