प्रदेश जदयू कार्यकारिणी भंग, 10 दिनों में पुनर्गठन

Updated at : 06 Jun 2014 11:54 AM (IST)
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प्रदेश जदयू कार्यकारिणी भंग, 10 दिनों में पुनर्गठन

पटना: जदयू की राज्य कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है. 10 दिनों के अंदर नये सिरे से इसका गठन किया जायेगा. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार को यह घोषणा की. पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि पार्टी राज्य कार्यकारिणी भंग होने के साथ ही इसके सारे […]

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पटना: जदयू की राज्य कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है. 10 दिनों के अंदर नये सिरे से इसका गठन किया जायेगा. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार को यह घोषणा की.

पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि पार्टी राज्य कार्यकारिणी भंग होने के साथ ही इसके सारे पदाधिकारी अपने पदों से मुक्त हो गये हैं. ऐसे में जब तक नयी कार्यकारिणी का गठन नहीं हो जाता है, तब तक पार्टी के कार्यालय का कामकाज रवींद्र सिंह और डॉ नवीन कुमार आर्या देखेंगे. वहीं, प्रवक्ता के रूप में डॉ अजय आलोक और कोषाध्यक्ष के रूप में डॉ संजीव कुमार सिंह प्रभारी के रूप में काम करेंगे. वशिष्ठ नारायण सिंह ने पथ निर्माण मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और सांसद आरसीपी सिंह का खुल कर बचाव किया. उन्होंने नाराज नेताओं को साफ शब्दों में कहा कि जिन्हें पार्टी छोड़ कर जाना हैं, उन्हें तुरंत चले जाना चाहिए. पार्टी किसी को रोकेगी नहीं. जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार और कई स्तरों पर बातचीत के बाद इसका फैसला लिया गया है.

लोगों ने महसूस किया कि नये ढंग से संगठन को मजबूत किया जाये. अगले डेढ़ साल में विधानसभा का चुनाव है और कार्यकारिणी को पहले से ज्यादा प्रभावशाली बनाया जाये. राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद ही संगठन को मजबूत करने के लिए नये सिरे से कार्यकारिणी के गठन की बात उठ रही थी. यह निर्णय उसी दिशा में अगला कदम है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में रवींद्र सिंह, डॉ नवीन आर्या, डॉ अजय आलोक और डॉ संजीव कुमार सिंह मौजूद थे.

अनुशासन समिति का ज्ञानू ने उड़ाया मजाक

वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने अनुशासन समिति का मजाक उड़ाया है. वह अनुशासन समिति का स्वयंभू अध्यक्ष बन कर अनुशंसा कर रहे हैं, लेकिन अनुशासन समिति में वे ही मामले जाते हैं, जिसका पार्टी की राज्य कमेटी में निदान नहीं हो सका है. पर, किसी को किसी बात को लेकर असंतोष हो जाये, किसी चीज की चिढ़ हो जाये, तो क्या किया जा सकता है.

किसी को रोकने का नहीं करेंगे प्रयास

वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि जो कोई नेता नाराज चल रहे हैं, उन्हें पहले समझाने का प्रयास किया जायेगा. अगर वे समझ गये, तो ठीक है, नहीं तो कार्रवाई भी की जा सकती है. अगर कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहे, तो उसे रोकने का प्रयास नहीं किया जायेगा. जिसको भी इस्तीफा देकर जाना है, वे जाएं. जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मंत्रिमंडल के पुनर्गठन पर कुछ नेताओं की ओर से आपत्तियां आ रही हैं, लेकिन कभी भी पुनर्गठन होगा, तो कुछ असंतोष और नाराजगी तो होती ही है. सदस्य (विधायक-विधान पार्षद) सोचते हैं कि वे भी योग्यता में किसी से कम नहीं थे. राजद पर उन्होंने कहा कि विधानसभा में विश्वास मत के लिए राजद ने समर्थन दिया था, लेकिन उनकी पार्टी तो पहले ही टूट चुकी है. राजद छोड़नेवाले अली अशरफ फातमी को जदयू से राज्यसभा भेजने के सवाल पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वे अभी हमारी पार्टी में नहीं हैं. ऐसे में उन्हें राज्यसभा में भेजने का प्रश्न कहां से उठ रहा है.

ललन सिंह व आरसीपी सिंह का किया बचाव

जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का बचाव किया. कहा, वह लोकसभा चुनाव में हमारे प्रत्याशी रहे हैं. उनका पार्टी से पुराना रिश्ता है. मुख्यमंत्री को लगा कि वह अच्छा काम कर सकते हैं इसलिए उन्हें चुना और मंत्रिमंडल में जगह दी गयी. वहीं, आरसीपी सिंह पार्टी के सांसद हैं और राष्ट्रीय महासचिव हैं. उनके साथ-साथ तमाम सांसद व विधायकों की पार्टी में बड़ी भूमिका है.

संगठन को पुनर्गठित करने की मिली जिम्मेदारी

जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि मुङो पार्टी को पुनर्गठित करने की जिम्मेदारी मिली है. लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद मैंने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया. पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोका और पार्टी को पुनर्गठित करने की जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने कहा कि मैं किसी पद या कुरसी से चिपके रहनेवाले नहीं हैं. जरूरत पड़ी, तो मैं अध्यक्ष या कोई भी पद छोड़ सकता हूं.

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