पटना : रैगिंग मामले को लेकर हुई बैठक में फैसला, दोषी 10 मेडिकल छात्र सस्पेंड
Updated at : 19 Jul 2018 5:45 AM (IST)
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बाकी छात्रों को दी गयी चेतावनी पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में रैगिंग के आरोपित 10 एमबीबीएस छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है. बुधवार को एंटी रैगिंग सेल कमेटी की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगायी गयी. आईजीआईएमएस के इतिहास में रैगिंग के मामले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई […]
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बाकी छात्रों को दी गयी चेतावनी
पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में रैगिंग के आरोपित 10 एमबीबीएस छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है. बुधवार को एंटी रैगिंग सेल कमेटी की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगायी गयी. आईजीआईएमएस के इतिहास में रैगिंग के मामले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बतायी जा रही है.
इधर दोषी छात्रों को बचाने के लिए जूनियर व सीनियर छात्र एक जुट हो गये हैं और सस्पेंड ऑर्डर के फैसले को वापस लेने की कॉलेज प्रशासन से मांग कर रहे हैं. आईजीआईएमएस में पांच जुलाई को एमबीबीएस के एक जूनियर छात्र ने सीनियर छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाते हुए शास्त्रीनगर थाने में एफआईआर दर्ज करायी.
दूसरी ओर सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्र के खिलाफ बाहरी लड़कों को बुला कर मारपीट करने का आरोप लगाया था. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच टीम का गठन कर कार्रवाई की बात कही थी. आईजीआईएमएस में रैगिंग मामले की जांच का जिम्मा कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ रणजीत गुहा और डीन डॉ एसके साही को दिया गया था.
बंद कमरे में तीन घंटे चली बैठक, फिर दोषी करार
जांच टीम की इंक्वायरी रिपोर्ट मिलने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक बुलायी गयी. इस बैठक में डायरेक्टर डॉ एनआर विश्वास, प्रिंसिपल, डीन व एंटी रैगिंग कमेटी सेल के सदस्य शामिल थे.
कमेटी ने सभी एमबीबीएस स्टूडेंट्स को बैठक में शामिल किया और पूछताछ की गयी. करीब तीन घंटे चली इस बैठक में कमेटी ने 10 छात्रों को दोषी पाया. दोषी छात्रों को सस्पेंड करने का आदेश गुरुवार को कॉलेज में नोटिस बोर्ड और ईमेल के माध्यम से भेज दिया जायेगा. वहीं अागे से इस तरह की कोई घटना नहीं हो, इसके लिए बाकी छात्रों को चेतावनी दी गयी है.
10 छात्रों पर लगे गंभीर आरोप
अपनी जांच रिपोर्ट में कमेटी ने रैगिंग में दोषी पाये गये 10 छात्रों पर गंभीर आरोप लगाया है. इन छात्रों पर मारपीट व हंगामा करने का आरोप लगा है. इतना ही नहीं इन छात्रों के बीच आपसी झगड़े की बात भी कॉलेज प्रशासन को मिल चुकी है. इनमें से एक जूनियर छात्र व एक सीनियर छात्र के बीच हॉस्टल में मारपीट जैसे मामले भी सामने आये. कॉलेज का माहौल खराब करने व मारपीट जैसे मामले को देखते हुए इन 10 छात्रों को रैगिंग कमेटी ने दोषी पाया और सस्पेंड किया.
यह था मामला
पांच जुलाई को आईजीआईएमएस एमबीबीएस 2016 बैच के जूनियर छात्र ने अपने 2013, 14 और 15 बैच के सीनियर छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाते हुए शास्त्रीनगर थाने में एफआईआर दर्ज करायी थी. वहीं दूसरी ओर सीनियर छात्रों ने एक जूनियर छात्र पर बाहरी लोगों के साथ हॉस्टल में प्रवेश व मारपीट का आरोप लगाया था. मेडिकल छात्रों के बीच रैगिंग का मामला आने के बाद मेडिकल कॉलेज व हॉस्टल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया था.
रैगिंग में 5 साल की सजा
रैगिंग के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है. कॉलेज की एंटी रैगिंग समिति खुद भी निर्णय ले सकती है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवायी जा सकती है. पांच साल तक की सजा तक का प्रावधान है.
डॉ सुनील कुमार सिंह, सदस्य शासकीय निकाय, आईजीआईएमएस
क्या कहते हैं डीन
कमेटी ने दोनों पक्षों को बुलाया और पूछताछ की. इसमें 10 मेेडिकल छात्रों को कमेटी ने दोषी पाते हुए सस्पेंड कर दिया है. वहीं स्पष्टीकरण मांगा गया है, अगर संतोषजनक पाया गया, तो पढ़ाई करने की अनुमति दी जा सकती है.
-डॉ एसके साही, डीन, आईजीआईएमएस
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