एमबीबीएस में दाखिले के लिए 8 से 8.38 लाख का शुल्क तय
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jul 2018 4:04 AM
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पटना : सूबे के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिले के लिए शुल्क तय हो गया है. राज्यों के तीनों मेडिकल कॉलेजों की सालाना फीस अलग- अलग होगी. सालाना फीस 8 लाख से 8.38 लाख के बीच है. विद्यार्थियों से परिवहन, हॉस्टल व खाने का खर्च अलग से लिया जायेगा. जल्द ही डेंटल कॉलेजों […]
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पटना : सूबे के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिले के लिए शुल्क तय हो गया है. राज्यों के तीनों मेडिकल कॉलेजों की सालाना फीस अलग- अलग होगी. सालाना फीस 8 लाख से 8.38 लाख के बीच है. विद्यार्थियों से परिवहन, हॉस्टल व खाने का खर्च अलग से लिया जायेगा. जल्द ही डेंटल कॉलेजों की फीस भी तय होगी.
इसकी विधिवत घोषणा शनिवार को कर दी गयी. सत्र 2018-19 से यह फीस लागू हो गयी .कोर्ट के आदेश पर निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस तय करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश अखिलेश चंद्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एक कमेटी गठित की गयी थी. 6 जुलाई को हुई इस बैठक में कमेटी के सदस्य सचिव सह स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार भी मौजूद थे.
इस बैठक में कमेटी ने सभी पहलुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया. बताया जाता है कि राज्य के निजी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों द्वारा एमबीबीएस में दाखिले को लेकर सालाना प्रति छात्र 14 लाख से 18 लाख के शुल्क की मांग रखी गयी थी. बाद में ये लोग 12 लाख तक फीस रखने की बात कह रहे थे.
2017 से ही चल रही थी कवायद
कमेटी में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आठ लाख से अधिक सालाना फीस पर सहमति बनी. कटिहार मेडिकल कॉलेज के लिए सालाना 8.38 लाख,नारायणी मेडिकल कॉलेज, सासाराम के लिए 8.21 लाख और माता गुजरी मेडिकल कॉलेज, किशनगंज के लिए सालाना आठ लाख फीस तय की गयी . इसमें मेस व हॉस्टल का खर्च शामिल नहीं है. 2017 से ही फीस निर्धारण की कवायद चल रही थी. फीस निर्धारण के लिए कमेटी ने कई बैठकें की.
मेडिकल की पढ़ाई करने वालों का सपना पूरा होगा
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि फीस निर्धारण से बिहार के छात्र- छात्राओं को अनावश्यक आर्थिक दबाव से मुक्ति मिलेगी. इससे आर्थिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी . इस निर्णय को किसी भी रूप में नहीं मानने और किसी भी तरह का अनावश्यक आर्थिक शुल्क लेने वाले संस्थानों पर विधिसम्मत कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि फीस निर्घारण के लिए यह कमेटी 2017 के मध्य में बनी थी और इस दिशा में काम कर रही थी. बिहार सरकार कमेटी के निर्णय का इंतजार कर रही थी और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराना चाहती थी. इस फैसले से मेडिकल की पढ़ाई करने वालों का सपना पूरा होगा. निकट भविष्य में राज्य के निजी डेंटल कॉलेजों की फीस का भी निर्धारण होगा.
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