बिहार से राज्यसभा जाने वाले नामों पर सियासी चर्चा शुरू, किसका टिकट कच्चा या पक्का, जानें

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Mar 2018 6:40 PM

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पटना : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र जारी है. बजट सत्र के दौरान पक्ष और प्रतिपक्ष के हंगामे के बीच सियासी गलियारों में राज्यसभा चुनाव की चर्चा भी जोरों पर है. चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है. इस बीच विभिन्न पार्टियों के अंदर उम्मीदवारों को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. राजद, जदयू, कांग्रेस […]

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पटना : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र जारी है. बजट सत्र के दौरान पक्ष और प्रतिपक्ष के हंगामे के बीच सियासी गलियारों में राज्यसभा चुनाव की चर्चा भी जोरों पर है. चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है. इस बीच विभिन्न पार्टियों के अंदर उम्मीदवारों को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. राजद, जदयू, कांग्रेस और भाजपा में उम्मीदवारों के नामों को लेकर अटकलबाजी का दौर बिहार विधानसभा परिसर में भी देखने को मिल रहा है. राज्यसभा में बिहार कोटे की कुल 16 सीटों हैं. इनमें से छह सीटों का कार्यकाल इसी वर्ष अप्रैल 2018 में पूरा हो रहा है. जानकारी के मुताबिक 2 अप्रैल 2018 तक जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, उनमें दो केंद्रीय मंत्री भी हैं- धर्मेंद्र प्रधान और रविशंकर प्रसाद. इनके अलावा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, जदयू के ही महेंद्र प्रसाद और अनिल कुमार सहनी का कार्यकाल भी अप्रैल 2018 में पूरा हो रहा है. इधर, राज्यसभा की शोभा किस पार्टी के कौन से सदस्य बढ़ाएंगे, इसकी चर्चा जारी है.

विधानसभा के राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा पर ध्यान दें, तो राजद की ओर से दो सदस्यों का जाना तय माना जा रहा है, जिसमें एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी शामिल हैं. दूसरे नंबर पर मनोज झा का नाम चल रहा है. हालांकि, बताने वाले यह भी बताते हैं कि कई विधायकों ने शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को भी राज्यसभा भेजने की मांग की है और एक विधायक ने बकायदा राबड़ी देवी से मुलाकात कर हिना की दावेदारी का प्रस्ताव उनके सामने रखा है. कहा जा रहा है कि राजद की सीटों में इस बार इजाफा होगा. चर्चा यह भी है कि दावेदारों में पहला नंबर रघुवंश सिंह का भी है. साथ ही, लालू प्रसाद के एक समधी भी इस दौड़ में हैं. कांग्रेस का अभी बिहार से राज्यसभा में कोई नुमाइंदा नहीं है, इसलिए लालू से नजदीकी के कारण अखिलेश सिंह इस दौड़ में अभी आगे चल रहे हैं. इस चर्चा में कुछ दिन पहले तक हम के नेता जीतन राम मांझी भी शामिल थे, लेकिन कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने बेटे और हम के एक और नेता वृषिण पटेल के विधान परिषद में जाने की बात से संतुष्ट हैं और वह राज्यसभा का रुख नहीं करेंगे.

एनडीए की बात करें, तो भाजपा के दो केंद्रीय मंत्री बिहार से राज्यसभा सदस्य हैं- धर्मेंद्र प्रधान और रविशंकर प्रसाद, दोनों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. सियासी गलियारों में एनडीए की ओर से बीजेपी के एक नाम रविशंकर प्रसाद का नाम पूरी तरह क्लियर है, वहीं जदयू की ओर से केसी त्यागी के अलावा किंग महेंद्र का नाम हवा में तैर रहा है. बताया जा रहा है कि रविशंकर प्रसाद नीतीश के काफी प्रिय हैं और बाजी वहीं मार ले जायेंगे. हालांकि, जदयू से वशिष्ठ नारायण सिंह का जाना भी तय माना जा रहा है, वहीं किंग महेंद्र के बारे में कहा जा रहा है कि वे एनडीए के उम्मीदवार हो सकते हैं. संख्या बल के हिसाब से एनडीए के विधायकों की संख्या कुल मिला दें, तो 127 होगी, वहीं दूसरी ओर राजद, कांग्रेस और हम के विधायकों की संख्या कुल मिलाकर 106 होगी. इसके अनुसार, जदयू-भाजपा का चार और राजद-कांग्रेस गठबंधन का तीन सीटों पर चुना जाना तय है.

कांग्रेस के कुछ विधायकों के क्रास वोटिंग करने की बात सामने आ रही है, हालांकि इस बात को कांग्रेस विधायक पूरी तरह खारिज कर रहे हैं, लेकिन एनडीए के सूत्रों की मानें, तो कांग्रेस विधायकों को अभी इंतजार करने का निर्देश दिया गया है. कांग्रेस की ओर से राज्यसभा जाने वालों में कुछ लोग सी पी जोशी का नाम भी ले रहे हैं, लेकिन यह तभी संभव है, जब कांग्रेस एकजुट बनी रहे. जानकारी के मुताबिक कांग्रेस की ओर से राजीव शुक्ला भी मैदान में है और उन्होंने हाल में बिहार दौरा भी किया है और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की है. सूत्रों की मानें, तो एनडीए के पास राज्यसभा चुनाव में कुछ अतिरिक्त वोट हैं. एनडीए का ध्यान पूरी तरह कांग्रेसी विधायकों पर है, यदि वह क्रास वोटिंग कर देते हैं, तो एनडीए को एक सीट का फायदा हो सकता है. इस बार के राज्यसभा चुनाव में सीटों के आंकड़ों को देखें, तो राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जदयू को दो सीटों का नुकसान हो रहा है और भाजपा भी घाटे में रहेगी, जबकि राजद को दो सीटों का फायदा होगा. फिलहाल, यह पूरी कवायद सिर्फ चर्चा में बनी हुई है, चुनाव में राजनीतिक पंडितों का दावा कितना सत्य होता है, यह देखने वाली बात होगी.

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