बिहार : 11 बैंक एकाउंट व 4 फर्जी कंपनियों के नाम पर लारा कंपनी के एकाउंट में ट्रांसफर किये गये पैसे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Dec 2017 6:26 AM
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खुलासा. ईडी की जांच में इस तथ्य की मिली जानकारी पटना : तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद की पत्नी व पूर्व सीएम राबड़ी देवी और पुत्र व पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव की कंपनी ‘लारा एलएलपी’ की जांच में मनी लॉड्रिंग से जुड़े कई बड़े मामले सामने आये हैं. इसमें 11 बैंक एकाउंट और […]
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खुलासा. ईडी की जांच में इस तथ्य की मिली जानकारी
पटना : तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद की पत्नी व पूर्व सीएम राबड़ी देवी और पुत्र व पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव की कंपनी ‘लारा एलएलपी’ की जांच में मनी लॉड्रिंग से जुड़े कई बड़े मामले सामने आये हैं.
इसमें 11 बैंक एकाउंट और चार फर्जी या बेनामी निजी फाइनेंस कंपनी के नाम पर लारा कंपनी के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर किये गये थे. ये सभी एकाउंट नयी दिल्ली के अलग-अलग बैंक शाखाओं के हैं. इसमें अधिकतर निजी बैंक में ही खोले गये खाते हैं.
इन खातों से रुपये लारा कंपनी के एकाउंट में भेजे गये थे. किसी एक निश्चित राशि को किसी एक बैंक एकाउंट से सीधे ट्रांसफर नहीं किया गया था. अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से ये रुपये लारा कंपनी के एकाउंट में भेजे गये थे. इसके अलावा चार ऐसी निजी कंपनियों के बारे में भी जानकारी मिली है, जिनके जरिये रुपये ट्रांसफर किये गये हैं.
इसमें अभिषेक फाइनेंस कंपनी लिमिटेड प्रमुख है. इस कंपनी ने मेसर्स सेवास्तुति फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से पैसे लिये थे. वहीं, इसमें मेसर्स इस्टर्न इंडिया पॉवर एंड माइनिंग कंपनी लिमिटेड से पैसे ट्रांसफर होकर आये थे. इस कंपनी मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बाद में इसी का नाम बदल कर लारा एलएलपी हो गया) को लोन भी दिया था.
लोन के रूप में दिये गये थे पैसे
छानबीन में यह बात सामने आयी कि लोन के रूप में दिये गये ये रुपये, असल में कागज पर पैसे को रूट करके सिर्फ दिखाया गया था. ताकि ब्लैक मनी को कई रास्तों से गुजार कर इसे सफेद करके बताया जा सके. इस तरह से पैसे को कई तरह से घुमाकर लारा कंपनी के खाते में पहुंचाया गया था. ताकि इसे आसानी से पकड़ा नहीं जा सके. कंपनी को कर्ज में दिखाकर सभी ब्लैक मनी को व्हाइट करने की जुगत महिरता से की गयी है.
डिलाइट या लारा एलएलपी कंपनी का कारोबार शून्य होने के बाद भी इस कंपनी को नयी दिल्ली स्थित कुछ बड़ी निर्माण कंपनी और अन्य कंपनियों ने भी लोन दिया है. इन कंपनियों ने लारा एलएलपी के शेयर भी मार्च, 2005 में 100 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदा था. जबकि उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत बामुश्किल सात से आठ रुपये ही थी.
फिर भी कई गुना ऊंचे दाम पर शेयर को खरीद कर दो करोड़ से ज्यादा रुपये का निवेश कर दिया गया था. इस तरह के हथकंडे अपना कर करोड़ों की ब्लैक मनी को सफेद किया गया. ईडी की जांच के बाद यह पूरी तरह से मनी लांड्रिंग का मामला बनता है. इस वजह से पीएमएलए एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए इस कंपनी की एक दर्जन से ज्यादा संपत्ति को जब्त किया गया है.
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