तेजाब हत्याकांड : पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को पटना HC से नहीं मिली राहत, उम्रकैद की सजा बरकरार

Updated at : 30 Aug 2017 11:58 AM (IST)
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तेजाब हत्याकांड : पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को पटना HC से नहीं मिली राहत, उम्रकैद की सजा बरकरार

पटना: बिहार के बहुचर्चित तेजाब हत्या कांडमामले में राजद के बाहुबली नेता और पूर्व सांसदमोहम्मद शहाबुद्दीनसमेत चारअन्य को पटना हाईकोर्ट ने किसी प्रकार का राहत देने से इनकार करते हुए विशेष अदालत द्वारा दिये गये फैसले को सही ठहरातेहैतथाउम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस केके मंडल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने […]

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पटना: बिहार के बहुचर्चित तेजाब हत्या कांडमामले में राजद के बाहुबली नेता और पूर्व सांसदमोहम्मद शहाबुद्दीनसमेत चारअन्य को पटना हाईकोर्ट ने किसी प्रकार का राहत देने से इनकार करते हुए विशेष अदालत द्वारा दिये गये फैसले को सही ठहरातेहैतथाउम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस केके मंडल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने गत 30 जून को सुनवाई पूरी कर सुरक्षित रखे गये आदेश में बुधवार को अपना फैसला सुनाया.

उल्लेखनीय है कि सीवान के विशेष अदालत के सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन को हत्या, अपहरण, साजिश और साक्ष्य मिटाने के आरोप में आजीवन कारावास तथा 30 हजार रुपये का जुर्माना भी किया था. अदालत ने मो. शहाबुद्दीन को दो युवकों की तेजाब से नहलाकर हत्या किये जाने के आरोप में भारतीय दंड विधान की धारा 302, अपहरण के आरोप में 364 और षडयंत्र में शामिल होने के आरोप में 120 (बी) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 30 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी थी.

अदालत ने इसी मामले में तीन अन्य नामजद अभियुक्त राज कुमार साह, मो. आरिफ हुसैन और शेख असलम को भारतीय दंड विधान की धारा 364 (ए) और 323 के तहत दोषी करते हुए आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी था. इस मामले में नौ दिसंबर 2015 को मो. शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को दोषी ठहराया था.

पढ़ें…पूरा मामला
वर्ष 2004 में जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गोशाला रोड स्थित एक जमीन विवाद को लेकर चल रहे पंचायत के दौरान मारपीट की घटना हुई, जिसके बाद चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के तीन पुत्र गिरीश कुमार उर्फ निकू (24), सतीश कुमार उर्फ सोनू (18) तथा राजीव रौशन का अपहरण कर लिया गया था. बाद में गिरीश और सोनू की की तेजाब डालकर हत्या कर दी गयी थी, जबकि राजीव किसी तरह वहां से बचकर भाग निकला था.

चंदा बाबू की पत्नी के बयान पर दर्ज हुआ था मामला
बहुचर्चित तेजाब हत्याकांड के इस मामले में चंदा बाबू की पत्नी कलावती देवी के बयान पर संबंधित थाना में एक मामला दर्ज कराया गया था. जांच के क्रम में घटना के चश्मदीद गवाह चंदा बाबू के तीसरे पुत्र राजीव रौशन ने अपने बयान में बताया था कि दोनों भाईयों की हत्या उसके सामने तेजाब से नहलाकर मो. शहाबुद्दीन के पैतृक आवास प्रतापुर में की गयी थी. 16 जून 2014 को तीसरे पुत्र राजीव रौशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.

2016 में हाई कोर्ट से मिली थी जमानत
इस मामले में पूर्व सांसद को पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ द्वारा मार्च 2016 जमानत भी प्रदान कर दी गयी थी. वहीं मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शहाबुद्दीन को सीवान जेल से तिहाड़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया था. उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की दोबारा सुनवाई पटना हाई कोर्ट में शुरू हुई थी. पटना हाई कोर्ट के जस्टिस केके मंडल एवं जस्टिस एस कुमार ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए 30 जून को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. बुधवार को 49 पृष्ठों में दिये आदेश में अदालत ने विशेष अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए सभी अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया.

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