लालू के नीतीश पर लगाए गए आरोप तथ्यों से परे : जदयू

पटना : जदयू ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ पटना जिले के पंडारक थाने में वर्ष 1991 में दर्ज कराए गये कांड संख्या 131 को लेकर लगाए गए आरोपों को आज तथ्यों से परे बताया. जदयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, पार्टी सांसद आरसी सिंह और […]
पटना : जदयू ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ पटना जिले के पंडारक थाने में वर्ष 1991 में दर्ज कराए गये कांड संख्या 131 को लेकर लगाए गए आरोपों को आज तथ्यों से परे बताया. जदयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, पार्टी सांसद आरसी सिंह और प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने आज यहां संयुक्त रूप से पत्रकारों से कहा कि लालू का नीतीश के खिलाफ उक्त मामले को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं.
जदयू नेता ने कहा कि लालू झूठ परपंच का सहारा लेकर जो महल खड़ा करते हैं, वह स्वत: ढह जाता है. ललन सिंह ने कहा कि वास्तविकता यह है कि लालू प्रसाद आदतन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और छिपाकर आधा सच लोगों के सामने रखते हैं. उन्होंने कहा कि चाहे विधिक मामला हो या राजनीतिक मामला लालू न जाने किस प्रकार के सलाहकारों से सलाह लेते हैं और उनकी दुर्दशा का कारण उनके अज्ञानी सलाहकार हैं. ललनसिंह ने कहा कि लालू से अनुरोध है कि वह ऐसे सलाहकारों से बचें.
लालू प्रसाद ने कहा था कि 1991 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन 16 नवंबर को बाढ प्रखंड अनुमंडल के पंडारक थाना क्षेत्र के रैली गांव में हत्या हुई जिसको लेकर 17 नवंबर 1991 को प्राथमिकी दर्ज हुई. जिसमें पांच अभियुक्त बनाये गये थे. उन्होंने बताया कि जिस समय यह घटना घटी उस समय लालू प्रसाद प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और उनके मुख्यमंत्रित्व काल में पुलिस ने जांच की.
ललनसिंह ने कहा कि जांच के पश्चात 31 जनवरी 1993 को तीन अभियुक्त दिलीप सिंह, योगेन्द्र यादव एवं बौधु यादव के विरुद्ध आरोपपत्र दायर हुआ और नीतीश कुमार को निर्दोष पाया गया. उन्होंने बताया कि अदालत ने सूचक को आपत्ति का समय देते हुए नीतीश कुमार को पांच अगस्त 2008 को दोषमुक्त करार दिया एवं अन्य तीन अभियुक्त जिनके विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया गया था उनके विरुद्ध संज्ञान लिया.
जदयू नेताने बताया कि आरोपमुक्त एवं संज्ञान लिये जाने के पूर्व उक्त प्राथमिकी के सूचक राजाराम सिंह तथा घटना में घायल रामबाबू सिंह, सुरेश प्रसाद सिंह एवं चन्द्रमौली सिंह ने नीतीश कुमार को दोषमुक्त किये जाने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करायी बल्कि सहमति दी.
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