Padma Award 2025: शारदा सिन्हा को मरणोपरांत पद्मविभूषण, सुशील कुमार मोदी को पद्मभूषण, राष्ट्रपति ने किया ऐलान

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 25 Jan 2025 9:28 PM

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Sharda Sinha Sushil Modi

Padma Award 2025: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने शनिवार को पद्म पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा कर दी है. आइये जानते हैं बिहार के किन-किन लोगों को इससे सम्मानित किया गया है.

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Padma Award 2025: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने बिहार की लोक गायिका स्वर्गीय शारदा सिन्हा को मरणोपरांत पद्मविभूषण और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुशील मोदी को पद्म भूषण पुरस्कार देने का ऐलान किया है. पूर्व आईपीएस और समाजसेवी रहे आचार्य किशोर कुणाल को भी मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार देने का ऐलान हुआ है.

यहां देखिये पूरी लिस्ट

शारदा सिन्हा को पहले ही पद्म भूषण से किया गया था सम्मानित

मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा का 5 नवंबर 2024 की रात निधन हो गया था. वह 72 साल की थीं. पद्म भूषण से सम्मानित 72 वर्षीय शारदा सिन्हा मैथिली और भोजपुरी गानों के लिए जानी जाती हैं. उनके चर्चित गानों में ‘विवाह गीत’ और ‘छठ गीत’ शामिल हैं. शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के समस्तीपुर में संगीत से जुड़े एक परिवार में हुआ था. उन्होंने 1980 में ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन से अपना करियर शुरू किया और जल्द ही अपनी दमदार आवाज और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए मशहूर हो गईं.

Sharda sinha

शारदा सिन्हा ने भोजपुरी और मैथिली संगीत को दिलाई थी नई पहचान

शारदा सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज से न केवल भोजपुरी और मैथिली संगीत को नई पहचान दिलाई, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी अद्वितीय गायकी का जलवा बिखेरा. उनकी आवाज में सलमान खान की फिल्म “मैंने प्यार किया” का गाना “कहे तो से सजना” बेहद लोकप्रिय हुआ. इसके अलावा, उन्होंने “गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 2” और “चारफुटिया छोकरे” जैसी फिल्मों में भी गाने गाए, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा. लोक गायिका शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के हुलास गांव में हुआ था. बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि रखने वाली शारदा ने अपनी मेहनत और संगीत के प्रति जुनून से खेतों से लेकर बड़े मंचों तक का लंबा सफर तय किया. शारदा सिन्हा विशेष रूप से छठ पूजा के गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं और उन्होंने भारतीय संगीत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

सुशील कुमार मोदी 

सुशील कुमार मोदी के बारे में जानिए

सुशील कुमार मोदी बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ बिहार के वित्त मंत्री भी रहे. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे. वह 1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव बने. सुशील कुमार मोदी 1974 में बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बने और 1974 के प्रसिद्ध बिहार छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया. जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान सुशील कुमार मोदी को पांच बार गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मीसा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप मीसा को असंवैधानिक करार दिया गया. आपातकाल के बाद उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (AVBP) का राज्य सचिव नियुक्त किया गया. सुशील कुमार मोदी 1977 से 1986 तक ABVP में विभिन्न नेतृत्व पदों पर कार्य किया.

बिहार भाजपा के दिग्गज नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का 13 मई 2024 को दिल्ली में निधन हो गया था. वह कैंसर से पीड़ित थे. नीतीश कुमार जब 2005 में बिहार के सीएम बने तब सुशील मोदी इनके डिप्टी बने. दोनों की जोड़ी ने बिहार में विकास की क्रांति लाई.

Acharya kishor kunal

आचार्य किशोर कुणाल के बारे में जानिए

पटना के महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल की पहचान समाज, संस्कृति और आध्यात्म के प्रति समर्पित योद्धा के तौर पर रही. पटना में महावीर मंदिर निर्माण, महावीर कैंसर अस्पताल जैसे अनेक कार्यों के वे प्रणेता रहे. किशोर कुणाल का जीवन न केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में बल्कि एक धार्मिक प्रचारक और समाज सुधारक के रूप में भी प्रभावशाली रहा. एक प्रख्यात धार्मिक और सामाजिक व्यक्तित्व के तौर पर आचार्य किशोर कुणाल ने भारतीय समाज में अपने कार्यों से महत्वपूर्ण योगदान दिया. वे महावीर मंदिर न्यास के सचिव के रूप में कार्यरत थे और इसके माध्यम से उन्होंने धार्मिक गतिविधियों और समाज सेवा में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा वे राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य भी थे, जहां उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अपने योगदान और समर्थन से धार्मिक समुदाय को प्रेरित किया.

सभी वर्गों के लिए आचार्य किशोर ने किया काम

बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में आचार्य किशोर के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुधार किए और राज्य के प्रमुख मंदिरों को धार्मिक न्यास से जोड़ा. इससे न केवल मंदिरों का प्रशासन बेहतर हुआ, बल्कि धार्मिक गतिविधियों में भी पारदर्शिता और समृद्धि आई. इसके अलावा किशोर कुणाल ने दलित समाज के साधुओं को मंदिरों का पुजारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह कदम सामाजिक समानता और धार्मिक समावेशिता की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव आया. उनके इस कार्य ने उन्हें समाज के सभी वर्गों में सम्मान और प्रेम दिलाया और वे एक प्रेरणा स्रोत बन गए.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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