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Bihar में शराबबंदी को फेल कर रहे अधिकारी!  मंत्री के ऐलान से अफसर हैरान, तस्कर परेशान

Updated at : 20 Dec 2024 6:18 PM (IST)
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प्रतिकात्मक तस्वीर

प्रतिकात्मक तस्वीर

Bihar: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद भी शराब की बढ़ती खपत को दूर करने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है.

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Bihar: बिहार की नीतीश सरकार ने सूबे में 2016 से ही शराबबंदी लागू कर रखा है. लेकिन सूबे में अभी भी बहुत ही आराम से शराब मिल जाता है. लेकिन अब इसे रोकने के लिए नीतीश सरकार और सख्त कदम उठाने जा रही है. इस बात का संकेत खुद बिहार सरकार में मद्य निषेध विभाग के मंत्री रत्नेश सदा ने दिया है. जानकारी के मुताबिक गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ मंत्री ने समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिए सरकार सख्त है. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

मंत्री रत्नेश सदा
मंत्री रत्नेश सदा

शराबबंदी को फेल कर रहे अधिकारी: रत्नेश सदा

विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री रत्नेश सदा ने विभाग के कई अधिकारियों के काम काज पर नाराजगी जताया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरे जानकारी में ऐसे बात आई है कि कई अधिकारी शराबबंदी को फेल करने में जुटे हुए है. अगर वह नहीं सुधरे तो सरकार उनके खिलाफ एक्शन लेने से भी नहीं हिचकेगी. बैठक के दौरान मंत्री ने बेतिया, सुपौल और बांका के मद्य निषेध अधीक्षकों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया. 

तस्करों के खिलाफ करे CCA के तहत कार्रवाई

बैठक के दौरान मंत्री ने शराब माफिया को भी कड़ा संदेश दिया. उन्होंने अधिकारियों से तस्करों के  खिलाफ सीसीए के तहत सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया. इसके साथ ही राज्य में नशे के अन्य रूपों पर भी सख्त कदम उठाने की आवश्यकता को जताते हुए नशे के संसाधनों की निगरानी करने के लिए कहा.

बिहार में 2016 से लागू है पूर्ण शराबबंदी

बताते चलें कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर साल 2016 में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया गया था. कहा जाता है सीएम ने महिलाओं की मांग पर यह कदम उठाया था. इसकी सफलता के लिए पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनाई गयी. कानून के तहत राज्य की सीमा के अंदर शराब का निर्माण, भंडारण, ट्रांसपोर्ट, पीना, पिलाना, बेचना सब गैर कानूनी है. लेकिन हैरानी की बात है कि राज्य में हर साल लाखों लीटर अवैध शराब की बरामदगी की जाती है और हजारों की संख्या में शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में जेल जाते हैं. अक्सर देशी और विदेशी शराब के खेप पकड़े जाते हैं और जहरीली शराब पीने से 2016 से अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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