दौलतपुर में सावित्रीबाई फुले की जयंती पर संगोष्ठी, महिला शिक्षा पर दिया जोर

NAWADA NEWS.हिसुआ की चितरघट्टी पंचायत अंतर्गत दौलतपुर गांव स्थित विद्यालय परिसर में शनिवार को देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.
फोटो कैप्शन-हिसुआ के दौलतपुर गांव में संगोष्ठी पर मौजूद महिलाएं व अन्य. प्रतिनिधि, हिसुआ हिसुआ की चितरघट्टी पंचायत अंतर्गत दौलतपुर गांव स्थित विद्यालय परिसर में शनिवार को देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के तत्वावधान में शिक्षिका पुष्पा कुमारी के संयोजन में हुआ. इसमें क्षेत्र की महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया. संगोष्ठी में महिलाओं से अपनी बेटियों को पढ़ाने और उन्हें समाज में आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया. साथ ही निरक्षर महिलाओं को भी साक्षर बनने और पढ़ाई-लिखाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया. मुख्य वक्ता शिक्षिका पुष्पा कुमारी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले महान शिक्षिका और समाज सुधारक थीं. उन्होंने महिला शिक्षा, दलितों के उत्थान और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया. अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ उन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय खोला और सामाजिक समानता व न्याय के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की. उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले को भारतीय नारी आंदोलन की जननी कहा जाता है. कठिन परिस्थितियों और सामाजिक विरोध के बावजूद उन्होंने शिक्षा की अलख जगायी. विद्यालय जाते समय उन्हें गालियां दी जाती थीं और अपमान सहना पड़ता था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. उनके संघर्ष के कारण ही आज बेटियां शिक्षा के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. अन्य वक्ताओं ने भी सावित्रीबाई फुले के जीवन, संघर्ष और योगदान पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम में क्षेत्र की अच्छी संख्या में महिलाएं, समाजसेवी और ग्रामीण उपस्थित रहे और सावित्रीबाई फुले की जीवनी से रूबरू हुए.
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