नवादा में एनएच-20 पर टोटो की आवाजाही से फिर उठे सवाल, हादसे में बाइक सवार युवक की मौत
दुर्घटनाग्रस्त बस की तस्वीर
Nawada News : नवादा में एनएच-20 पर सरकारी बस और टोटो की टक्कर में एक बाइक सवार की दर्दनाक मौत हो गई. हाईवे पर ई-रिक्शा के परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल.
Nawada News : रजौली-बख्तियारपुर एनएच-20 पर सोमवार सुबह मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नहर के समीप सरकारी बस और टोटो की टक्कर में बाइक सवार युवक की मौत हो गई. मृतक की पहचान वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव निवासी बबलू सिंह के पुत्र रोशन कुमार के रूप में हुई है. हादसे के बाद पुलिस ने दुर्घटना में शामिल सरकारी बस, टोटो और बाइक को जब्त कर लिया है. घटना ने एक बार फिर एनएच-20 पर टोटो और ई-रिक्शा के परिचालन, यातायात नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
टक्कर के बाद बाइक सवार की मौत
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नहर के समीप सुबह सरकारी बस और टोटो के बीच टक्कर हुई. इसी दौरान बाइक सवार रोशन कुमार भी हादसे की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई. घटना के बाद मौके पर अफरातफरी की स्थिति बन गई. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना में शामिल तीनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. हादसे में शामिल वाहनों में बाइक संख्या BR27U9241, टोटो संख्या BR27RA4869 और सरकारी बस संख्या BR01PR8660 बताई गई है. दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या रही, यह पुलिस की जांच और घटनास्थल से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
हादसे के बाद फिर कठघरे में यातायात व्यवस्था
घटना ने एनएच-20 की यातायात व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में बस, ट्रक, हाइवा, कंटेनर और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं. ऐसे में टोटो और ई-रिक्शा जैसे छोटे एवं अपेक्षाकृत धीमी गति वाले वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है. खासकर सवारी बैठाने या उतारने के दौरान अचानक सड़क किनारे अथवा सड़क पर वाहन रोकना, बिना पर्याप्त संकेत के दिशा बदलना या लेन बदलना यातायात के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. पीछे से तेज गति में आ रहे वाहनों के लिए ऐसे वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
दुर्घटना के लिए केवल टोटो को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं
हालांकि किसी भी दुर्घटना के लिए केवल टोटो या ई-रिक्शा को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा. सड़क हादसे के पीछे वाहन की गति, चालक की सावधानी, यातायात नियमों का पालन, सड़क की स्थिति, दृश्यता और अन्य परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं. दुर्घटना के समय वाहनों की गति क्या थी, कौन सा वाहन किस दिशा में जा रहा था और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता पुलिस की जांच के बाद ही चल सकेगा.
शहर से गांव तक टोटो बना स्थानीय परिवहन का आधार
नवादा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में टोटो स्थानीय परिवहन का प्रमुख साधन बन चुका है. कम दूरी की यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. शहर के अलावा आसपास के गांवों तक यात्रियों को पहुंचाने में भी टोटो चालकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. यही वजह है कि शहर से बाहर निकलने के बाद एनएच के आसपास भी टोटो की आवाजाही दिखाई देती है. समस्या तब गंभीर हो जाती है, जब स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के हाईवे यातायात के लिए एक ही मार्ग का इस्तेमाल होता है. ऐसे में छोटे वाहनों के परिचालन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था और प्रभावी निगरानी जरूरी हो जाती है.
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अगर प्रतिबंध है तो निगरानी कौन करेगा?
एनएच पर टोटो और ई-रिक्शा के परिचालन को लेकर सबसे बड़ा सवाल नियमों के अनुपालन का है. यदि एनएच के किसी हिस्से में इन वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि प्रतिबंध का प्रभावी तरीके से पालन कराया जाए. वहीं, यदि किसी हिस्से में टोटो के परिचालन की अनुमति है, तो वहां सुरक्षित लेन, गति सीमा, निर्धारित स्टॉपेज और सवारी बैठाने-उतारने की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए. जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एनएच-20 के किन हिस्सों में टोटो और ई-रिक्शा चल सकते हैं और किन हिस्सों में इनके परिचालन पर रोक है. नियमों को स्पष्ट करने के साथ उनका पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है.
हादसे के बाद जब्ती से आगे बढ़ने की जरूरत
दुर्घटना के बाद वाहनों को जब्त कर जांच करना पुलिस की जरूरी कार्रवाई है, लेकिन सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. प्रशासन को एनएच-20 के दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां नियमित वाहन जांच, गति नियंत्रण, संकेतक, सुरक्षित स्टॉपेज और यातायात निगरानी की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए. वहीं, टोटो चालकों को भी हाईवे पर सुरक्षित परिचालन के नियमों की जानकारी देना जरूरी है. नियमों के साथ उनका नियमित पालन सुनिश्चित किया जाना सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
टोटो चालकों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था भी जरूरी
टोटो चालकों के लिए वाहन रोजी-रोटी का साधन है. शहर और गांवों के बीच यात्रियों को पहुंचाने के लिए उन्हें कई बार हाईवे से होकर गुजरना पड़ता है. ऐसे में यदि किसी मार्ग पर टोटो का परिचालन प्रतिबंधित किया जाता है, तो प्रशासन को सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग और निर्धारित पड़ाव की व्यवस्था भी करनी चाहिए. व्यवस्थित रूट, निर्धारित स्टॉपेज और स्पष्ट यातायात नियम होने से टोटो चालकों के साथ-साथ आम यात्रियों को भी राहत मिल सकती है और हाईवे पर दुर्घटना की आशंका कम की जा सकती है.
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प्रशासन के सामने कई अहम सवाल
हादसे के बाद जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के सामने कई सवाल खड़े हैं. एनएच-20 पर टोटो के परिचालन को लेकर वर्तमान व्यवस्था क्या है? किन हिस्सों में टोटो चलाने की अनुमति है? प्रतिबंधित हिस्सों में नियमित जांच होती है या नहीं? टोटो के लिए वैकल्पिक सुरक्षित रूट और स्टॉपेज तय हैं या नहीं? चालकों को हाईवे पर परिचालन के नियमों की जानकारी दी जाती है? दुर्घटना संभावित स्थानों पर गति नियंत्रण और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं? इन सवालों का जवाब सामने आना इसलिए जरूरी है, क्योंकि सड़क सुरक्षा केवल हादसे के बाद वाहनों को जब्त करने तक सीमित नहीं हो सकती.
हादसा चेतावनी है, अगली जान जाने का इंतजार क्यों?
एनएच-20 पर हुए इस हादसे ने एक परिवार से उसका सदस्य छीन लिया. पुलिस दुर्घटना की जांच कर रही है और वास्तविक कारण जांच के बाद सामने आएगा. लेकिन घटना ने यातायात व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत जरूर सामने ला दी है. जरूरत इस बात की है कि हादसे की जांच के साथ एनएच-20 पर टोटो और ई-रिक्शा के परिचालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए. जहां प्रतिबंध है, वहां प्रभावी निगरानी हो और जहां परिचालन की अनुमति है, वहां सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए. क्योंकि हादसे के बाद कार्रवाई जरूरी है, लेकिन हादसा होने से पहले उसे रोकना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है.
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