PHOTOS : सिलाव के खाजा से गिरियक के राजभोग तक, पांच तस्वीरों में जानिए नालंदा की 5 मशहूर मिठाइयों की खासियत


52 परतों वाला सिलाव का खाजा, स्वाद और परंपरा की 200 साल पुरानी पहचान.
सिलाव का खाजा: 52 परतों में बसा 200 साल पुराना स्वाद
नालंदा के सिलाव का खाजा अपनी खास 52 परतों और कुरकुरे स्वाद के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है. करीब 200 साल पहले सिलाव निवासी काली साह ने इसकी शुरुआत की थी, तब इसे ‘खजूरी’ कहा जाता था. समय के साथ इसका नाम खाजा पड़ा, लेकिन इसका पारंपरिक स्वाद आज भी बरकरार है. गेहूं का आटा, मैदा, चीनी, घी, इलायची और सौंफ से तैयार होने वाला यह व्यंजन दिखने में परतदार पैटीज जैसा नजर आता है. खाजा को मीठे और नमकीन, दोनों रूपों में बनाया जाता है और इसे GI टैग भी मिल चुका है. बिहार के अलावा यह कई राज्यों में लोकप्रिय है और इसकी पहचान विदेशों तक पहुंच चुकी है.

तिल और चीनी से बनी बिहारशरीफ की कुरकुरी रेवड़ी, सर्दियों की खास मिठास
बिहारशरीफ की रेवड़ी: तिल की खुशबू और कुरकुरे स्वाद की मिठास
बिहारशरीफ की रेवड़ी छोटी, कुरकुरी और स्वाद में बेहद खास मिठाई मानी जाती है. इसे मुख्य रूप से चीनी और तिल से तैयार किया जाता है, जबकि पारंपरिक रेवड़ी में तिल और गुड़ का भी इस्तेमाल होता है. तिल की खुशबू और कुरकुरापन इसे खास स्वाद देते हैं. सर्दियों के मौसम में रेवड़ी की मांग खास तौर पर बढ़ जाती है. इसके अलावा शादियों और दूसरे पारंपरिक आयोजनों में भी इसे पसंद किया जाता है. बिहारशरीफ की यह मिठाई स्थानीय स्वाद और परंपरा से जुड़ी अपनी अलग पहचान रखती है.

हल्के सुनहरे रंग और मुलायम-रसदार बनावट वाला गिरियक का मशहूर राजभोग.
गिरियक का राजभोग: छेना की बड़ी मिठाई में बसा पुराना स्वाद
नालंदा के गिरियक का राजभोग छेने से तैयार होने वाली बड़ी और रसीली मिठाई है, जो लंबे समय से अपने खास स्वाद और खुशबू के लिए पहचानी जाती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध दूध को फाड़कर छेना तैयार किया जाता है. दूसरी तरफ दूध को चूल्हे पर अच्छी तरह सुखाकर अंदर भरने के लिए मावा यानी खोआ तैयार किया जाता है. तैयार छेने में खोआ की भरावन देकर इसे गोल आकार दिया जाता है और फिर चाशनी में पकाया जाता है. राजभोग का रंग हल्का पीला से सुनहरा, जबकि इसकी बाहरी परत मुलायम और अंदर का हिस्सा नरम व रसदार होता है. खोआ की भरावन और चाशनी इसे खास मिठास देती है, जिससे इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है.

हल्के भूरे रंग का खीर मोहन, दूध से तैयार नालंदा की खास मिठास.
नालंदा का खीर मोहन: दूध से तैयार होने वाली खास मिठाई
नालंदा का खीर मोहन अपने खास स्वाद और हल्के भूरे रंग के कारण अलग पहचान रखता है. इसे बनाने के लिए पहले शुद्ध दूध को अच्छी तरह खौलाकर फाड़ा जाता है और उससे छेना तैयार किया जाता है. इसके बाद छेने से गोलियां बनाकर उन्हें चीनी के घोल में डाला जाता है। करीब आधे घंटे तक घोल में पकने के बाद खीर मोहन तैयार हो जाता है. हल्का भूरा रंग, मुलायम बनावट और चाशनी की मिठास इस मिठाई को खास बनाते हैं.

छेना, खोवा और पोस्ता दाने से तैयार नालंदा का मशहूर रस कदम
नालंदा का रस कदम: छेना और खोवा के मेल से बना खास स्वाद
नालंदा की पहचान बढ़ाने वाली मिठाइयों में रस कदम का भी खास स्थान है. इसे शुद्ध दूध से तैयार किए गए छेना से बनाया जाता है, जिस पर शुद्ध खोवा की परत चढ़ाई जाती है. इसके बाद मिठाई के ऊपर पोस्ता दाना लगाया जाता है, जो इसे अलग पहचान देता है. इलायची और अन्य मसालों का इस्तेमाल इसके स्वाद और खुशबू को और खास बनाता है. अपने अनोखे स्वाद के कारण रस कदम की मांग दिल्ली, कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी है. इसकी लोकप्रियता देश से बाहर रहने वाले मिठाई प्रेमियों तक भी पहुंच चुकी है.
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लेखक के बारे में
By सूर्यकांत कुमार
सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.
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