बंगाल का यह जिला है भारत की ‘मैंगो सिटी’, जानें इसका गौरवशाली इतिहास और आम की खूबियों के बारे में

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मालदा से एक्सपोर्ट होने वाले आम.

Mango City Of India Malda: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले को क्यों कहा जाता है भारत की मैंगो सिटी? जानिए फजली, हिमसागर और लक्ष्मणभोग आम के इतिहास, स्वाद और निर्यात से जुड़ी पूरी बातें.

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फलों का राजा कहा जाने वाला आम पूरे भारत में अपनी अनगिनत किस्मों, बेमिसाल स्वाद के लिए जाना जाता है. देश के कई हिस्सों में आम की खेती होती है, लेकिन पश्चिम बंगाल के एक ऐतिहासिक जिले ने आम उत्पादन में अपनी अमिट छाप छोड़ी है. यह जिला है- मालदा (Malda). राज्य के उत्तरी भाग में स्थित मालदा जिले को आधिकारिक और व्यावहारिक रूप से ‘भारत की मैंगो सिटी’ (India's Mango City) कहा जाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक जाते हैं मालदा के आम

मालदा में पैदा होने वाले रसीले और स्वादिष्ट आम केवल पश्चिम बंगाल या आसपास के राज्यों तक ही सीमित नहीं हैं. यहां के बागानों के आम की देश के कोने-कोने में आपूर्ति की जाती है. विदेशों में भी इसका निर्यात (Export) होता है. अंतरराष्ट्रीय फल बाजारों में मालदा के आमों की मांग हमेशा बनी रहती है.

मालदा से आम के एक्सपोर्ट के आंकड़े.
मालदा से आम के एक्सपोर्ट के आंकड़े.

पाल राजवंश, सल्तनत और मुगल काल से जुड़ा है इतिहास

मालदा का आम की खेती से रिश्ता कोई नया या हालिया दौर का नहीं है. ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों के अनुसार, मध्यकाल की शुरुआत में जब यह क्षेत्र पाल राजवंश (Pala Kingdom) का हिस्सा था, तब भी यहां विशाल आम के बागान हुआ करते थे, जो स्थानीय व्यापार को मजबूती देते थे. बाद के वर्षों में, बंगाल सल्तनत और मुगल साम्राज्य के दौरान मालदा एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा. इसी दौर में आमों को शाही पहचान मिली.

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गंगा और महानंदा नदियों की उपजाऊ मिट्टी बनाती है खास

मालदा के ‘मैंगो सिटी’ बनने में यहां की अनूठी भौगोलिक बनावट का बहुत बड़ा योगदान है. गंगा और महानंदा नदियों के बीच बसे होने के कारण मालदा की जमीन में बेहद उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) पायी जाती है. यहां की गर्म जलवायु और मानसूनी बारिश आम की वृहद खेती के लिए प्राकृतिक रूप से सबसे अनुकूल माहौल तैयार करती है. पीढ़ियों से चले आ रहे विशाल बागान आज भी यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.

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फजली, हिमसागर और लक्ष्मण भोग के सब दीवाने

मालदा को पहचान दिलाने में यहां पैदा होने वाली आम की विविध प्रजातियों का मुख्य योगदान है. इनमें फजली (Fazli), लंगड़ा (Langra), हिमसागर (Himsagar) और लक्ष्मण भोग (Lakshmanbhog) आम प्रमुख हैं. फजली आम अपने बड़े आकार और सीजन के अंत तक उपलब्ध रहने की खूबी के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

परंपरागत खेती और मजबूत सप्लाई चेन का कॉम्बिनेशन

मालदा के किसानों ने सदियों पुरानी पारंपरिक कृषि पद्धतियों को सहेजते हुए आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाला है. बागानों से आम तोड़ने से लेकर स्थानीय मंडियों, दूसरे राज्यों और फिर निर्यात चैनलों तक का एक बेहद मजबूत और सुसंगत सप्लाई चेन नेटवर्क विकसित किया है, जो मालदा को निरंतर उत्पादन में अग्रणी बनाये रखता है.

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मिट्टी और जलवायु से मिलता है अनूठा स्वाद

मालदा जिले के आमों का अनोखा स्वाद, खास मिठास और बेहतरीन आकार सीधे तौर पर यहां की नदी तटीय मिट्टी और मौसम के संतुलन से जुड़ी है. यही कारण है कि व्यापारी और आम प्रेमी दोनों ही मालदा के आमों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. मालदा की पहचान केवल आम के भारी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इतिहास, भूगोल और सदियों पुरानी कृषि परंपरा का एक दुर्लभ संगम है.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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