खादी चला फैशन की राह बनेगी टी-शर्ट व जींस भी

Updated at : 14 Jun 2016 8:23 AM (IST)
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खादी चला फैशन की राह बनेगी टी-शर्ट व जींस भी

अच्छी खबर : चरखा चला कर गांवों की महिलाएं बनी रहीं आत्मनिर्भर गांधी के खादी को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है. महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने में खादी ग्रामोद्योग मंडल द्वारा उपलब्ध कराये गये चरखे अपनी महती भूमिका निभा रही है. जिले के खनवां गांव की धमक अब […]

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अच्छी खबर : चरखा चला कर गांवों की महिलाएं बनी रहीं आत्मनिर्भर
गांधी के खादी को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है. महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने में खादी ग्रामोद्योग मंडल द्वारा उपलब्ध कराये गये चरखे अपनी महती भूमिका निभा रही है. जिले के खनवां गांव की धमक अब प्रधानमंत्री तक पहुंची है.
रोजगार के नये रास्ते खोलने में खादी अपनी भूमिका निभाने लगा है. जिले में खादी के साथ ही सिल्क के अंडी, मटका, तसर, कटीया जैसे प्रोडक्ट भी बनाये जा रहे हैं.
नवादा (नगर) : खादी को बढ़ावा देने के लिए जिले की महिलाएं लगातार काम कर रहीं हैं, जो धीरे-धीरे जिले की पहचान बनती जा रही है. विभिन्न गांवों में चरखा चला कर महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं. खादी ग्रामोद्योग मंडल सेखोदेवरा आश्रम कौआकोल के साथ ही स्थनीय सांसद व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की रुचि भी इस दिशा में विशेष रूप से देखने को मिल रही है.
लगभग 15 सौ किलो खादी के धागे का उत्पादन प्रति माह जिले में किया जा रहा है. ये धागे मगध क्षेत्र के जहानाबाद, अरवल आदि जगहों पर लगे लूम में जाकर आकर्षक कपड़ों में तब्दील हो रहे हैं. धागा उत्पादन करने में महिलाओं की सबसे अधिक भागीदारी है. जिले के रतोई, रूपौ, लालबिगहा, कोशला, काशीचक, सिंघना आदि गांवों में हस्त चरखा से व खनवां में सौर चालित चरखा के माध्यम से कच्चा माल से धागा तैयार किया जा रहा है. सौ किलो से लेकर पांच सौ किलो तक धागा का उत्पादन विभिन्न गांवों की महिलाओं द्वारा किया जाता है.
खादी ग्रामोद्योग मंडल कर रहा मदद : खादी ग्रामोद्योग मंडल सेखोदेवरा आश्रम कौआकोल द्वारा सभी केंद्रों का संचालन किया जाता है. धागा उत्पादन का काम ग्राम स्तर पर बनी समितियों द्वारा किया जाता है.
प्रशिक्षण से लेकर कच्चा माल उपलब्ध कराने, तैयार माल की बिक्री करने आदि का काम ग्रामोद्योग मंडल द्वारा किया जाता है. कच्चे माल को हाजीपुर के प्लांट के अलावे ऊनी कपड़ों के लिए पानीपत आदि से खरीदा जाता है, जो जरूरत के मुताबिक संबंधित केंद्रों पर पहुंचाया जाता है. तैयार धागे को किलो के हिसाब से खरीदा जाता है.
सिल्क कपड़ों में भी दिखती कारीगरी : जिले के कई स्थानों पर सिल्क कपड़ों का निर्माण किया जाता है. सिल्क के कीड़े से तैयार धागों का इस्तेमाल करके वारिसलीगंज के नवाजगह, सेखोदेवरा आश्रम के करघों पर सिल्क के वेराइटी अंडी, मटका, तसर, कटीया, कोली कटीया आदि कपड़े तैयार किये जाते हैं, जिसकी बड़ी डिमांड रहती है. कारीगरों का एक वर्ग इससे जुड़ कर काम कर रहा है.
अक्तूबर से मार्च तक बढ़ जाता है काम : अक्तूबर से मार्च तक खादी का डिमांड अपेक्षाकृत अधिक हो जाता है. सरकार द्वारा मिलनेवाली छूट का लाभ को लेकर भी यह स्थिति बनती है. इस समय तो सभी कारीगरों को काम मिल जाता है. लेकिन कच्चे माल की कमी या पूंजी के अभाव में कुछ लोगों को मंदी के समय बैठना पड़ता है.
खादी ग्रामोद्योग मंडल के अधिकारी इस समस्या के संबंध में बताते हैं कि 25 प्रतिशत की छूट ग्राहकों को कुछ महीने खरीद पर दिया जाता है. इसका 15 प्रतिशत अनुदान केंद्र सरकार व 10 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है. पिछले कई वर्षों से यह अनुदान राज्य सरकार द्वारा नहीं दिया जा रहा है. इससे पूंजी प्रतिवर्ष प्रभावित हो रही है. यदि जिले का बकाया लगभग डेढ करोड़ अनुदान का भुगतान हो जाता है तो मंदी के समय भी कच्चा माल लोगों को उपलब्ध करा कर काम दिया जा सकता है.
जींस व टी-शर्ट तैयार करने की हो रही पहल
आधुनिक दौर के पसंद को देखते हुए खादी ग्रामोद्योग मंडल जींस व टी-शर्ट तैयार करने की पहल कर रहा है. खनवां व अन्य स्थानों पर तैयार 30 से 50 अंक के धागों का इस्तेमाल करके जिंस व टी-शर्ट के कपड़े तैयार किये गये हैं. यदि यह प्रयोग सफल होता है तो निश्चित ही खादी उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद आमलोगों में खादी के प्रति क्रेज बढ़ा है. रोजगार से जुड़े लोगों को इससे नयी उम्मीद बनी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
खादी लोगों को रोजगार से जोड़ने के साथ ही देश के आर्थिक उन्नति में भी अपनी भूमिका निभा रही है. मगध क्षेत्र में धागा व कपड़ा तैयार करने में समिति बना कर महिलाओं को जोड़ा गया है. आधी आबादी को सशक्त बनाने में खादी भी काम कर रही है. नये-नये उत्पाद को बढ़ावा देने का काम भी चल रहा है. यदि सफलता मिली तो जल्द ही खादी से बना जिंस व टी-शर्ट मिलने लगेगा.
अरविंद सिंह, प्रधानमंत्री, खादी ग्रामोद्योग मंडल सेखोदेवरा आश्रम कौआकोल
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