जोड़ें ...मजदूरों का पलायन जारी

जोड़ें …मजदूरों का पलायन जारी काशीचक. प्रखंड से मजदूरों का पलायन थम नहीं रहा है़ मजदूर सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में अपना हक और अधिकार लेने में विफल हो रहे है़ं नतीजा यह है कि ईट भट्ठे या यूपी व दिल्ली के लिए पलायन कर रहे हैं. सरकारी स्तर पर मजदूरों का पलायन […]
जोड़ें …मजदूरों का पलायन जारी काशीचक. प्रखंड से मजदूरों का पलायन थम नहीं रहा है़ मजदूर सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में अपना हक और अधिकार लेने में विफल हो रहे है़ं नतीजा यह है कि ईट भट्ठे या यूपी व दिल्ली के लिए पलायन कर रहे हैं. सरकारी स्तर पर मजदूरों का पलायन रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है़ मजदूर रंजीत माझी व धीना मांझी ने बताया कि परिवार के साथ ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए (दादन) एडवांस के रूप के रूप में 50 हजार रुपये प्रति जोड़ी मिल जाता है़ उस पैसे से घर गृहस्थी सहित शादी विवाह व दवा दारू होता है़ जिस वजह से ठेकेदारों के साथ भट्ठे पर जाकर काम करना पड़ता है़ अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष महेंद्र मांझी बताते हैं कि सरकार की ओर से गरीब अतिपिछड़ा, दलित व महादलित के लिए चलाये जा रहे कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता नहीं होने से लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है़ काशीचक प्रखंड के सात पंचायतों में लगभग 50 महादलित बस्ती में पिछड़े परिवार के लोग गरीबी रेखा से नीचे है़ं जानकारों की मानें, तो सरकार द्वारा शिविर लगा कर इन गरीबों को विकास की जानकारी नहीं दी जा रही है़ इसमें पदाधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता साफ झलक रहीं है़ नतीजतन सरकार के महत्वपूर्ण व कल्याणकारी योजनाओं से मजदूर वंचित हैं. गरीबी मिटाने की सरकारी आश्वासन हाथी के दांत साबित हो रहे हैं.
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