आठ को दूल्हे को विदा कर ले जायेगी दुल्हन

Updated at : 06 Mar 2018 5:03 AM (IST)
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आठ को दूल्हे को विदा कर ले जायेगी दुल्हन

कन्या पक्ष के यहां निमंत्रण व तिलक-फलदान के लिए गये वर पक्ष के लोग निमंत्रण कार्ड पर भगवान बुद्ध व अांबेडकर की छपी हैं तस्वीरें बाल-विवाह, नशामुक्ति व प्लास्टिक हटाने का संदेश हिसुआ : सोमवार से हिसुआ के सिंधौली गांव में अनोखी शादी की शुरुआत हुई. बिना दहेज के इस शादी का नाम सामाजिक परिवर्तन […]

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कन्या पक्ष के यहां निमंत्रण व तिलक-फलदान के लिए गये वर पक्ष के लोग

निमंत्रण कार्ड पर भगवान बुद्ध व अांबेडकर की छपी हैं तस्वीरें
बाल-विवाह, नशामुक्ति व प्लास्टिक हटाने का संदेश
हिसुआ : सोमवार से हिसुआ के सिंधौली गांव में अनोखी शादी की शुरुआत हुई. बिना दहेज के इस शादी का नाम सामाजिक परिवर्तन विवाह दिया गया है. सोमवार को गया जिले के लड़की पक्ष को लड़केवाले तिलक-फलदान करने गये. आठ मार्च को कन्या बरात लेकर हिसुआ पहुंचेगी और सामाजिक परिवर्तन विवाह करेगी. विवाह पंडित जी के मंत्रोच्चारण से नहीं आम लोगों के आशीर्वाद से होगी. हिसुआ के सिंधौली गांव निवासी मोसाफिर कुशवाहा के पुत्र पंकज कुमार और गया के अतरी थाना क्षेत्र के मौलानगर निवासी रामाशीष प्रसाद की पुत्री कुमारी अनमेहा की बिना दहेज की अनोखी शादी हो रही है.
मोसाफिर कुशवाहा व उनके परिवारवाले बताते हैं कि वे लोग लड़की को तिलक-फलदान करने जा रहे हैं. वहां से कन्या पक्षवाले बरात लेकर आयेंगे और सिंधौली में शादी होगी. दुल्हन दूल्हे को विदा करके ले जायेगी. शादी कार्यक्रम के माध्यम से समाज की फिजुलखर्ची और कुरीतियों की पहल है. निमंत्रण कार्ड में भी इसी को फोकस किया गया है. बिना दहेज की शादी, बाल-विवाह, नशामुक्ति, प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना है आदि के संदेश करते हुए आमंत्रण पत्रक बांटे गये हैं.
कन्या के पिता रामाशीष प्रसाद भी इस विवाह से समाज में पहले कुछ करने की बातें कहते हैं. ऐसे विवाह के समर्थन में क्षेत्र के कई दर्जन लोग हैं और कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं. बिना दहेज की शादी की सराहना भी की जा रही है. लोगों का कहना है कि इस पहल से सामाजिक परिवर्तन में बल मिलेगा.
सच्चा इंसान बनने का किया आह्वान
आमंत्रण कार्ड में बुद्धं शरणं गच्छामि. धम्मे शरणं गच्छामि.. संघम् शरणं गच्छामि लिखा होने के साथ बुद्ध और अांबेडकर की तस्वीरें छपी हुई हैं. कार्ड के साथवाले पत्रक में रूढ़ीवादी परंपराओं को छोड़ने, दहेज प्रथा के विरुद्ध अभियान चलाने, ब्राह्मणवादी व्यवस्था को त्यागने आदि का संदेश है. पत्रक में हिंदू-मुसलमान के बीच के नफरत को त्याग कर सच्चा इंसान बनने का भी संदेश है.
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